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जर्जर सड़क को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
Updated Sun, 24 Sep 2017 09:47 PM IST
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बलिया। करीब दो दशक से कपूरी से गंगहरा जाने वाली सड़क की खस्ताहाली को लेकर ग्रामीणों में खासी नाराजगी है। रविवार को गंगहरा गांव में महापंचायत कर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और कैबिनेट में बैठकर नेतृत्व कर रहे मंत्री को भी जमकर आड़े हाथों लिया। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार को 15 जून तक सभी सड़कों को गड्ढामुक्त के दावे को याद दिलाते हुए एक पखवाड़े का अल्टीमेटम दिया है। कहा इसके बाद ग्रामीण आंदोलन करेंगे।
बैठक में गांव के बुजुर्ग अनंत सिंह ने कहा कि विस चुनाव पूर्व गांव में नेताओं का जमावड़ा लगा, सभी ने सड़क बनवाने का भरोसा जताया। इसमें से एक जनप्रतिनिधि सत्ता में न होने का रोना रोते थे। उन्होंने आश्वासन दिया था कि प्रदेश में हमारी सरकार बनते ही सड़क का कायाकल्प हो जाएगा। प्रदेश में सरकार भी बनी, वही जनप्रतिनिधि आज मंत्री भी बन गए, लेकिन शायद वह अपना वादा भूल गए। किसान नेता मनोज कुमार सिंह ने कहा कि सपने तो हर लोग दिखाए, लेकिन सपना किसी ने इस क्षेत्र का पूरा नहीं किया। खस्ताहाल सड़क उन जनप्रतिनिधियों को मुहं चिढ़ाती दिख रही है। बैठक में युवा नेता अखिलेश सिंह, विकास सिंह, रंजन सिंह, चुन्नू सिंह, रणविजय सिंह, अभिषेक कुमार सिंह, आलोक कुमार सिंह, गोपाल सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार के वादे के मुताबिक सड़क 15 जून तक गड्ढामुक्त हो जाना चाहिए था, लेकिन अभी तक नहीं हुआ। अब ग्रामीण चुप नहीं बैठेंगे, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
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बैठक में गांव के बुजुर्ग अनंत सिंह ने कहा कि विस चुनाव पूर्व गांव में नेताओं का जमावड़ा लगा, सभी ने सड़क बनवाने का भरोसा जताया। इसमें से एक जनप्रतिनिधि सत्ता में न होने का रोना रोते थे। उन्होंने आश्वासन दिया था कि प्रदेश में हमारी सरकार बनते ही सड़क का कायाकल्प हो जाएगा। प्रदेश में सरकार भी बनी, वही जनप्रतिनिधि आज मंत्री भी बन गए, लेकिन शायद वह अपना वादा भूल गए। किसान नेता मनोज कुमार सिंह ने कहा कि सपने तो हर लोग दिखाए, लेकिन सपना किसी ने इस क्षेत्र का पूरा नहीं किया। खस्ताहाल सड़क उन जनप्रतिनिधियों को मुहं चिढ़ाती दिख रही है। बैठक में युवा नेता अखिलेश सिंह, विकास सिंह, रंजन सिंह, चुन्नू सिंह, रणविजय सिंह, अभिषेक कुमार सिंह, आलोक कुमार सिंह, गोपाल सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार के वादे के मुताबिक सड़क 15 जून तक गड्ढामुक्त हो जाना चाहिए था, लेकिन अभी तक नहीं हुआ। अब ग्रामीण चुप नहीं बैठेंगे, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
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