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चार साल बाद भी बन नहीं जनेश्वर मिश्र सेतु....
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बलिया। शिवरामपुर गंगा घाट पर सेतु का शिलान्यास खेलकूद, खादी ग्रामोद्योग व विज्ञान तकनीकी मंत्री नारद राय ने किया था। उस वक्त पुल का नाम समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र के नाम पर रखा गया था लेकिन सत्ता बदलते ही पुल का नाम बदलकर महासेतु कर दिया गया। इस पुल का निर्माण कार्य 2018 में पूरा हो जाना था लेकिन अभी तक पुल का निर्माण नहीं हो सका है जिससे इसकी लागत बढ़ गई है। पुल का निर्माण होने से यूपी के बलिया और बिहार के दियारांचल के लोगों को आवागमन में सहूलियत होगी। साल के सात माह लोगों को बलिया सहित यूपी के अन्य हिस्सों में जाने के लिए उन्हें बक्सर होते हुए 70 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। साल के पांच माह लोग पीपा पुल के सहारे उस पार आवाजाही करते हैं। पुल चालू होने के बाद बाढ़ की त्रासदी झेल रहे लोगों को आवागमन की कठिनाइयों से मुक्ति मिलेगी।
उत्तर प्रदेश से बिहार को जोड़ने वाले महासेतु का निर्माण कार्य का चार वर्षों बाद भी पूरा नहीं हो पाया। पुल का शिलान्यास 2015 में हुआ था। पुल का निर्माण 2018 में पूरा होना था लेकिन सुस्त गति से निर्माण के चलते लागत बढ़ गई और निर्माण कार्य अधर में लटका गया हैै। सेतु निगम के अधिकारियोें की मानें तो एप्रोच मार्ग बनने के बाद पुल चालू होने से ढाई वर्ष का समय लगने लग सकता है। पुल का निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के कारण पुराने एनएच मार्ग जो बलिया से बक्सर होकर जाता है, पर लगातार दबाव बढ़ने से शहर में भी ट्रैफिक का दबाव बढ़ गया है। वहीं, सेतु निर्माण में देरी के चलते स्थानीय स्तर पर व्यापारिक गतिविधियों के बढ़ने की जो आस लगाई गई थी वह भी खटाई में पड़ती दिखाई दे रही है।
शहर से सटे गंगा के शिवरामपुर घाट पर वर्ष 2015 में जनेश्वर मिश्र के नाम से सेतु बनाने का शिलान्यास हुआ। हालांकि अब इस सेतु का नाम महासेतु कर दिया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग को यूपी के रास्ते बिहार तक जोड़ने वाले इस पुल के निर्माण में चार अरब की लागत आ चुकी है लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो सका है। पुल का एप्रोच रोड शासन-प्रशासन के उदासीनता के चलते अब तक नहीं बन सका है। इसके चलते पुल का संचालन अधर में लटका हुआ है। परियोजना का संशोधित बजट शासन में अटका हुआ है और अतिरिक्त बजट न मिलने के चलते पुल का काम भी रुका है। पुल के निर्माण के वक्त माना जा रहा था कि इस सेतु के निर्माण के बाद यूपी-बिहार के बीच खासकर बलिया और बिहार के बीच व्यापारिक गतिविधियों में खासी तेजी आएगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ेगा। दियारांचल के 65 फीसदी लोग यूपी स्थित बेयासी गंगा घाट से बलिया बाजार करने आते हैं। निर्माण कार्य में जुटी एजेंसी की मानें तो ढाई किलोमीटर लंबे गंगा पुल पर वाहनों का आवागमन इस वर्ष सितंबर महीने में चालू हो जाएगा। फिलहाल, महासेतु का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हुआ है। एप्रोच का कार्य अभी भी जारी है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो इस एप्रोच को बनाने के लिए 197 करोड़ का संशोधित बजट शासन को भेजा गया जिसमें अब तक 110 करोड़ रुपये ही लोक निर्माण विभाग को मिल सके हैं। पूरा बजट नही मिलने से कार्य गति नहीं पकड़ रहा है। 15 जून के बाद मानसून आने के बाद एप्रोच पर डाली गई मिट्टी अगर बह गई तो उसके लिए फिर से रिवाइज इस्टीमेट भेजना पड़ सकता है। ऐसे में विभागीय उदासीनता के चलते फिर से समय पर कार्य पूरा नहीं हो पाएगा।
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इनसेट
4.42 अरब की लागत से बनना था पुल : गंगा रिवर सेतु की कुल प्राक्कलित राशि 03 अरब 99 करोड़ रुपये है। निर्माण कार्य का जिम्मा नई दिल्ली की कंपनी अरविंद टेकनो इंजीनियर्स प्रा. लि. एवं चंडीगढ़ की एसपी सिंगला प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को संयुक्त वेंचर को सौंपा गया है। पुल की कुल लंबाई 2544 मीटर है। उत्तर दिशा में यह बलिया के पास गाजीपुर-हाजीपुर एनएच-31 को जोड़ेगी जबकि दक्षिण में यह बक्सर-कोईलवर तटबंध के नजदीक शिवपुर दियारा में मिलेगी। सेतु निर्माण का कार्य 20 नवंबर 2018 को पूरा करना था लेकिन अब तक संपूर्ण रूप से यह कार्य पूरा नही हो सका है और एप्रोच रोड आदि के निर्माण के लिए बजट बढ़ता ही जा रहा है। अब इसपर लागत चार अरब 42 लाख 55 हजार रुपये आऐंगे।
गाजीपुर-हाजीपुर एनएच 31 को जोड़ेगा पुल : महासेतु पर आवागमन चालू करने के लिए पुल के दोनों तरफ एप्रोच रोड बनाने का कार्य शुरू हो चुका है। फिलहाल, पुल के उत्तरी व दक्षिणी छोर पर संपर्क पथ बन रहा है। एप्रोच रोड बनाने की जिम्मेदारी बलिया की चर्चित छात्र-शक्ति इंफ्रा इंस्ट्रक्टर प्रा. लिमिटेड नामक कंपनी को सौंपा गया है। कंपनी सूत्रों के मुताबिक पुल के उत्तर में संपर्क पथ की लंबाई लगभग 3.5 किलोमीटर है, जो गाजीपुर-हाजीपुर एनएच-31 में मिलेगी। जबकि, दक्षिण में लंबाई 1.8 किलोमीटर है जो शिवपुर दियारा में मिलेगी।
70 किलोमीटर की दूरी हो जाएगी कम : यूपी के बलिया जनपद व बिहार के दियारांचल के लोगों को पुल बनने के बाद काफी सहूलियत मिलेगी। साल के सात माह लोगों को बलिया सहित यूपी के अन्य हिस्सों में जाने के लिए उन्हें बक्सर होते हुए 70 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। साल के पांच माह लोग पीपा पुल के सहारे उस पार आवाजाही करते हैं। वर्षों से बाढ़ की त्रासदी झेल रहे लोगों को आवागमन की कठिनाइयों से मुक्ति मिलेगी।
योजना के तहत जिले के इन गांवों को मिलेगा सीधा लाभ :
डुमरी, काजीपुर, बड़का सिंहनपुरा, खरहाटांड़, एकौना, सहियार, नियाजीपुर, राजपुर कला, चक्की, सिमरी, गंगौली, राजापुर, जवहीं दियर, राजपुर परसनपाह, केशोपुर, आशा पड़री, अरक, चन्दा, गायघाट, बलुआं, निमेज, नैनीजोर, महुआर, ईश्वरपुरा, चन्द्रपुरा सहित सिमरी, ब्रह्मपुर व डुमरांव प्रखंड के दर्जनों गांव सीधे तौर पर लाभांवित होंगे।
कोट
सेतु निर्माण का कार्य 20 नवंबर 2018 को पूरा करना था जिसके लिए रिवाइज इस्टीमेट चार अरब 42 करोड़ 74 लाख 55 हजार का बनाया गया था। जिसके लिए धन मिलने के साथ कार्य पूरा करा दिया गया है। मेंटीनेस के लिए एक साल का समय मिला था। इस पुल में कुल 25 पाया बनाने थे। जिनके ऊपर पुल का निर्माण कराया जाना था जो पूर्ण हो चुका है।-रोहित अग्रवाल, सहायक अभियंता, उप्र राज्य सेतु निगम
कोट
सेतु के लिए एप्रोच बनान के लिए 197 करोड़ का रिवाइज इस्टीमेट शासन को भेजा गया था। जिसमे से 110 करोड़ ही मिला है। जिसमें से कार्य कराया जा रहा है। बरसात से पहले इसे प्रोटेक्शन कराना जरुरी है। जिससे कि बाढ़ में यह मिट्टी न बह पाए। शासन से अगर समय पर पैसा आ गया तो नवंबर तक एप्रोच निर्माण का कार्य पूरा करा लिया जाएगा।-एसपी कनौजिया, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
कोट
यह परियोजना हमारे कार्यकाल से पहले का है। इस बारे में अभी जानकारी नहीं है। पूरी रिपोर्ट संबंधित विभाग से लेकर परियोजना को समय से पहले पूर्ण करा लिया जाएगा।-राम आसरे, अपर जिला अधिकारी
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उत्तर प्रदेश से बिहार को जोड़ने वाले महासेतु का निर्माण कार्य का चार वर्षों बाद भी पूरा नहीं हो पाया। पुल का शिलान्यास 2015 में हुआ था। पुल का निर्माण 2018 में पूरा होना था लेकिन सुस्त गति से निर्माण के चलते लागत बढ़ गई और निर्माण कार्य अधर में लटका गया हैै। सेतु निगम के अधिकारियोें की मानें तो एप्रोच मार्ग बनने के बाद पुल चालू होने से ढाई वर्ष का समय लगने लग सकता है। पुल का निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के कारण पुराने एनएच मार्ग जो बलिया से बक्सर होकर जाता है, पर लगातार दबाव बढ़ने से शहर में भी ट्रैफिक का दबाव बढ़ गया है। वहीं, सेतु निर्माण में देरी के चलते स्थानीय स्तर पर व्यापारिक गतिविधियों के बढ़ने की जो आस लगाई गई थी वह भी खटाई में पड़ती दिखाई दे रही है।
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शहर से सटे गंगा के शिवरामपुर घाट पर वर्ष 2015 में जनेश्वर मिश्र के नाम से सेतु बनाने का शिलान्यास हुआ। हालांकि अब इस सेतु का नाम महासेतु कर दिया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग को यूपी के रास्ते बिहार तक जोड़ने वाले इस पुल के निर्माण में चार अरब की लागत आ चुकी है लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो सका है। पुल का एप्रोच रोड शासन-प्रशासन के उदासीनता के चलते अब तक नहीं बन सका है। इसके चलते पुल का संचालन अधर में लटका हुआ है। परियोजना का संशोधित बजट शासन में अटका हुआ है और अतिरिक्त बजट न मिलने के चलते पुल का काम भी रुका है। पुल के निर्माण के वक्त माना जा रहा था कि इस सेतु के निर्माण के बाद यूपी-बिहार के बीच खासकर बलिया और बिहार के बीच व्यापारिक गतिविधियों में खासी तेजी आएगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ेगा। दियारांचल के 65 फीसदी लोग यूपी स्थित बेयासी गंगा घाट से बलिया बाजार करने आते हैं। निर्माण कार्य में जुटी एजेंसी की मानें तो ढाई किलोमीटर लंबे गंगा पुल पर वाहनों का आवागमन इस वर्ष सितंबर महीने में चालू हो जाएगा। फिलहाल, महासेतु का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हुआ है। एप्रोच का कार्य अभी भी जारी है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो इस एप्रोच को बनाने के लिए 197 करोड़ का संशोधित बजट शासन को भेजा गया जिसमें अब तक 110 करोड़ रुपये ही लोक निर्माण विभाग को मिल सके हैं। पूरा बजट नही मिलने से कार्य गति नहीं पकड़ रहा है। 15 जून के बाद मानसून आने के बाद एप्रोच पर डाली गई मिट्टी अगर बह गई तो उसके लिए फिर से रिवाइज इस्टीमेट भेजना पड़ सकता है। ऐसे में विभागीय उदासीनता के चलते फिर से समय पर कार्य पूरा नहीं हो पाएगा।
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4.42 अरब की लागत से बनना था पुल : गंगा रिवर सेतु की कुल प्राक्कलित राशि 03 अरब 99 करोड़ रुपये है। निर्माण कार्य का जिम्मा नई दिल्ली की कंपनी अरविंद टेकनो इंजीनियर्स प्रा. लि. एवं चंडीगढ़ की एसपी सिंगला प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को संयुक्त वेंचर को सौंपा गया है। पुल की कुल लंबाई 2544 मीटर है। उत्तर दिशा में यह बलिया के पास गाजीपुर-हाजीपुर एनएच-31 को जोड़ेगी जबकि दक्षिण में यह बक्सर-कोईलवर तटबंध के नजदीक शिवपुर दियारा में मिलेगी। सेतु निर्माण का कार्य 20 नवंबर 2018 को पूरा करना था लेकिन अब तक संपूर्ण रूप से यह कार्य पूरा नही हो सका है और एप्रोच रोड आदि के निर्माण के लिए बजट बढ़ता ही जा रहा है। अब इसपर लागत चार अरब 42 लाख 55 हजार रुपये आऐंगे।
गाजीपुर-हाजीपुर एनएच 31 को जोड़ेगा पुल : महासेतु पर आवागमन चालू करने के लिए पुल के दोनों तरफ एप्रोच रोड बनाने का कार्य शुरू हो चुका है। फिलहाल, पुल के उत्तरी व दक्षिणी छोर पर संपर्क पथ बन रहा है। एप्रोच रोड बनाने की जिम्मेदारी बलिया की चर्चित छात्र-शक्ति इंफ्रा इंस्ट्रक्टर प्रा. लिमिटेड नामक कंपनी को सौंपा गया है। कंपनी सूत्रों के मुताबिक पुल के उत्तर में संपर्क पथ की लंबाई लगभग 3.5 किलोमीटर है, जो गाजीपुर-हाजीपुर एनएच-31 में मिलेगी। जबकि, दक्षिण में लंबाई 1.8 किलोमीटर है जो शिवपुर दियारा में मिलेगी।
70 किलोमीटर की दूरी हो जाएगी कम : यूपी के बलिया जनपद व बिहार के दियारांचल के लोगों को पुल बनने के बाद काफी सहूलियत मिलेगी। साल के सात माह लोगों को बलिया सहित यूपी के अन्य हिस्सों में जाने के लिए उन्हें बक्सर होते हुए 70 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। साल के पांच माह लोग पीपा पुल के सहारे उस पार आवाजाही करते हैं। वर्षों से बाढ़ की त्रासदी झेल रहे लोगों को आवागमन की कठिनाइयों से मुक्ति मिलेगी।
योजना के तहत जिले के इन गांवों को मिलेगा सीधा लाभ :
डुमरी, काजीपुर, बड़का सिंहनपुरा, खरहाटांड़, एकौना, सहियार, नियाजीपुर, राजपुर कला, चक्की, सिमरी, गंगौली, राजापुर, जवहीं दियर, राजपुर परसनपाह, केशोपुर, आशा पड़री, अरक, चन्दा, गायघाट, बलुआं, निमेज, नैनीजोर, महुआर, ईश्वरपुरा, चन्द्रपुरा सहित सिमरी, ब्रह्मपुर व डुमरांव प्रखंड के दर्जनों गांव सीधे तौर पर लाभांवित होंगे।
कोट
सेतु निर्माण का कार्य 20 नवंबर 2018 को पूरा करना था जिसके लिए रिवाइज इस्टीमेट चार अरब 42 करोड़ 74 लाख 55 हजार का बनाया गया था। जिसके लिए धन मिलने के साथ कार्य पूरा करा दिया गया है। मेंटीनेस के लिए एक साल का समय मिला था। इस पुल में कुल 25 पाया बनाने थे। जिनके ऊपर पुल का निर्माण कराया जाना था जो पूर्ण हो चुका है।-रोहित अग्रवाल, सहायक अभियंता, उप्र राज्य सेतु निगम
कोट
सेतु के लिए एप्रोच बनान के लिए 197 करोड़ का रिवाइज इस्टीमेट शासन को भेजा गया था। जिसमे से 110 करोड़ ही मिला है। जिसमें से कार्य कराया जा रहा है। बरसात से पहले इसे प्रोटेक्शन कराना जरुरी है। जिससे कि बाढ़ में यह मिट्टी न बह पाए। शासन से अगर समय पर पैसा आ गया तो नवंबर तक एप्रोच निर्माण का कार्य पूरा करा लिया जाएगा।-एसपी कनौजिया, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
कोट
यह परियोजना हमारे कार्यकाल से पहले का है। इस बारे में अभी जानकारी नहीं है। पूरी रिपोर्ट संबंधित विभाग से लेकर परियोजना को समय से पहले पूर्ण करा लिया जाएगा।-राम आसरे, अपर जिला अधिकारी
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