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औषधीय खेती के लिए किसानों में बांटा बीज
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बलिया। नाबार्ड द्वारा प्रायोजित तथा मां सुरसरी सेवा संस्थान, कथरिया द्वारा आयोजित कृषि क्षेत्र संवर्धन निधि (एफ.एस.पी.एफ.) के अंतर्गत ऑन साइट डेमोंस्ट्रेशन ऑफ मेडीसनल प्लांटस, हल्दी और पिपरमिंट’ परियोजना में पांच गांवों के 25 किसानों को 3.125 हेक्टेयर में हल्दी की खेती करने हेतु बीज का नि:शुल्क वितरण सेवा सदन पब्लिक स्कूल कथरिया में मुख्य अतिथि जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक दिनेश कुमार सिन्हा द्वारा किया गया।
बताया कि हल्दी एक औषधीय व मसाले वाली फसल है। इसमें प्राकृतिक रुप से करकुमिन की मात्रा के कारण औषधीय गुण तथा पीला रंग पाया जाता है। जैसे-चोट लगने, त्वचा सम्बन्धी बीमारी, परफ्यूम बनाने टर्मरिक क्रीम बनाने व भोज्य एवं खाद्य सामग्री में मसाले के रुप में प्रयोग की जाती है। विशिष्ठ अतिथि नाबार्ड के डीडीएम अखिलेश कुमार झा ने बताया कि सूखी हल्दी में करक्यूमिन की मात्रा 2.6-6.6 प्रतिशत होती है जो हल्दी के गुणवत्ता, रोग प्रतिरोधक एवं रंग के लिए उत्तरदायी होती है। परियोजना प्रमुख डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि हल्दी को मटियार दोमट मृदाओं में जिनका पीएच मान 6.0- 7.0 के मध्य होता है उनमें अच्छी प्रकार उगाया जाता है। प्रति हेक्टेयर 8 से 10 क्विंटल बीज लगता है।
इसकी रोपाई अप्रैल से लेकर मध्य जून तक की जा सकती है। अगेती बुवाई से उपज सर्वोत्तम होती है। संचालन करते हुए संस्था के सचिव श्री सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि इस परियोजना में समय-समय पर संस्था वैज्ञानिकों द्वारा किसानों का मार्गदर्शन करेगी, एवं हल्दी एवं पिपरमिन्ट की खेती में आने वाली किसानों की प्रत्येक समस्या का समाधान करनें में अपना पूरा सहयोग प्रदान करेगी। कार्यक्रम के अंत में क्षेत्रीय सहयोगी एवं कार्यक्रम प्रभारी श्री राजनाराण सिंह ने सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर दिलीप सिंह, श्रवण सिंह, श्रीराम सिंह, सुनीला सिंह, बबलू सिंह, धर्मेन्द्र सिंह, यशवन्त सिंह, जगदीश राम, अनिल कुमार गुप्ता सहित सभी चयनित किसान उपस्थित रहें।
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बताया कि हल्दी एक औषधीय व मसाले वाली फसल है। इसमें प्राकृतिक रुप से करकुमिन की मात्रा के कारण औषधीय गुण तथा पीला रंग पाया जाता है। जैसे-चोट लगने, त्वचा सम्बन्धी बीमारी, परफ्यूम बनाने टर्मरिक क्रीम बनाने व भोज्य एवं खाद्य सामग्री में मसाले के रुप में प्रयोग की जाती है। विशिष्ठ अतिथि नाबार्ड के डीडीएम अखिलेश कुमार झा ने बताया कि सूखी हल्दी में करक्यूमिन की मात्रा 2.6-6.6 प्रतिशत होती है जो हल्दी के गुणवत्ता, रोग प्रतिरोधक एवं रंग के लिए उत्तरदायी होती है। परियोजना प्रमुख डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि हल्दी को मटियार दोमट मृदाओं में जिनका पीएच मान 6.0- 7.0 के मध्य होता है उनमें अच्छी प्रकार उगाया जाता है। प्रति हेक्टेयर 8 से 10 क्विंटल बीज लगता है।
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इसकी रोपाई अप्रैल से लेकर मध्य जून तक की जा सकती है। अगेती बुवाई से उपज सर्वोत्तम होती है। संचालन करते हुए संस्था के सचिव श्री सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि इस परियोजना में समय-समय पर संस्था वैज्ञानिकों द्वारा किसानों का मार्गदर्शन करेगी, एवं हल्दी एवं पिपरमिन्ट की खेती में आने वाली किसानों की प्रत्येक समस्या का समाधान करनें में अपना पूरा सहयोग प्रदान करेगी। कार्यक्रम के अंत में क्षेत्रीय सहयोगी एवं कार्यक्रम प्रभारी श्री राजनाराण सिंह ने सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर दिलीप सिंह, श्रवण सिंह, श्रीराम सिंह, सुनीला सिंह, बबलू सिंह, धर्मेन्द्र सिंह, यशवन्त सिंह, जगदीश राम, अनिल कुमार गुप्ता सहित सभी चयनित किसान उपस्थित रहें।
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