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केरोसिन की कालाबाजारी पर नहीं लग पा रहा रोक
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बलिया। सरकारी केरोसिन की कालाबाजारी पर रोक नहीं लग पा रही है। दशकों बाद भी इस पर रोक लगाने को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हो रही है। कोटे की दुकानों से वितरित होने वाला नीले रंग का मिट्टी तेल हर चट्टी-चौराहे पर खुलेआम बेचा जाता है।
नीले रंग के केरोसिन की केवल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए आपूर्ति होती है। जनपद को हर माह करीब 18 लाख लीटर केरोसिन कार्डधारकों को वितरण करने के लिए आवंटित होता है लेकिन इसके वितरण में हर माह गोलमाल किया जाता है। करीब डेढ़ दशक पहले सरकार की ओर से केरोसिन की कालाबाजारी रोकने की कवायद की गई और दो अलग-अलग रंग के केरोसिन की आपूर्ति सुनिश्चित की गई। सरकारी कोटे की दुकानों के लिए जहां नीले रंग के केरोसिन वहीं बाजारों में बेचने के लिए सफेद रंग के केरोसिन की व्यवस्था की गई। जिले में वर्तमान में कुल 639847 राशन कार्ड धारक हैं।
इसमें अंत्योदय के कुल 101684 व पात्र गृहस्थी के 538163 कार्डधारक हैं। बताया जाता है कि अंत्योदय कार्डधारकों को प्रति कार्ड दो लीटर व पात्र गृहस्थी के कार्डधारकों को प्रति कार्ड तीन लीटर केरोसिन वितरण का प्रावधान किया गया है। कार्डधारकों के सापेेक्ष जनपद को 18 लाख लीटर से अधिक केरोसिन का आवंटन हर माह शासन की ओर से उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन आलम यह है कि जनपद के नगरीय से लेकर ग्रामीण इलाकों तक के बाजारों में खुलेआम नीले रंग का ही केरोसिन बेचा जाता है जो कि प्रतिबंधित है। इसे रोकने के लिए आपूर्ति विभाग की ओर से कभी भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।
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तीन माह पहले बैरिया पकड़ा गया था मामला : बलिया। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत आवंटित केरोसिन के वितरण में कमोवेश सभी कोटेदार मनमानी करते हैं। इसके अलावा बदलते समय के कारण अधिकांश घरों में लालटेन व ढ़िबरी आदि का प्रयोग नहीं होने के कारण खासकर पात्र गृहस्थी कार्डधारक केरोसिन लेते भी नहीं हैं। इसके चलते हर माह केरोसिन की कालाबाजारी का धंधा जोरों पर है। तीन माह पहले कालाबाजारी को जा रहा केरोसिन बैरिया क्षेत्र में पकड़ा गया और इस मामले में आपूर्ति विभाग की ओर से मुकदमा भी दर्ज कराया गया।
जिलापूर्ति अधिकारी सार्वजनिक वितरण के लिए नीले रंग की केरोसिन की आपूर्ति होती है जो केवल कोटे की दुकानों पर ही वितरण के लिए होता है। सभी आपूर्ति निरीक्षकों को बाजारों में नीले रंग की केरोसिन बेचने वालों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। कार्डधारक केरोसिन लेते समय कोटेदार से अपने कार्ड पर मात्रा आदि का अंकन जरुर कराएं।
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नीले रंग के केरोसिन की केवल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए आपूर्ति होती है। जनपद को हर माह करीब 18 लाख लीटर केरोसिन कार्डधारकों को वितरण करने के लिए आवंटित होता है लेकिन इसके वितरण में हर माह गोलमाल किया जाता है। करीब डेढ़ दशक पहले सरकार की ओर से केरोसिन की कालाबाजारी रोकने की कवायद की गई और दो अलग-अलग रंग के केरोसिन की आपूर्ति सुनिश्चित की गई। सरकारी कोटे की दुकानों के लिए जहां नीले रंग के केरोसिन वहीं बाजारों में बेचने के लिए सफेद रंग के केरोसिन की व्यवस्था की गई। जिले में वर्तमान में कुल 639847 राशन कार्ड धारक हैं।
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इसमें अंत्योदय के कुल 101684 व पात्र गृहस्थी के 538163 कार्डधारक हैं। बताया जाता है कि अंत्योदय कार्डधारकों को प्रति कार्ड दो लीटर व पात्र गृहस्थी के कार्डधारकों को प्रति कार्ड तीन लीटर केरोसिन वितरण का प्रावधान किया गया है। कार्डधारकों के सापेेक्ष जनपद को 18 लाख लीटर से अधिक केरोसिन का आवंटन हर माह शासन की ओर से उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन आलम यह है कि जनपद के नगरीय से लेकर ग्रामीण इलाकों तक के बाजारों में खुलेआम नीले रंग का ही केरोसिन बेचा जाता है जो कि प्रतिबंधित है। इसे रोकने के लिए आपूर्ति विभाग की ओर से कभी भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।
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तीन माह पहले बैरिया पकड़ा गया था मामला : बलिया। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत आवंटित केरोसिन के वितरण में कमोवेश सभी कोटेदार मनमानी करते हैं। इसके अलावा बदलते समय के कारण अधिकांश घरों में लालटेन व ढ़िबरी आदि का प्रयोग नहीं होने के कारण खासकर पात्र गृहस्थी कार्डधारक केरोसिन लेते भी नहीं हैं। इसके चलते हर माह केरोसिन की कालाबाजारी का धंधा जोरों पर है। तीन माह पहले कालाबाजारी को जा रहा केरोसिन बैरिया क्षेत्र में पकड़ा गया और इस मामले में आपूर्ति विभाग की ओर से मुकदमा भी दर्ज कराया गया।
जिलापूर्ति अधिकारी सार्वजनिक वितरण के लिए नीले रंग की केरोसिन की आपूर्ति होती है जो केवल कोटे की दुकानों पर ही वितरण के लिए होता है। सभी आपूर्ति निरीक्षकों को बाजारों में नीले रंग की केरोसिन बेचने वालों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। कार्डधारक केरोसिन लेते समय कोटेदार से अपने कार्ड पर मात्रा आदि का अंकन जरुर कराएं।