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जर्जर भवनों में पढ़ने को विवश हैं बच्चे
Updated Sat, 02 Sep 2017 12:44 AM IST
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बेल्थरारोड । सरकार प्राथमिक शिक्षा की सेहत सुधारने की दिशा में अनेक कदम उठा रही है । वहीं प्राथमिक विद्यालयों के जर्जर भवन में पढ़ने वाले नौनिहालों के जीवन के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इसकी वानगी प्राथमिक विद्यालय चैनपुर गुलौरा है, जहां बच्चों को स्कूल भेजने के बाद उनके वापस घर लौटने को लेकर अभिभावक सशंकित रहते हैं। मऊ और देवरिया जिले की सीमा और घाघरा नदी तट स्थित चैनपुर गुलौरा में बच्चों की शिक्षा के लिए दो प्राथमिक विद्यालय हैं। लेकिन दोनों विद्यालयों का भवन अत्यंत जर्जर है। दीवार और छत के प्लास्टर उखड़ गए हैं। बरसात में छत से पानी टपकता है। इसके साथ ही कभी भी भवन ढह जाने का खतरा बना रहता हैै । करीब तीन दशक पूर्व निर्माण के बाद कभी भी भवन की मरम्मत नहीं की गई। बच्चों को पढ़ाते समय अध्यापकों की सांसें अटकी रहती हैं। किसी अनहोनी को लेकर हमेशा चिंतित रहते हैं । हालांकि अभिभावक भी अपने लाडले को स्कूल भेजना नहीं चाहते हैं , लेकिन उनके भविष्य को ध्यान में रखकर विशेष मजबूरी के चलते बच्चों को स्कूल भेजने को विवश हैं। विद्यालय भवन के जीर्णोद्वार के लिए कई बार क्षेत्रीय जनता ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों का ध्यानाकृष्ट कराया, लेकिन अधिकारी संवेदनहीन बने हुए हैं। अधिकारियों की लापरवाही को देख ऐसा प्रतीत होता है कि शायद उन्हें किसी अनहोनी घटना की प्रतीक्षा हो। जर्जर भवन का शीघ्र निर्माण नहीं किया गया तो भवन कभी भी हादसे का सबब बन सकता है ।
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