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सन्मार्ग पर चलने से ही प्रभु का दर्शन संभव
Updated Fri, 17 Nov 2017 10:58 PM IST
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जयप्रकाशनगर। जीव का कल्याण बिना संतों के सान्निध्य के नहीं हो सकता। संतो द्वारा बताए गए सन्मार्ग पर चलने से ही प्रभु का दर्शन संभव है ,यह बातें क्षेत्र के नरहरि धाम स्थित नरहरि मठ पर हो रहे नौ दिवसीय श्री पराशक्ति महायज्ञ के दूसरे दिन गुरुवार की शाम मठ के मठाधीश श्री श्री 108 श्री दीनबन्धु दीनानाथ दास उर्फ बनारसी बाबा ने प्रवचन के दौरान कहीं।
बताया कि रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है कि बिनु सत्संग विवेक न होई । राम कृपा बिनु सुलभ न सोई । जब प्रभु की अटूट कृपा होती है तभी संतों का सान्निध्य मिलता है और अगर संतों का सान्निध्य मिल गया तो जीव का कल्याण होना निश्चित है। बताया कि रामायण में सुग्रीव जीव है, हनुमान संत हैं और ब्रह्म राम हैं। जब संत रूपी हनुमान के सान्निध्य जीव रूपी सुग्रीव पर हुआ तो ब्रह्म रुपी प्रभु श्रीराम ने सेतु के समान बालि का वध कर जीव रुपी सुग्रीव का कष्ट हर लिया, जबकि सुग्रीव बालि के भय से किष्किन्धा छोड़कर अन्यत्र शापित स्थान पर रहकर बसेरा बना लिया था। वहीं जब संतरूपी हनुमान से मित्रता हुई तो सुग्रीव का कष्ट क्षणभंगुर में ही दूर हो गया, यहीं नहीं प्रभु की ऐसी कृपा हुई कि सुग्रीव किष्किंधा का राजा बन बैठा। यह सन्त की ही कृपा है। प्रवचन सुनने वाले पुरुष व महिला भक्त खूब जयकारे लगाए।
यज्ञ मंडप सहित जयकारे से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। देररात तक स्रोता जुटे रहे। इस मौके पर अरुण सिंह , मदन सिंह , प्रोफेसर सुभाष सिंह, एडवोकेट रुद्र देव कुँवर, गौरीशंकर पांडेय सहित सैकड़ों भक्त उपस्थित रहे।
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बताया कि रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है कि बिनु सत्संग विवेक न होई । राम कृपा बिनु सुलभ न सोई । जब प्रभु की अटूट कृपा होती है तभी संतों का सान्निध्य मिलता है और अगर संतों का सान्निध्य मिल गया तो जीव का कल्याण होना निश्चित है। बताया कि रामायण में सुग्रीव जीव है, हनुमान संत हैं और ब्रह्म राम हैं। जब संत रूपी हनुमान के सान्निध्य जीव रूपी सुग्रीव पर हुआ तो ब्रह्म रुपी प्रभु श्रीराम ने सेतु के समान बालि का वध कर जीव रुपी सुग्रीव का कष्ट हर लिया, जबकि सुग्रीव बालि के भय से किष्किन्धा छोड़कर अन्यत्र शापित स्थान पर रहकर बसेरा बना लिया था। वहीं जब संतरूपी हनुमान से मित्रता हुई तो सुग्रीव का कष्ट क्षणभंगुर में ही दूर हो गया, यहीं नहीं प्रभु की ऐसी कृपा हुई कि सुग्रीव किष्किंधा का राजा बन बैठा। यह सन्त की ही कृपा है। प्रवचन सुनने वाले पुरुष व महिला भक्त खूब जयकारे लगाए।
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यज्ञ मंडप सहित जयकारे से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। देररात तक स्रोता जुटे रहे। इस मौके पर अरुण सिंह , मदन सिंह , प्रोफेसर सुभाष सिंह, एडवोकेट रुद्र देव कुँवर, गौरीशंकर पांडेय सहित सैकड़ों भक्त उपस्थित रहे।
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