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नहीं चलेंगे जिले के 360 ईंट भट्ठे
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जिले के करीब 360 ईंट भट्ठों पर इस बार कारोबार बंद रहने का असर दिखने लगा है। जीएसटी में वृद्धि व कोयले के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी के कारण ईंट व्यवसाइयों ने इस बार भट्ठे नहीं संचालित करने की घोषणा कर दी है। अगस्त के महीने में शुरू होने वाली मजदूरों की बुकिंग इस बार नहीं को गई और न ही कोयले के ऑर्डर दिए गए। ऐसी हालत में करीब एक लाख मजदूर बेरोजगार हो गए हैं।
जिले में करीब 360 ईंट-भट्ठे संचालित हैं। इस बार ईंट निर्माता समिति ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल की घोषणा कर दी है। भट्ठा संचालकों का कहना है कि जो जीएसटी एक फीसदी थी वह बढ़ाकर छह फीसदी कर दी गई। जबकि जहां पांच फीसदी थी वह 12 प्रतिशत की दी गई। कोयले का दाम जहां पिछले सालों में नौ से 10 हजार रुपये प्रति टन था वह आज 25 हजार रुपये टन हो गया है। अक्टूबर व नवम्बर में भट्ठों के संचालन से पहले अगस्त में भट्ठा संचालकों द्वारा मजदूरों को बुकिंग शुरू कर दी जाती थी। कोयले का ऑर्डर दे दिया जाता था। मगर इस बार किसी भी ईंट व्यवसायी ने न तो कोयले का आर्डर दिया है और न ही मजदूरों की बुकिंग की है।
एक ईंट भट्ठे पर औसतन 250 मजदूर काम करते हैं और इस प्रकार 360 भट्ठों पर करीब एक लाख मजदूरों को रोजगार मिलता रहा है। लेकिन इस बार इनको काम के लिए नहीं बुलाया गया। जिले में बिहार, छत्तीसगढ़ के मजदूर भी बुलाये जाते थे मगर इस बार भट्ठों पर सन्नाटा है। ईंट व्यवसाय से करीब 20 हजार और लोगों के व्यवसाय पर भी फर्क पड़ेगा। बताते हैं कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि अगस्त में भट्ठा शुरू करने की कोई तैयारी नहीं की गई। ईंट भट्ठा संचालक मनोज सिंह कहते है कि वर्तमान में जिले के ईंट भट्ठों पर ईंट की कीमत साढ़े आठ से नौ हजार रुपये प्रति हजार ईंट है। यानी एक ईंट कीमत करीब नौ रुपये की पड़ रही है।
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अगले महीने से बंद होगी ईंट की बिक्री ईंट भट्टा संघ के बांसडीह तहसील अध्यक्ष मनोज सिंह ने बताया कि हमारी मांगों को सरकार नहीं मान रही है। इसलिए हम लोगों ने फैसला लिया है कि सितंबर से की बिक्री बंद कर देंगे। उनका कहना है कि जीएसटी व कोयले के दामों से अब व्यवसाय करना घाटे का सौदा हो गया है।
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जिले में करीब 360 ईंट-भट्ठे संचालित हैं। इस बार ईंट निर्माता समिति ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल की घोषणा कर दी है। भट्ठा संचालकों का कहना है कि जो जीएसटी एक फीसदी थी वह बढ़ाकर छह फीसदी कर दी गई। जबकि जहां पांच फीसदी थी वह 12 प्रतिशत की दी गई। कोयले का दाम जहां पिछले सालों में नौ से 10 हजार रुपये प्रति टन था वह आज 25 हजार रुपये टन हो गया है। अक्टूबर व नवम्बर में भट्ठों के संचालन से पहले अगस्त में भट्ठा संचालकों द्वारा मजदूरों को बुकिंग शुरू कर दी जाती थी। कोयले का ऑर्डर दे दिया जाता था। मगर इस बार किसी भी ईंट व्यवसायी ने न तो कोयले का आर्डर दिया है और न ही मजदूरों की बुकिंग की है।
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एक ईंट भट्ठे पर औसतन 250 मजदूर काम करते हैं और इस प्रकार 360 भट्ठों पर करीब एक लाख मजदूरों को रोजगार मिलता रहा है। लेकिन इस बार इनको काम के लिए नहीं बुलाया गया। जिले में बिहार, छत्तीसगढ़ के मजदूर भी बुलाये जाते थे मगर इस बार भट्ठों पर सन्नाटा है। ईंट व्यवसाय से करीब 20 हजार और लोगों के व्यवसाय पर भी फर्क पड़ेगा। बताते हैं कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि अगस्त में भट्ठा शुरू करने की कोई तैयारी नहीं की गई। ईंट भट्ठा संचालक मनोज सिंह कहते है कि वर्तमान में जिले के ईंट भट्ठों पर ईंट की कीमत साढ़े आठ से नौ हजार रुपये प्रति हजार ईंट है। यानी एक ईंट कीमत करीब नौ रुपये की पड़ रही है।
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अगले महीने से बंद होगी ईंट की बिक्री ईंट भट्टा संघ के बांसडीह तहसील अध्यक्ष मनोज सिंह ने बताया कि हमारी मांगों को सरकार नहीं मान रही है। इसलिए हम लोगों ने फैसला लिया है कि सितंबर से की बिक्री बंद कर देंगे। उनका कहना है कि जीएसटी व कोयले के दामों से अब व्यवसाय करना घाटे का सौदा हो गया है।