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भागवत की महता बताई
Updated Sat, 23 Dec 2017 12:01 AM IST
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भगवान जब हृदय में प्रकट होते हैं तब मानव का कल्याण होता है। प्रभु हृदय सिंहासन पर आएं, इसलिए श्रीमद्भागवत कथा सुनी जाती है। काम, क्रोध, लोभ, मानव को कमजोर करते हैं। जब तक ये रहते हैं, प्रभु का सामीप्य नहीं मिलता जहां काम तहां राम नहीं, जहां राम नहीं, वहां काम नहीं। काम क्रोध लोभ आदि विकारों को दूर करती है। यह उद्गार पंडित श्रीकांत शर्मा ने शुक्रवार को टाउन हाल में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि काम क्रोध ,लोभ मानव का शत्रु है लेकिन वह हटता है तो राम का प्रवेश होता है। भगवान सभी को सूर्य की तरह समभाव से प्रकाश देते हैं। वह सबको उसके अनुकूल फल देते हैं।
श्री राधा माधव सेवा मण्डल एवं मस्ती श्री वृंदावन धाम की तरफ से टाउन हाल में 19 दिसम्बर से 25 दिसम्बर तक आयोजित सात दिवसीय श्रीमदभागवत कथा के चौथे दिन कथा में भगवान जीव को आनन्द देने के लिए लीला करते हैं। पंडित श्रीकांत शर्मा कहते हैं कि भगवान मित्र का तो कल्याण करते ही हैं, वे शत्रु का भी कल्याण करते हैं। शिशुपाल को जैसे 100 झूठ बोलने के बाद मारा। उसके शरीर से ज्योति निकलकर प्रभु के चरणों में लुप्त हो गयी । भगवान ने उसे भी अपना लिया । व्यास जी ने कहा कि जिसका रक्षक श्री राम हो, उसे कोई मार नहीं सकता । रामजन्म उत्सव के अवसर पर कथा का व्याख्यान करते हुए व्यास जी ने कहा राम के लिए ब्रह्म विद्यमान है, पर राम हमारे देश के वर्तमान है। संगीतमयी कथा में नन्द के आनंद भयो के जयकार से पंडाल में मौजूद सभी श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गये। रामजन्म की भव्य झांकी देख श्रद्धालु भक्ति में डूब गए ।
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श्री राधा माधव सेवा मण्डल एवं मस्ती श्री वृंदावन धाम की तरफ से टाउन हाल में 19 दिसम्बर से 25 दिसम्बर तक आयोजित सात दिवसीय श्रीमदभागवत कथा के चौथे दिन कथा में भगवान जीव को आनन्द देने के लिए लीला करते हैं। पंडित श्रीकांत शर्मा कहते हैं कि भगवान मित्र का तो कल्याण करते ही हैं, वे शत्रु का भी कल्याण करते हैं। शिशुपाल को जैसे 100 झूठ बोलने के बाद मारा। उसके शरीर से ज्योति निकलकर प्रभु के चरणों में लुप्त हो गयी । भगवान ने उसे भी अपना लिया । व्यास जी ने कहा कि जिसका रक्षक श्री राम हो, उसे कोई मार नहीं सकता । रामजन्म उत्सव के अवसर पर कथा का व्याख्यान करते हुए व्यास जी ने कहा राम के लिए ब्रह्म विद्यमान है, पर राम हमारे देश के वर्तमान है। संगीतमयी कथा में नन्द के आनंद भयो के जयकार से पंडाल में मौजूद सभी श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गये। रामजन्म की भव्य झांकी देख श्रद्धालु भक्ति में डूब गए ।
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