{"_id":"5a9ed11e4f1c1b82408b58ae","slug":"151520357662-ballia-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छोटे सिक्के लेने को लेकर हो रही नोकझोंक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छोटे सिक्के लेने को लेकर हो रही नोकझोंक
Updated Tue, 06 Mar 2018 11:04 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लालगंज। क्षेत्र के मुख्य बाजारों व गांव सहित हर एक छोटे बड़े चट्टी चौराहों की दुकानों पर एक रुपए के सिक्के को लेकर रोज नोकझोंक हो रही है। इसको लेकर दुकानदारों का अलग ही तर्क है। उनका कहना है कि सिक्का अधिक होने पर जब वह बैंक में जमा करने जाते हैं तो बैंक सिक्का लेने से इनकार कर देता है। रोजाना की किचकिच को लेकर ग्रामीणों ने बैंक और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है।
नोटबंदी के बाद से छोटे सिक्कों की बाजार में भरमार है, जिसको लेकर दुकानदारों व ग्राहकों में आये दिन नोक झोंक होती है। मोबाइल दुकानदार से लेकर पान दुकानदार, जनरल स्टोर, मिठाई और सब्जी आदि दुकानदारों के यहां यह सबसे बड़ी समस्या है। दुकानदारों का कहना है कि जहां से हम लोग भी समान लेते हैं, वहां भी सिक्के नहीं लिए जा रहा है, इसके बाद हम लोग बैंक में भी सिक्के जमा करने जाते हैं, तो बैंक कर्मी भी सिक्का लेने से मना कर देते हैं, जिससे हम मजबूर होकर सिक्के नहीं ले रहे हैं। इस संबंध में बैंक कर्मियों से बात की गई तो उनका कहना था कि सिक्के जमा लेते हैं लेकिन जब वह सिक्का ग्राहक को दिया जाता है तो वे लेने से इनकार करने लगते हैं। ऐसे में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। लालगंज बाजार के दूकानदार जोतेंद्र प्रसाद का कहना है कि उनका खुदरा व्यवसाय है ऐसे में सिक्का लोग देते हैं। जबकि पार्टी को भुगतान रुपयों में देना होता है। ऐसे में सिक्के के वजह से दस फीसदी अधिक पेमेंट देना पड़ रहा है।
विज्ञापन
नोटबंदी के बाद से छोटे सिक्कों की बाजार में भरमार है, जिसको लेकर दुकानदारों व ग्राहकों में आये दिन नोक झोंक होती है। मोबाइल दुकानदार से लेकर पान दुकानदार, जनरल स्टोर, मिठाई और सब्जी आदि दुकानदारों के यहां यह सबसे बड़ी समस्या है। दुकानदारों का कहना है कि जहां से हम लोग भी समान लेते हैं, वहां भी सिक्के नहीं लिए जा रहा है, इसके बाद हम लोग बैंक में भी सिक्के जमा करने जाते हैं, तो बैंक कर्मी भी सिक्का लेने से मना कर देते हैं, जिससे हम मजबूर होकर सिक्के नहीं ले रहे हैं। इस संबंध में बैंक कर्मियों से बात की गई तो उनका कहना था कि सिक्के जमा लेते हैं लेकिन जब वह सिक्का ग्राहक को दिया जाता है तो वे लेने से इनकार करने लगते हैं। ऐसे में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। लालगंज बाजार के दूकानदार जोतेंद्र प्रसाद का कहना है कि उनका खुदरा व्यवसाय है ऐसे में सिक्का लोग देते हैं। जबकि पार्टी को भुगतान रुपयों में देना होता है। ऐसे में सिक्के के वजह से दस फीसदी अधिक पेमेंट देना पड़ रहा है।
विज्ञापन