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शारदीय नवरात्र कल से आरम्भ
Updated Tue, 09 Oct 2018 12:29 AM IST
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बलिया। शारदीय नवरात्र की शुरूआत 10 अक्तूबर को हो रहा है। नवरात्र में दुर्गा सप्तशती के पाठ का विशेष महत्व है, क्योंकि सप्तशती में देवी के प्राकट्य देवताओं द्वारा देवी की स्तुति व पराक्रम का वर्णन है। यह बातें इंदरपुर निवासी आचार्य डॉ. अखिलेेश कुुमार उपाध्याय ने कही। बताया कि मां दुर्गा ने स्वयं कहा है कि नवरात्र में जो मेरे गुणों का गान करेगा और देवताओं द्वारा की गई स्तुति का पाठ करेगा, उसके घर में कभी भी धन्य-धान्य की कमी नहीं होगी। उसके कुल की मैं स्वयं सुरक्षा करूंगी।
ऐसी मान्यता है कि सप्तशती का पाठ करने या सुनने मात्र से बुरे सपने नहीं आते हैं और कोई बाधाएं परेशान नहीं करती। नौ ग्रहों के बुरे प्रभाव से भी सप्तशती के पाठ मात्र से मुक्ति मिलती है। मां दुर्गा की पूजा में लाल रंगों के फूल का प्रयोग करना शुभ रहता है। लाल फूल विशेषकर गुड़हल का होना चाहिए। नवरात्र में हर दिन मां को अर्पित करना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि लाल पुष्प जहां रहते है, वहां का वातावरण हमेशा उत्साह से भरा रहता है। घर के सारे लोगों में नई ऊर्जा का संचार होता है और शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कहा कि दुर्गा सप्तशती के अलावा कुंजिका स्त्रोत, देव्य अथर्वशीर्ष व नवार्ण मंत्र का जप करने से भी ग्रह दोषों का शमन होता है।
इनसेट...
कलश स्थापना का मुहूर्त 11.36 से 12.24 बजे तक
बलिया। इस वर्ष शारदीय नवरात्र 10 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहा है। चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग में नवरात्र आरंभ होने के कारण कलश स्थापना अभिजीत मुहूर्त मध्याह्न 11.36 से 12.24 बजे के बीच किया जाएगा। वहीं प्रात: 6.12 से सायं 5.48 तक कलश स्थापना किया जा सकता है। पूजा पंडालों में स्थापित की जाने वाली दुर्गा प्रतिमाओं के त्रिदिवसीय शक्ति पूजा के क्रम में सप्तमी तिथि में देवी स्थापना की जाती है एवं सप्तमी तिथि से ही उनके आगमन के वाहन का विचार किया जाता है। महाअष्टमी का व्रत 17 अक्तूबर को किया जाएगा। जबकि महानवमी 18 अक्तूबर को होगी। नवरात्र से संबंधित अनुष्ठान की समाप्ति का हवन 18 अक्टूबर को दिन 2.31 बजे तक किया जा सकेगा क्योंकि दिन में ही नवमी समाप्त हो जा रही है। इसलिए नवरात्र व्रत का पारण भी दशमी तिथि के दिन में 2.31 बजे के बाद ही कर लिया जाएगा।
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ऐसी मान्यता है कि सप्तशती का पाठ करने या सुनने मात्र से बुरे सपने नहीं आते हैं और कोई बाधाएं परेशान नहीं करती। नौ ग्रहों के बुरे प्रभाव से भी सप्तशती के पाठ मात्र से मुक्ति मिलती है। मां दुर्गा की पूजा में लाल रंगों के फूल का प्रयोग करना शुभ रहता है। लाल फूल विशेषकर गुड़हल का होना चाहिए। नवरात्र में हर दिन मां को अर्पित करना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि लाल पुष्प जहां रहते है, वहां का वातावरण हमेशा उत्साह से भरा रहता है। घर के सारे लोगों में नई ऊर्जा का संचार होता है और शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कहा कि दुर्गा सप्तशती के अलावा कुंजिका स्त्रोत, देव्य अथर्वशीर्ष व नवार्ण मंत्र का जप करने से भी ग्रह दोषों का शमन होता है।
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कलश स्थापना का मुहूर्त 11.36 से 12.24 बजे तक
बलिया। इस वर्ष शारदीय नवरात्र 10 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहा है। चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग में नवरात्र आरंभ होने के कारण कलश स्थापना अभिजीत मुहूर्त मध्याह्न 11.36 से 12.24 बजे के बीच किया जाएगा। वहीं प्रात: 6.12 से सायं 5.48 तक कलश स्थापना किया जा सकता है। पूजा पंडालों में स्थापित की जाने वाली दुर्गा प्रतिमाओं के त्रिदिवसीय शक्ति पूजा के क्रम में सप्तमी तिथि में देवी स्थापना की जाती है एवं सप्तमी तिथि से ही उनके आगमन के वाहन का विचार किया जाता है। महाअष्टमी का व्रत 17 अक्तूबर को किया जाएगा। जबकि महानवमी 18 अक्तूबर को होगी। नवरात्र से संबंधित अनुष्ठान की समाप्ति का हवन 18 अक्टूबर को दिन 2.31 बजे तक किया जा सकेगा क्योंकि दिन में ही नवमी समाप्त हो जा रही है। इसलिए नवरात्र व्रत का पारण भी दशमी तिथि के दिन में 2.31 बजे के बाद ही कर लिया जाएगा।
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