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‘हरि को भजे सो हरि का होई’...
Updated Mon, 25 Dec 2017 11:57 PM IST
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‘हरि को भजे सो हरि का होई’...
पं. श्रीकांत ने कहा शरण में आने वाले व्यक्ति का प्रभु करते है कल्याण
श्रीमद् भागवत कथा का हुआ समापन, भक्तों ने किया प्रसाद ग्रहण
अमर उजाला ब्यूरो
बलिया। भगवान के शरण में आने वाले प्रत्येक मानक का कल्याण प्रभु करते हैं, उनकी शरण में जो भी मनुष्य आ जाता है उसका भला अवश्य होता है। भक्तों के कल्याण के लिए भगवान अपने ऊपर कलंक तक ले लेते है,ं लेकिन शरणागत को निराश नहीं करते हैं। भगवान को जिसने भी स्वीकार किया, वह भगवान का हो गया। इसलिए कहा गया है कि ‘हरि को भजे सो हरि का होई’। यह बातें श्री राधा माधव सेवा मण्डल एवं मस्ती श्री वृंदावन धाम की व्हाट्स एप ग्रुप के तत्वावधान में टाउन हाल में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के कथा के समापन के अवसर व्यास पंडित श्रीकांत शर्मा ने कही।
कहा कि भगवान शरणागत को स्वीकार करने के साथ ही समाज में उनके सम्मान की प्रतिष्ठा भी करते है।ं भगवान प्रभु श्रीराम और कृष्ण दोनों ने नारी के सम्मान की रक्षा की। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र ने सीता के उद्धार के लिए रावण और असुरों का वध किया था। वहीं श्रीकृष्ण ने सारी नारी सम्मान की रक्षा की। इसके बाद कृष्ण-सुदामा मिलन तथा रुक्मणी-कृष्ण विवाह की शादी की झांकी का मंचन कलाकारों द्वारा किया गया। जिसे सुन व देख नर-नारी मंत्रमुग्ध हो गए।
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पं. श्रीकांत ने कहा शरण में आने वाले व्यक्ति का प्रभु करते है कल्याण
श्रीमद् भागवत कथा का हुआ समापन, भक्तों ने किया प्रसाद ग्रहण
अमर उजाला ब्यूरो
बलिया। भगवान के शरण में आने वाले प्रत्येक मानक का कल्याण प्रभु करते हैं, उनकी शरण में जो भी मनुष्य आ जाता है उसका भला अवश्य होता है। भक्तों के कल्याण के लिए भगवान अपने ऊपर कलंक तक ले लेते है,ं लेकिन शरणागत को निराश नहीं करते हैं। भगवान को जिसने भी स्वीकार किया, वह भगवान का हो गया। इसलिए कहा गया है कि ‘हरि को भजे सो हरि का होई’। यह बातें श्री राधा माधव सेवा मण्डल एवं मस्ती श्री वृंदावन धाम की व्हाट्स एप ग्रुप के तत्वावधान में टाउन हाल में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के कथा के समापन के अवसर व्यास पंडित श्रीकांत शर्मा ने कही।
कहा कि भगवान शरणागत को स्वीकार करने के साथ ही समाज में उनके सम्मान की प्रतिष्ठा भी करते है।ं भगवान प्रभु श्रीराम और कृष्ण दोनों ने नारी के सम्मान की रक्षा की। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र ने सीता के उद्धार के लिए रावण और असुरों का वध किया था। वहीं श्रीकृष्ण ने सारी नारी सम्मान की रक्षा की। इसके बाद कृष्ण-सुदामा मिलन तथा रुक्मणी-कृष्ण विवाह की शादी की झांकी का मंचन कलाकारों द्वारा किया गया। जिसे सुन व देख नर-नारी मंत्रमुग्ध हो गए।
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