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मौसम की मार से आम के बौर हो रहे प्रभावित
Updated Thu, 15 Feb 2018 10:56 PM IST
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बलिया। आम की फसल पर इस बार मौसम की बेरुखी का असर दिखेगा। मौसम की मार से बौर प्रभावित हुए हैं। हालांकि इसके बावजूद पांच सालों में आम की बागवानी में 400 हेक्टेयर का इजाफा भी हुआ है।
जनपद में कुल 17 हजार हेक्टेयर में बगीचा व बागवानी है। हर साल जिला उद्यान विभाग की ओर से फलवार बगीेचे के साथ ही फूलवार बागवानी का सर्वे किया जाता है। 2012-13 में जनपद में कुल 16 हजार 600 हेक्टेयर में बगीचे व बागवानी थे। सरकार की ओर से अनुदान देने के कारण किसानों का रुझान इस ओर बढ़ रहा है और इसके चलते दिनों-दिन इसका रकबा बढ़ता जा रहा है। विभाग की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017-18 में कुल 17 हजार हेक्टेयर में बगीचे व बागवानी हैं। इसमें कुल तीन हजार 498 हेक्टेयर रकबे में आम के पेड़ लगे हैं। विभागीय अधिकारी के अनुसार, हनुमानगंज, बेरुआरबारी, रेवती, बैरिया व बेलहरी ब्लाकों में आम के बगीचे व बागवानी अधिक हैं। इन इलाकों के 1168 किसान बगीचे व बागवानी से जुड़े हैं।
विभाग के बागवानी विशेषज्ञ जनार्दन राय की मानें तो यह किसान कृषि विविधीकरण योजना के तहत बागवानी के साथ बगीचे में ही खेती भी करते हैं जिससे उन्हें दोहरा लाभ मिलता है। बताया कि आम के पेड़ों पर बौर लगने शुरु हो गए हैं। कहा कि किसानों को बौर में दाना खिलने से पहले एक कीटनाशक व फफूंदी नाशक को मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। इसके बाद जब बौर में दाना खिल जाए तो एक बार फिर इन्हीं दवाओं का छिड़काव करना चाहिए। बताया कि बौर के दाने कड़े होने के बाद इसके नष्ट होने की संभावना नहीं रहती है बशर्ते मौसम की मार नहीं पड़े।
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बताया कि मौसम का असर आम के बौर पर जरुर कुछ पड़ा है लेकिन फिर भी अधिकांश बौर सुरक्षित हैं। बताया कि बगीचे व बागवानी के आसपास ईंट भट्टों का संचालन होने से बगीचे पर असर पड़ता है लेकिन पिछले कुछ सालों से ईंट भट्ठों के संचालन पर कड़ाई होने के कारण जगह खुले यह भट्ठे बंद हो गए हैं जो हैं वहां धुुंआ निकलने के लिए पक्की चिमनी बनी है और बगीचे से दूर हैं।
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जनपद में कुल 17 हजार हेक्टेयर में बगीचा व बागवानी है। हर साल जिला उद्यान विभाग की ओर से फलवार बगीेचे के साथ ही फूलवार बागवानी का सर्वे किया जाता है। 2012-13 में जनपद में कुल 16 हजार 600 हेक्टेयर में बगीचे व बागवानी थे। सरकार की ओर से अनुदान देने के कारण किसानों का रुझान इस ओर बढ़ रहा है और इसके चलते दिनों-दिन इसका रकबा बढ़ता जा रहा है। विभाग की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017-18 में कुल 17 हजार हेक्टेयर में बगीचे व बागवानी हैं। इसमें कुल तीन हजार 498 हेक्टेयर रकबे में आम के पेड़ लगे हैं। विभागीय अधिकारी के अनुसार, हनुमानगंज, बेरुआरबारी, रेवती, बैरिया व बेलहरी ब्लाकों में आम के बगीचे व बागवानी अधिक हैं। इन इलाकों के 1168 किसान बगीचे व बागवानी से जुड़े हैं।
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विभाग के बागवानी विशेषज्ञ जनार्दन राय की मानें तो यह किसान कृषि विविधीकरण योजना के तहत बागवानी के साथ बगीचे में ही खेती भी करते हैं जिससे उन्हें दोहरा लाभ मिलता है। बताया कि आम के पेड़ों पर बौर लगने शुरु हो गए हैं। कहा कि किसानों को बौर में दाना खिलने से पहले एक कीटनाशक व फफूंदी नाशक को मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। इसके बाद जब बौर में दाना खिल जाए तो एक बार फिर इन्हीं दवाओं का छिड़काव करना चाहिए। बताया कि बौर के दाने कड़े होने के बाद इसके नष्ट होने की संभावना नहीं रहती है बशर्ते मौसम की मार नहीं पड़े।
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बताया कि मौसम का असर आम के बौर पर जरुर कुछ पड़ा है लेकिन फिर भी अधिकांश बौर सुरक्षित हैं। बताया कि बगीचे व बागवानी के आसपास ईंट भट्टों का संचालन होने से बगीचे पर असर पड़ता है लेकिन पिछले कुछ सालों से ईंट भट्ठों के संचालन पर कड़ाई होने के कारण जगह खुले यह भट्ठे बंद हो गए हैं जो हैं वहां धुुंआ निकलने के लिए पक्की चिमनी बनी है और बगीचे से दूर हैं।