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अनेकता में एकता भारतीयता की है पहचान : पराशर
Updated Tue, 27 Feb 2018 10:56 PM IST
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गोपाल जी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के शिक्षा विभाग में राष्ट्रीय शिक्षा, चुनौतियां एवं अवसर विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। शुभारंभ नागपुर विश्वविद्यालय के कुलपति तथा मुख्य अतिथि प्रो. गौरी शंकर पराशर ने दीप प्रज्वलन के साथ किया। कहा कि अनकेता में एकता भारतीयता की पहचान है।
उन्होंने कहा कि यह ज्ञान की सदी है हमें अपने अंदर के अहम को त्याग करने से सर्वस्व की प्राप्ति संभव है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को संस्कार से जोड़ना अति आवश्यक है। चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया के कुलपति प्रो. योगेंद्र सिंह ने कहा कि बलिया की मिट्टी चंदन स्वरूप है जब-जब देश तथा संस्कृति या साहित्य को आवश्यकता पड़ी बलिया ने इसमें अहम योगदान दिया। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ शिक्षा संकाय के डीन ङा. ए के पांडे ने निजी स्वार्थ से परहेज कर राष्ट्र हिट पर सोचने पर बल दिया एस एस पी जी कॉलेज शाहजहांपुर की एसोसिएट प्रोफेसर रत्ना गुप्ता ने कहा जहां राष्ट्रभक्ति वहां राष्ट्र हित है और जहां राष्ट्रहित होगा वहां कल्याण होगा और जहां कल्याण होगा। इससे पूर्व प्रबंधक अशोक कुमार श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत कर उन्हें अंगवस्त्रम बुके तथा स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस मौके पर प्राचार्य डा. साधना श्रीवास्तव, उमाशंकर मिश्र, रविंद्र सिंह, राकेश वर्मा, संतोष सिंह, अजीत श्रीवास्तव आदि रहे अध्यक्षता प्रोफेसर गौरी शंकर पराशर एवं संचालन मधुलिका यादव ने किया शिक्षा संस्कार प्रमुख संतोष यादव ने आभार जताया।
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उन्होंने कहा कि यह ज्ञान की सदी है हमें अपने अंदर के अहम को त्याग करने से सर्वस्व की प्राप्ति संभव है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को संस्कार से जोड़ना अति आवश्यक है। चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया के कुलपति प्रो. योगेंद्र सिंह ने कहा कि बलिया की मिट्टी चंदन स्वरूप है जब-जब देश तथा संस्कृति या साहित्य को आवश्यकता पड़ी बलिया ने इसमें अहम योगदान दिया। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ शिक्षा संकाय के डीन ङा. ए के पांडे ने निजी स्वार्थ से परहेज कर राष्ट्र हिट पर सोचने पर बल दिया एस एस पी जी कॉलेज शाहजहांपुर की एसोसिएट प्रोफेसर रत्ना गुप्ता ने कहा जहां राष्ट्रभक्ति वहां राष्ट्र हित है और जहां राष्ट्रहित होगा वहां कल्याण होगा और जहां कल्याण होगा। इससे पूर्व प्रबंधक अशोक कुमार श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत कर उन्हें अंगवस्त्रम बुके तथा स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस मौके पर प्राचार्य डा. साधना श्रीवास्तव, उमाशंकर मिश्र, रविंद्र सिंह, राकेश वर्मा, संतोष सिंह, अजीत श्रीवास्तव आदि रहे अध्यक्षता प्रोफेसर गौरी शंकर पराशर एवं संचालन मधुलिका यादव ने किया शिक्षा संस्कार प्रमुख संतोष यादव ने आभार जताया।
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