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हल्के बुखार और जुकाम के साथ शरीर पर लाल दाने दिखें तो हो सकता है चिकनपॉक्स
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बलिया। मौसम में आ रहे बदलाव की वजह से चिकनपॉक्स की बीमारी ने दस्तक दे दी है। हांलाकि लोग इस बीमारी के इलाज से ज्यादा झाड़-फूँक पर यकीन करते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है शुरुआत में ही इसकी पूरी जांच कराई जाए और सम्पूर्ण इलाज लिया जाए तो इससे दूर रहा जा सकता है। आमतौर पर इसकी शुरुआत हल्के बुखार और जुकाम के साथ होती है। और उसके बाद पूरे शरीर में दाने निकल आते है। जो कभी-कभार बड़े दानों की शक्ल ले लेते हैं। तीन या चार दिन के बाद से इनके सूखने का समय शुरू हो जाता है। और ठीक होने लगते हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा.पीके मिश्रा ने बताया कि यह बीमारी संक्रामक है और इससे बचने के लिए जन-जागरूकता की जरूरी है। साफ़-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अभी कुछ दिनों से ओपीडी में भी चिकनपॉक्स के प्रभावित मरीज आ रहे हैं। हालांकि इनकी संख्या ज्यादा नही है। लेकिन ठंडे-गरम या फिर उमस वाली गर्मी के मौसम में बीमारी तेजी से फैलती है। इस बीमारी में मरीज को हल्का बुखार आता है। जैसे ही इसके लक्ष्ण दिखते हैं तो तुरंत मरीज को चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए।
रेवती सीएचसी पर तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डा.सिद्धार्थ मणि दूबे का कहना है कि बुखार-जुखाम से चिकनपॉक्स की शुरुआत होती है। चिकनपॉक्स ‘वैरीसेला जास्टर’ वायरस से होता है जिससें शरीर में दाने निकल आते है। यह बीमारी बच्चों व बड़ों दोनों को होती है। इस बीमारी की वजह से बच्चो को निमोनिया होने का भी खतरा रहता है। टीकाकरण वाले बच्चो में इस बीमारी के फैलने का खतरा कम होता है। लेकिन पूरी तरह से खत्म नही होता है। यह बीमारी संक्रामक है। इसलिए घनी बस्ती या छोटे घरों में ज्यादा संख्या में रहने वाले लोगों को तेजी से पकड़ लेती है। सावधानी से इस बीमारी से बचा जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति चपेट में आ जाता है तो उसे साफ़-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। चिकित्सक से सलाह लेकर ही दवा लेनी चाहिए।
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ऐसे पहचानें चिकनपॉक्स के लक्षण : चिकनपॉक्स की शुरुआत से पहले पैरों और पीठ में पीड़ा और शरीर में हल्का बुखार, हल्की खांसी, भूख में कमी, सर में दर्द, थकावट, उल्टियां बगैरह जैसे लक्षण नजर आते है और 24 घंटों के अंदर पेट या पीठ और चेहरे पर लाल खुजलीदार फुंसियां उभरने लगती हैं। जो बाद में पूरे शरीर में फैल जाती हैं। शरुआत में फुंसियां व दाने किसी कीड़े के डंक की तरह लगती हैं लेकिन धीरे-धीरे यह तरल पदार्थयुक्त पतली झिल्ली वाले दानों में परिवर्तित हो जाती है। चिकनपॉक्स के दाने लगभग एक इंच चौड़े भी हो सकते हैं और उनका तल लाल रंग का होता है और 2 से 4 दिनों में पूरे शरीर में तेजी से फैल जाते हैं।
ऐसे बचे चिकनपॉक्स की बिमारी से : चिकनपॉक्स गर्भावस्था, प्रसव या देखभाल के दौरान मां से बच्चें को, खांसते या छिकतें समय हवा के साथ निकलने वाली छोटी -छोटी बूदों से त्वचा से संपर्क होने पर (हाथ मिलाना या गले लगना), मुहं की लार से (जूठा खाने-पीने से), किसी गंदी या मैली सतह को छुने से यह फैलता है। इसके फैलने पर चिकनपॉक्स ग्रसित व्यक्ति को आराम करने दें। उसे अन्य सदस्यों से दूर अलग साफ़-सुथरे कमरें में ठहराएं ताकि दूसरे लोग ग्रसित न हो सकें। शरीर में पड़ें दानों को फोड़ना नहीं चाहिए। उन्हें स्वयं ही फूटने का इंतजार करें। ग्रसित व्यक्ति के बेड की चादर को साफ़ सुथरा रखें, हो सके तो रोजाना धुलें। साफ़ स्वच्छ धुले हुए कपडें ही पहनाएं। प्रशिक्षित चिकित्सक से ही सलाह व इलाज लें।
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मुख्य चिकित्साधिकारी डा.पीके मिश्रा ने बताया कि यह बीमारी संक्रामक है और इससे बचने के लिए जन-जागरूकता की जरूरी है। साफ़-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अभी कुछ दिनों से ओपीडी में भी चिकनपॉक्स के प्रभावित मरीज आ रहे हैं। हालांकि इनकी संख्या ज्यादा नही है। लेकिन ठंडे-गरम या फिर उमस वाली गर्मी के मौसम में बीमारी तेजी से फैलती है। इस बीमारी में मरीज को हल्का बुखार आता है। जैसे ही इसके लक्ष्ण दिखते हैं तो तुरंत मरीज को चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए।
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रेवती सीएचसी पर तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डा.सिद्धार्थ मणि दूबे का कहना है कि बुखार-जुखाम से चिकनपॉक्स की शुरुआत होती है। चिकनपॉक्स ‘वैरीसेला जास्टर’ वायरस से होता है जिससें शरीर में दाने निकल आते है। यह बीमारी बच्चों व बड़ों दोनों को होती है। इस बीमारी की वजह से बच्चो को निमोनिया होने का भी खतरा रहता है। टीकाकरण वाले बच्चो में इस बीमारी के फैलने का खतरा कम होता है। लेकिन पूरी तरह से खत्म नही होता है। यह बीमारी संक्रामक है। इसलिए घनी बस्ती या छोटे घरों में ज्यादा संख्या में रहने वाले लोगों को तेजी से पकड़ लेती है। सावधानी से इस बीमारी से बचा जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति चपेट में आ जाता है तो उसे साफ़-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। चिकित्सक से सलाह लेकर ही दवा लेनी चाहिए।
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ऐसे पहचानें चिकनपॉक्स के लक्षण : चिकनपॉक्स की शुरुआत से पहले पैरों और पीठ में पीड़ा और शरीर में हल्का बुखार, हल्की खांसी, भूख में कमी, सर में दर्द, थकावट, उल्टियां बगैरह जैसे लक्षण नजर आते है और 24 घंटों के अंदर पेट या पीठ और चेहरे पर लाल खुजलीदार फुंसियां उभरने लगती हैं। जो बाद में पूरे शरीर में फैल जाती हैं। शरुआत में फुंसियां व दाने किसी कीड़े के डंक की तरह लगती हैं लेकिन धीरे-धीरे यह तरल पदार्थयुक्त पतली झिल्ली वाले दानों में परिवर्तित हो जाती है। चिकनपॉक्स के दाने लगभग एक इंच चौड़े भी हो सकते हैं और उनका तल लाल रंग का होता है और 2 से 4 दिनों में पूरे शरीर में तेजी से फैल जाते हैं।
ऐसे बचे चिकनपॉक्स की बिमारी से : चिकनपॉक्स गर्भावस्था, प्रसव या देखभाल के दौरान मां से बच्चें को, खांसते या छिकतें समय हवा के साथ निकलने वाली छोटी -छोटी बूदों से त्वचा से संपर्क होने पर (हाथ मिलाना या गले लगना), मुहं की लार से (जूठा खाने-पीने से), किसी गंदी या मैली सतह को छुने से यह फैलता है। इसके फैलने पर चिकनपॉक्स ग्रसित व्यक्ति को आराम करने दें। उसे अन्य सदस्यों से दूर अलग साफ़-सुथरे कमरें में ठहराएं ताकि दूसरे लोग ग्रसित न हो सकें। शरीर में पड़ें दानों को फोड़ना नहीं चाहिए। उन्हें स्वयं ही फूटने का इंतजार करें। ग्रसित व्यक्ति के बेड की चादर को साफ़ सुथरा रखें, हो सके तो रोजाना धुलें। साफ़ स्वच्छ धुले हुए कपडें ही पहनाएं। प्रशिक्षित चिकित्सक से ही सलाह व इलाज लें।