18 परियोजनाएं नहीं हुईं पूरी, 35 करोड़ हुए वापस

Varanasi Bureauवाराणसी ब्यूरो Updated Fri, 30 Oct 2020 11:14 PM IST
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बलिया। जिले में तमाम परियोजनाएं चल रही हैं जिसमें कई ऐसी परियोजनाएं हैं जो पूरी नहीं हो सकी। इसी क्रम में शामिल नीर निर्मल परियोजना है जो समय से पूरी नहीं होने पर 18 परियोजनाओं के 35 करोड़ की धनराशि विश्व बैंक को सरेंडर करना पड़ा। हालांकि अब सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने इसे पूरा कराने को लेकर कवायद शुरू की है।
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जनपद के आर्सेनिक प्रभावित इलाकों के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2017-18 में नीर निर्मल योजना के तहत कुल 37 परियोजनाएं स्वीकृत हुई। इसमें 19 परियोजनाओं को तो जल निगम ने पूरा करा दिया लेकिन 18 परियोजनाओं का निर्माण शुरू तो हुआ लेकिन तय सीमा में पूर्ण नहीं हो सका। नीर निर्मल परियोजना के तहत स्वीकृत सभी 37 परियोजनाओं को पूरा करने के लिए विश्व बैंक से धन उपलब्ध हुआ। टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2017-18 में कार्य भी प्रारंभ हो गया जिसे 31 मार्च 2020 तक पूरा करना था।
अक्तूबर में विश्व बैंक ने पैसे सरेंडर करने को कहा
अधिकारियों की उदासीनता के कारण 18 परियोजनाओं में समय से कार्य शुरू नहीं हो सका। यह देखते हुए 9 अक्टूबर 2019 को विश्व बैंक का फरमान जल निगम के आला अधिकारियों को मिला कि अब कार्य समय से पूर्ण होने की संभावना नहीं है, लिहाजा धन सरेंडर किया जाए। इसके बाद विभाग ने धन को सरेंडर कर दिया और 18 परियोजनाएं अधर में लटक गईं और इन इलाकों के लोग आज भी दूषित पानी पीने को विवश हैं। इसमें इसमें ग्राम सभा बघउच, मझौवा, भोजापुर, विशुनपुरा, गोन्हिया छपरा, रामपुर कोड़हरा, सोनकी भाट आदि परियोजनाएं हैं।
डीएम की कवायद भी नहीं चढ़ सकी परवान
बलिया। नीर निर्मल योजना के तहत 18 परियोजनाओं के धन सरेंडर की जानकारी होने के बाद समाजसेवियों की गुहार पर जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही ने 3 दिसंबर 2019 को प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश जल निगम विकास गोठवाल को समय बढ़ाने के लिए पत्र भेजा लेकिन मामला विश्व बैंक से जुड़ा होने के कारण समय नहीं बढ़ा और 31 मार्च 2020 को सभी 18 अधूरे परियोजनाओं का 35 करोड़ रुपये सरेंडर हो गया।
कांग्रेस नेता के साथ ही सांसद ने शुरू की है कवायद
बलिया। नीर निर्मल योजना की जगह सरकार ने जल जीवन मिशन योजना शुरू की है। कांग्रेस नेता विनोद सिंह ने डेढ़ माह पहले मुख्य विकास अधिकारी विपिन कुमार जैन से मिलकर अनुरोध किया कि नीर निर्मल योजना की अधूरी परियोजनाओं को जल जीवन मिशन में परिवर्तित कर अधूरी परियोजनाएं पूर्ण किया जाए। सीडीओ ने जल निगम से रिपोर्ट मांगी तो विभाग ने इसमें असमर्थता व्यक्त कर दी।
जब मुझे नीर निर्मल परियोजना की वस्तुस्थिति की जानकारी हुई तो अधिकारियों से बात की। उनकी समस्याएं जानने के बाद ग्राम्य विकास मंत्री मोती सिंह को पत्र लिखने के साथ ही उनसे फोन पर बात की और अधूरी परियोजनाओं को पूरा कराने का आग्रह किया। उन्होंने सभी अधूरी परियोजनाओं को लेकर साकारात्मक रुख भी दिखाया है, उम्मीद है कि जल्द परियोजनाओं का काम शुरू होगा।
- वीरेंद्र सिंह मस्त, सांसद, बलिया सदर

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