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अब सेनानी के परिजनों को भटका रहे अफसर
Updated Sat, 10 Feb 2018 11:16 PM IST
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बलिया। आम आदमी तो दूर देश की आजादी के लिए प्राणों की आहुति देने वाले सेनानियों के परिजनों की भी सुनने वाला कोई नहीं है। ऐसा ही एक मामला सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र के गोड़ौरा ग्राम का प्रकाश में आया है। जहां पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद स्वतंत्रता सेनानी के परिजनों को उसके पेंशन क्लेम को देने में शासन के अफसर परिजनों को भटकाने में लगे हुए है। उसे न्याय पाने के लिए कितने बार हाईकोर्ट में गुहार लगानी पड़ेगी। यह बात उसके जेहन में नहीं बैठ रही है।
सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र के गोड़ौरा निवासी सेनानी पिता स्व. रामवृक्ष अहीर के मौत के बाद उनके आश्रित को पेंशन देने का प्रावधान है। सेनानी की पत्नी सलाबो देवी का पेंशन बीच में ही अकारण बंद कर दिया गया। गुहार लगाते-लगाते उसकी मौत हो गई। लेकिन उसे पेंशन नहीं दिया गया। सेनानी के बेटे नमोनारायण चौधरी ने अपनी मां के जीवन काल के दौरान मिलने वाले सेनानी आश्रित पेंशन के लिए क्लेम किया तो उसे क्लेम नहीं दिया गया। जिसके बाद उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई। जिसमें हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए 24 जनवरी 2017 को आदेश दिया कि इस मामले की जांच कराकर पेंशन क्लेम का निस्तारण करते हुए आवेदक को उसकी पेंशन की धनराशि का भुगतान करा दिया जाय। इस आदेश के बाद शासन के पेंशन अनुभाग से प्रकरण का निस्तारण कराने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया। जिसके बाद डीएम ने इस प्रकरण में सिकंदरपुर एसडीएम से जांच आख्या मांगी। जांच के दौरान अपने आख्या में एसडीएम ने ब्लाक अफसरों से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र को दरकिनार करते हुए लोगों के बयान के आधार पर आवेदक के क्लेम का खारिज करते हुए रिपोर्ट भेज दी। जिसके बाद सेनानी का परिजन भटक रहे हैं। आवेदक नमोनारायण की मानें तो किसी भी क्लेम में प्रमाण पत्र को साक्ष्य माना जाता है जबकि एसडीएम ने प्रमाण पत्र को दरकिनार कर लोगों के बयान को ही सही मानने का काम किया है। जिसके बाद क्लेम के लिए उच्च न्यायालय मेें अवमानना याचिका दाखिल करने के बाद ही न्याय मिलने की संभावना है।
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सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र के गोड़ौरा निवासी सेनानी पिता स्व. रामवृक्ष अहीर के मौत के बाद उनके आश्रित को पेंशन देने का प्रावधान है। सेनानी की पत्नी सलाबो देवी का पेंशन बीच में ही अकारण बंद कर दिया गया। गुहार लगाते-लगाते उसकी मौत हो गई। लेकिन उसे पेंशन नहीं दिया गया। सेनानी के बेटे नमोनारायण चौधरी ने अपनी मां के जीवन काल के दौरान मिलने वाले सेनानी आश्रित पेंशन के लिए क्लेम किया तो उसे क्लेम नहीं दिया गया। जिसके बाद उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई। जिसमें हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए 24 जनवरी 2017 को आदेश दिया कि इस मामले की जांच कराकर पेंशन क्लेम का निस्तारण करते हुए आवेदक को उसकी पेंशन की धनराशि का भुगतान करा दिया जाय। इस आदेश के बाद शासन के पेंशन अनुभाग से प्रकरण का निस्तारण कराने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया। जिसके बाद डीएम ने इस प्रकरण में सिकंदरपुर एसडीएम से जांच आख्या मांगी। जांच के दौरान अपने आख्या में एसडीएम ने ब्लाक अफसरों से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र को दरकिनार करते हुए लोगों के बयान के आधार पर आवेदक के क्लेम का खारिज करते हुए रिपोर्ट भेज दी। जिसके बाद सेनानी का परिजन भटक रहे हैं। आवेदक नमोनारायण की मानें तो किसी भी क्लेम में प्रमाण पत्र को साक्ष्य माना जाता है जबकि एसडीएम ने प्रमाण पत्र को दरकिनार कर लोगों के बयान को ही सही मानने का काम किया है। जिसके बाद क्लेम के लिए उच्च न्यायालय मेें अवमानना याचिका दाखिल करने के बाद ही न्याय मिलने की संभावना है।
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