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जलस्तर खिसकने से हैंडपंप व नलकूप नहीं दे रहे पानी
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रेवती। पड़ रही तेज गर्मी के बीच भूगर्भ जलस्तर नीचे खिसकने के चलते हैंडपंप एवं नलकूपों का पानी कम होने लगा है। यह समस्या प्रति वर्ष गर्मी के दिनों में पैदा होती है लेकिन इसको लेकर कोई कवायद नहीं की जा रही है। पूर्व के ताल तलैया में पानी जाने का रास्ता भी अवरुद्घ है लेकिन कोई कवायद नहीं की जा रही है।
जनसंख्या के आशातीत वृद्धि के कारण निरंतर हो रहे पानी के दोहन एवं उसके उपयोग दुरुपयोग का असर अब भूगर्भ जलस्तर पर पड़ने लगा है। लेकिन जल संरक्षण को लेकर जहां कोई कवायद नहीं की जा रही है वहीं, दूसरी ओर पूर्व के ताल तलैया के रास्ते भी अवरुद्घ हो गए हैं। नगर के पश्चिमी छोर पर बड़ा जलाशय दहताल स्थित है, वहीं पूर्वी छोर पर घाघरा नदी से बना विशाल जलाशय कोलनाला का बहुत बड़ा भू-भाग है। इसके अलावा जगह-जगह मानव निर्मित पोखरे तथा तालाब भी हैं। इन ताल तलैयों तथा पोखरे तालाबों में महीनों से पानी नहीं है। जब कि पहले बरसात के मौसम में ये ताल तलैये पानी से भर जाते थे और गर्मी के आने तक इनमें पानी हिलोरें मार रहा होता था और इससे भूगर्भ जलस्तर भी कायम रहता था। नगर निवासी आचार्य ओम प्रकाश तिवारी ने बताया कि ताल तलैयों या पोखरों में यदि कुंओं का निर्माण कर उनकी साफ सफाई सुनिश्चित रखी जाय तो भूगर्भ जल का भंडारण इन कुओं के माध्यम से बना रह सकता है।
बताया कि तालाबों के बीच पहले बल्लियां गाड़ने की परंपरा थी, इन बल्लियों से पानी रिस कर जमीन में जाकर संचित हुआ करता था। भूगर्भीय जल के लिए काम कर रहे अतुल कुमार पांडे बब्लू ने बताया कि जब घाघरा में पानी उफान पर होता है तो देवपुर रेगुलेटर से पानी रिस कर पहले कोलनाला तथा कौड़िया नाला से होते हुए दहताल तक पहुंचता है। लेकिन पिछले कई सालों से देवपुर रेगुलेटर के मुहाने के साथ नाले में जगह जगह मिट्टी के जमाव के कारण वह पानी ना तो कोलनाला में आ पाता है ना ही दहताल तक पहुंच पाता है। इसके चलते इन जलाशयों में पानी अल्प मात्रा में रहता हैै और जमीन में पानी पर्याप्त मात्रा में पहुंचने के कारण गर्मी आते ही भूगर्भ जलस्तर नीचे चला जाता है। उन्होंने रेगुलेटर के दक्षिण तथा जगह जगह जमे मिट्टी को साफ कराने की मांग की ताकि रेगुलेटर से रिसा पानी पर्याप्त मात्रा में क्षेत्र के बड़े जलाशयों में पहुंच सके।
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क्षेत्र में भूगर्भ जलस्तर का अंदाजा हैंडपंप लगाने वाले मिस्त्री को भी होता है। क्षेत्र के मिस्त्रियों की मानें तो बीते 10 सालों में 30 से 40 फुट पानी का जलस्तर कम हुआ है। बताया कि 2008 में 80 से 110 फुट पर जो हैंडपंप लगाने पर पानी मिल जाता था अब इसके लिए 120 से 160 फुट की गहराई पर मिल रहा है। पर विभिन्न स्थानों पर मिल रहा है।
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जनसंख्या के आशातीत वृद्धि के कारण निरंतर हो रहे पानी के दोहन एवं उसके उपयोग दुरुपयोग का असर अब भूगर्भ जलस्तर पर पड़ने लगा है। लेकिन जल संरक्षण को लेकर जहां कोई कवायद नहीं की जा रही है वहीं, दूसरी ओर पूर्व के ताल तलैया के रास्ते भी अवरुद्घ हो गए हैं। नगर के पश्चिमी छोर पर बड़ा जलाशय दहताल स्थित है, वहीं पूर्वी छोर पर घाघरा नदी से बना विशाल जलाशय कोलनाला का बहुत बड़ा भू-भाग है। इसके अलावा जगह-जगह मानव निर्मित पोखरे तथा तालाब भी हैं। इन ताल तलैयों तथा पोखरे तालाबों में महीनों से पानी नहीं है। जब कि पहले बरसात के मौसम में ये ताल तलैये पानी से भर जाते थे और गर्मी के आने तक इनमें पानी हिलोरें मार रहा होता था और इससे भूगर्भ जलस्तर भी कायम रहता था। नगर निवासी आचार्य ओम प्रकाश तिवारी ने बताया कि ताल तलैयों या पोखरों में यदि कुंओं का निर्माण कर उनकी साफ सफाई सुनिश्चित रखी जाय तो भूगर्भ जल का भंडारण इन कुओं के माध्यम से बना रह सकता है।
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बताया कि तालाबों के बीच पहले बल्लियां गाड़ने की परंपरा थी, इन बल्लियों से पानी रिस कर जमीन में जाकर संचित हुआ करता था। भूगर्भीय जल के लिए काम कर रहे अतुल कुमार पांडे बब्लू ने बताया कि जब घाघरा में पानी उफान पर होता है तो देवपुर रेगुलेटर से पानी रिस कर पहले कोलनाला तथा कौड़िया नाला से होते हुए दहताल तक पहुंचता है। लेकिन पिछले कई सालों से देवपुर रेगुलेटर के मुहाने के साथ नाले में जगह जगह मिट्टी के जमाव के कारण वह पानी ना तो कोलनाला में आ पाता है ना ही दहताल तक पहुंच पाता है। इसके चलते इन जलाशयों में पानी अल्प मात्रा में रहता हैै और जमीन में पानी पर्याप्त मात्रा में पहुंचने के कारण गर्मी आते ही भूगर्भ जलस्तर नीचे चला जाता है। उन्होंने रेगुलेटर के दक्षिण तथा जगह जगह जमे मिट्टी को साफ कराने की मांग की ताकि रेगुलेटर से रिसा पानी पर्याप्त मात्रा में क्षेत्र के बड़े जलाशयों में पहुंच सके।
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क्षेत्र में भूगर्भ जलस्तर का अंदाजा हैंडपंप लगाने वाले मिस्त्री को भी होता है। क्षेत्र के मिस्त्रियों की मानें तो बीते 10 सालों में 30 से 40 फुट पानी का जलस्तर कम हुआ है। बताया कि 2008 में 80 से 110 फुट पर जो हैंडपंप लगाने पर पानी मिल जाता था अब इसके लिए 120 से 160 फुट की गहराई पर मिल रहा है। पर विभिन्न स्थानों पर मिल रहा है।