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जरूरत 15.98 लाख की, 3.27 लाख किताबें पहुंचीं
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बलिया। परिषदीय स्कूलों में तिमाही परीक्षा का समय आ गया है लेकिन अब तक स्कूलों में महज दो लाख 88 हजार 888 पाठ्य पुस्तकों का वितरण हो चुका है। जबकि जिले के 2249 परिषदीय स्कूलों में अध्ययन करने वाले करीब 3.40 लाख बच्चों को 15 लाख 98 हजार 710 पुस्तकों की आवश्यकता है। हालांकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अब तक तीन लाख 27 हजार 231 पुस्तकें जिले में आ गईं। शेष पुस्तकें भी जल्द आ जाएंगी। ऐसे में कई स्कूलों में बच्चे बिना किताबों के ही पढ़ रहे हैं। गत सत्र में भी पाठ्यपुस्तकें दीपावली के बाद ही स्कूलों में पहुंचाई गई थीं।
बेसिक शिक्षा परिषद के संचालित स्कूलों में विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें वितरित की जाती हैं। इसके लिए परिषद द्वारा छपाई और स्कूल तक पहुंचाने के लिए ढुलाई का ऑर्डर दिया जाता है लेकिन परिषदीय स्कूलों में किताबें कभी भी समय से नहीं पहुंच पाती हैं। स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने, स्कूलों में शत प्रतिशत उपस्थिति के लिए स्कूल चलो अभियान के तहत प्रयास कराया गया। इससे प्रदेश में लगभग 30 हजार से अधिक नए विद्यार्थियों ने परिषदीय स्कूलों में इस वर्ष प्रवेश लिया। लेकिन परिषद की नाकामी के चलते स्कूलों में पढ़ने के लिए विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तकें अब तक मुहैया नहीं हुई हैं। अप्रैल से शुरू हुए नए सत्र के चार माह पूरे होने के बाद भी हैं। लेकिन अभी भी करीब 40 प्रतिशत विद्यार्थी बिना किताबों के ही स्कूलों में पढ़ रहे हैं। जबकि तिमाही परीक्षा अगस्त के तीसरे और चौथे सप्ताह से प्रारंभ हो सकती हैं। लेकिन बच्चों के पास किताबें ही नहीं हैं, ऐसे में बच्चा अपनी पढ़ाई किस तरह से पूरी करेगा। गत सत्र भी किताबों के देरी से पहुंचने के कारण विद्यार्थी आधा से ज्यादा सत्र बिना किताबों के ही पढ़ते रहे थे। वहीं दूसरी तरफ विद्यार्थियों के लिए निपुण लक्ष्य तय किया गया है। जिसमें कक्षा और आयु वर्ग के अनुसार विद्यार्थियों के ज्ञान का स्तर परखा जाएगा। लगभग 15 दिन पहले जिले में तीन लाख 27 हजार 231 किताबें पहुंचाई गई है। इनमें दो लाख 88 हजार888 किताबें स्कूली बच्चों में वितरित भी की जा चुकी हैं। इनके सत्यापन का कार्य चल रहा है।
जिले में तीन लाख 27 हजार 231 किताबें पहुंच गई हैं। इनमें दो लाख 88 हजार 888 पुस्तकों का वितरण कर उनका सत्यापन कराया जा रहा है। शेष पुस्तकों के अगले सप्ताह तक जिले में पहुंचने की उम्मीद है। किताब आते ही वितरित करा दी जाएंगी। - नुरुल हुद्दा, जिला समन्वयक, सामुदायिक सहभागिता, बलिया
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बेसिक शिक्षा परिषद के संचालित स्कूलों में विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें वितरित की जाती हैं। इसके लिए परिषद द्वारा छपाई और स्कूल तक पहुंचाने के लिए ढुलाई का ऑर्डर दिया जाता है लेकिन परिषदीय स्कूलों में किताबें कभी भी समय से नहीं पहुंच पाती हैं। स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने, स्कूलों में शत प्रतिशत उपस्थिति के लिए स्कूल चलो अभियान के तहत प्रयास कराया गया। इससे प्रदेश में लगभग 30 हजार से अधिक नए विद्यार्थियों ने परिषदीय स्कूलों में इस वर्ष प्रवेश लिया। लेकिन परिषद की नाकामी के चलते स्कूलों में पढ़ने के लिए विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तकें अब तक मुहैया नहीं हुई हैं। अप्रैल से शुरू हुए नए सत्र के चार माह पूरे होने के बाद भी हैं। लेकिन अभी भी करीब 40 प्रतिशत विद्यार्थी बिना किताबों के ही स्कूलों में पढ़ रहे हैं। जबकि तिमाही परीक्षा अगस्त के तीसरे और चौथे सप्ताह से प्रारंभ हो सकती हैं। लेकिन बच्चों के पास किताबें ही नहीं हैं, ऐसे में बच्चा अपनी पढ़ाई किस तरह से पूरी करेगा। गत सत्र भी किताबों के देरी से पहुंचने के कारण विद्यार्थी आधा से ज्यादा सत्र बिना किताबों के ही पढ़ते रहे थे। वहीं दूसरी तरफ विद्यार्थियों के लिए निपुण लक्ष्य तय किया गया है। जिसमें कक्षा और आयु वर्ग के अनुसार विद्यार्थियों के ज्ञान का स्तर परखा जाएगा। लगभग 15 दिन पहले जिले में तीन लाख 27 हजार 231 किताबें पहुंचाई गई है। इनमें दो लाख 88 हजार888 किताबें स्कूली बच्चों में वितरित भी की जा चुकी हैं। इनके सत्यापन का कार्य चल रहा है।
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जिले में तीन लाख 27 हजार 231 किताबें पहुंच गई हैं। इनमें दो लाख 88 हजार 888 पुस्तकों का वितरण कर उनका सत्यापन कराया जा रहा है। शेष पुस्तकों के अगले सप्ताह तक जिले में पहुंचने की उम्मीद है। किताब आते ही वितरित करा दी जाएंगी। - नुरुल हुद्दा, जिला समन्वयक, सामुदायिक सहभागिता, बलिया
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