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पथ संचलन में शामिल हुए हजारों स्वयं सेवक
Updated Sat, 17 Mar 2018 10:44 PM IST
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बलिया। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेतृत्व में शनिवार को चैत्र शुक्ल प्रतिप्रदा की पूर्व संध्या पर पथ संचलन का आयोजन किया गया। पथ संचलन शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए रामलीला मैदान पहुंचा और यहां प्रणाम कार्यक्रम व जनसभा किया गया।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री ओमपाल ने कहा कि भारतवर्ष वह पावन भूमि है जिसने संपूर्ण ब्रह्मांड को अपने ज्ञान से आलोकित किया है। यहां संस्कृति का प्रत्येक पहलू प्रकृति व विज्ञान का ऐसा विलक्षण उदाहरण है जो कहीं और नहीं मिलता। नए वर्ष का आरंभ भारतीय परंपरा के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिप्रदा भी एक ऐसा विलक्षण उदाहरण है। इस समय में नए अन्न किसानों के घर में आते हैं, वृक्ष में नए पल्लव यहां तक कि पशु पक्षी भी अपना स्वरुप नए प्रकार से परिवर्तित करते हैं। पथ संचलन शहर के रामलीला मैदान से निकला और शीशमहल, चित्तू पांडेय चौराहा, विशुनीपुर, गुरुद्वारा रोड, चौक, लोहापट्टी, गुदरी बाजार, स्टेशन रोड, सिनेमा रोड होते हुए वापस रामलीला मैदान पहुंचा। इस मौके पर भंते ज्ञानजगत रथवीर, हरनाम, संजय शुक्ल, गिरीश नारायण चतुर्वेदी, सुरजीत, रविंद्र वर्मा, विनय सिंह, भृगु, डा. विनोद सिंह, सुरेश राय, महेंद्र, निर्भय, संजय कश्यप, तारकेश्वर, डा. बद्री नारायण आदि मौजूद रहे।
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राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री ओमपाल ने कहा कि भारतवर्ष वह पावन भूमि है जिसने संपूर्ण ब्रह्मांड को अपने ज्ञान से आलोकित किया है। यहां संस्कृति का प्रत्येक पहलू प्रकृति व विज्ञान का ऐसा विलक्षण उदाहरण है जो कहीं और नहीं मिलता। नए वर्ष का आरंभ भारतीय परंपरा के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिप्रदा भी एक ऐसा विलक्षण उदाहरण है। इस समय में नए अन्न किसानों के घर में आते हैं, वृक्ष में नए पल्लव यहां तक कि पशु पक्षी भी अपना स्वरुप नए प्रकार से परिवर्तित करते हैं। पथ संचलन शहर के रामलीला मैदान से निकला और शीशमहल, चित्तू पांडेय चौराहा, विशुनीपुर, गुरुद्वारा रोड, चौक, लोहापट्टी, गुदरी बाजार, स्टेशन रोड, सिनेमा रोड होते हुए वापस रामलीला मैदान पहुंचा। इस मौके पर भंते ज्ञानजगत रथवीर, हरनाम, संजय शुक्ल, गिरीश नारायण चतुर्वेदी, सुरजीत, रविंद्र वर्मा, विनय सिंह, भृगु, डा. विनोद सिंह, सुरेश राय, महेंद्र, निर्भय, संजय कश्यप, तारकेश्वर, डा. बद्री नारायण आदि मौजूद रहे।
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