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मनरेगा मजदूरों का नहीं हुआ भुगतान
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बलिया। मनरेगा के तहत कार्य करने वाले मजदूरों की मजदूरी का भुगतान समय से नहीं हो पा रहा है। दो से तीन महीने तक मजदूरों को इसके लिए इंतजार करना पड़ता है। वित्तीय वर्ष 19-20 में 302 मजदूरों का 582449 लाख रुपये का भुगतान कर्मियों की लापरवाही से अटका हुआ है।
बताया जाता है कि मनरेेगा के तहत कार्य करने वाले मजदूरों के भुगतान के लिए कार्य स्थल की जियो टैगिंग आवश्यक किया गया है। इसके बाद कराए गए कार्य का पूरा ब्योरा संबंधित ब्लाकों पर फीड किया जाता है और फिर ब्लाक स्तर से ही संबंधित मजदूर के खाते में मजदूरी का पैसा हस्तांतरित किया जाता है। धनराशि हस्तांतरित करते समय खाता नंबर, नाम या अन्य किसी तरह की गड़बड़ी होने पर ट्रांजेक्शन रिजेक्ट हो जाता है और धनराशि खाते में नहीं पहुुंचती। लेकिन अधिकारियों की ओर से इसे समय से संज्ञान नहीं लिया जाता है। जबकि शासन की ओर से यह प्रावधान किया गया है कि रिजेक्टेड ट्रांजेक्शन के कारणों की पड़ताल कर सुधारते हुए धनराशि का हस्तांतरण किया जाए। आलम यह है कि वर्ष 2019-20 में करीब दो माह ही काम हुए हैं लेकिन अब तक कुल 302 मजदूरों के कुल 582449 रुपये का भुगतान अटका हुआ है। अधिकारियों के निर्देश के बावजूद इसमें हीलाहवाली की जाती है। मनरेगा के तहत मजदूरी भुगतान में ट्रांजेक्शन फेल होने के मामले में दुबहड़ ब्लॉक पहले स्थान पर है, यहां कुल 44 ट्रांजेक्शन फेल होने के कारण इन मजदूरों का 111748 रुपये का भुगतान नहीं हो सका है। इसके बाद सीयर ब्लॉक के 41 मजदूरों के 52234 रुपये, हनुमानगंज ब्लॉक में 34 मजदूरों के 52472 रुपये, रसड़ा में 23 मजदूरों के 28427 रुपये, बेलहरी में 22 मजदूरों के 60060 रुपये, रेवती में 21 मजदूरों के 38402, मनियर में 17 मजदूरों के 37310 रुपये, नगरा में 16 मजदूरों के 42406 रुपये, मुरलीछपरा में 15 मजदूरों के 19110 रुपये, बैरिया के 13 मजदूरों के 26712 रुपये, चिलकहर में 12 मजदूरों के 24570 रुपये, गड़वार के 10 मजदूरों के 12194 रुपये, बांसडीह में आठ मजदूरों के 15652 रुपये, सोहांव में सात मजदूरों के 14196 रुपये, नवानगर में छह मजदूरों के 15288 रुपये व बेरुआरबारी में एक मजदूर का 1092 रुपये अटका हुआ है।
डीएन दुबे, पीडी, डीआरडीए, बलिया का कहना है कि मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों के मजदूरी का भुगतान ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए भेजा जाता है। विभिन्न कारणों से ट्रांजेक्शन फेल होने का संज्ञान लिया गया है और सभी ब्लॉकों को दुरुस्त कर भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।
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बताया जाता है कि मनरेेगा के तहत कार्य करने वाले मजदूरों के भुगतान के लिए कार्य स्थल की जियो टैगिंग आवश्यक किया गया है। इसके बाद कराए गए कार्य का पूरा ब्योरा संबंधित ब्लाकों पर फीड किया जाता है और फिर ब्लाक स्तर से ही संबंधित मजदूर के खाते में मजदूरी का पैसा हस्तांतरित किया जाता है। धनराशि हस्तांतरित करते समय खाता नंबर, नाम या अन्य किसी तरह की गड़बड़ी होने पर ट्रांजेक्शन रिजेक्ट हो जाता है और धनराशि खाते में नहीं पहुुंचती। लेकिन अधिकारियों की ओर से इसे समय से संज्ञान नहीं लिया जाता है। जबकि शासन की ओर से यह प्रावधान किया गया है कि रिजेक्टेड ट्रांजेक्शन के कारणों की पड़ताल कर सुधारते हुए धनराशि का हस्तांतरण किया जाए। आलम यह है कि वर्ष 2019-20 में करीब दो माह ही काम हुए हैं लेकिन अब तक कुल 302 मजदूरों के कुल 582449 रुपये का भुगतान अटका हुआ है। अधिकारियों के निर्देश के बावजूद इसमें हीलाहवाली की जाती है। मनरेगा के तहत मजदूरी भुगतान में ट्रांजेक्शन फेल होने के मामले में दुबहड़ ब्लॉक पहले स्थान पर है, यहां कुल 44 ट्रांजेक्शन फेल होने के कारण इन मजदूरों का 111748 रुपये का भुगतान नहीं हो सका है। इसके बाद सीयर ब्लॉक के 41 मजदूरों के 52234 रुपये, हनुमानगंज ब्लॉक में 34 मजदूरों के 52472 रुपये, रसड़ा में 23 मजदूरों के 28427 रुपये, बेलहरी में 22 मजदूरों के 60060 रुपये, रेवती में 21 मजदूरों के 38402, मनियर में 17 मजदूरों के 37310 रुपये, नगरा में 16 मजदूरों के 42406 रुपये, मुरलीछपरा में 15 मजदूरों के 19110 रुपये, बैरिया के 13 मजदूरों के 26712 रुपये, चिलकहर में 12 मजदूरों के 24570 रुपये, गड़वार के 10 मजदूरों के 12194 रुपये, बांसडीह में आठ मजदूरों के 15652 रुपये, सोहांव में सात मजदूरों के 14196 रुपये, नवानगर में छह मजदूरों के 15288 रुपये व बेरुआरबारी में एक मजदूर का 1092 रुपये अटका हुआ है।
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डीएन दुबे, पीडी, डीआरडीए, बलिया का कहना है कि मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों के मजदूरी का भुगतान ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए भेजा जाता है। विभिन्न कारणों से ट्रांजेक्शन फेल होने का संज्ञान लिया गया है और सभी ब्लॉकों को दुरुस्त कर भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।
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