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11.79 लाख के गबन में प्रधान बर्खास्त, सचिव सस्पेंड
Updated Mon, 12 Mar 2018 10:04 PM IST
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बलिया। जिलाधिकारी सुरेंद्र विक्रम ने 11 लाख 79 हजार 271 रुपये के गबन में मनियर ब्लॉक के दिघेड़ा गांव के प्रधान शमीम अहमद को बर्खास्त करने के साथ ही सचिव उमेश पांडेय को निलंबित करने का आदेश जिला पंचायत राज अधिकारी को दिया है। डीएम ने तकनीकी सहायक के संविदा की सेवा समाप्त करने का निर्देश डीसी मनरेगा को दिया है। डीएम ने इन सभी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के साथ ही गबन की गई 11 लाख 79 हजार 271 रुपये की रिकवरी का भी निर्देश दिया है।
बताया जाता है कि दो साल पहले मनियर ब्लॉक के दिघेड़ा गांव के एके पाठक आदि ग्रामीणों ने मनरेगा कार्यों में हुए अनियमितता की शिकायत जिलाधिकारी से की थी। जांच के लिए जिलाधिकारी ने कमेटी गठित कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। जांच समिति ने माना था कि कई कार्यों में मानक का ध्यान नहीं रखा गया और कई कार्य कराए बिना ही भुगतान कर लिया गया है। कमेटी ने कुल 11 लाख 79 हजार 271 रुपये के गबन की पुष्टि करते हुए प्रधान, सचिव व तकनीकी सहायक को दोषी माना था। कमेटी की रिपोर्ट पर जिलाधिकारी ने दिघेड़ा के ग्राम प्रधान शमीम अहमद को बर्खास्त करने के साथ ही सचिव उमेश पांडेय को निलंबित करने का आदेश डीपीआरओ को दिया है। तकनीकी सहायक की भी संविदा की सेवा समाप्त करने का निर्देश श्रम एवं रोजगार उपायुक्त उपेंद्र पाठक को दिया है। जिलाधिकारी ने यह भी कहा है कि सभी दोषियों से 11 लाख 79 हजार 271 रुपये की रिकवरी कराई जाए। जिलाधिकारी ने डीसी मनरेगा व डीपीआरओ को सभी कार्रवाई एक सप्ताह में पूरा करने को कहा है।
उधर, जलाधिकारी ने सोमवार को मनरेगा योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, राज्य वित्त व 14वें वित्त के तहत हो रहे कार्यों की समीक्षा की। समीक्षा में कार्य की प्रगति नहीं मिलने पर कई सोहांव के बीडीओ व एडीओ पंचायत को प्रतिकूल प्रविष्ट देने व कई बीडीओ को चेतावनी पत्र देने का निर्देश दिया।
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समीक्षा में सोहांव ब्लॉक के गांवों में मनरेगा, पीएम आवास व राज्य वित्त तथा 14 वां वित्त के तहत कार्यों की प्रगति काफी खराब मिली। खासकर प्रधानमंत्री आवास में लापरवाही सामने आई। डीएम ने सोहांव ब्लॉक के बीडीओ व एडीओ पंचायत को प्रतिकूल प्रविष्टि देने का निर्देश दिया। इसके अलावा पंदह, बेलहरी व मुरलीछपरा के बीडीओ व एडीओ पंचायत को कठोर चेतावनी जारी करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने कहा कि मनरेगा, आवास योजना व राज्य वित्त तथा 14वें वित्त योजना के कार्यों में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, अनियमितता, लाभार्थियों का शोषण या दलालों द्वारा धनउगाही की बात सामने आई तो संबंधित अधिकारी इसके जिम्मेदार होंगे। चेताया कि शिकायत सहीं पाए जाने पर चेतावनी नहीं बल्कि सीधे निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
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बताया जाता है कि दो साल पहले मनियर ब्लॉक के दिघेड़ा गांव के एके पाठक आदि ग्रामीणों ने मनरेगा कार्यों में हुए अनियमितता की शिकायत जिलाधिकारी से की थी। जांच के लिए जिलाधिकारी ने कमेटी गठित कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। जांच समिति ने माना था कि कई कार्यों में मानक का ध्यान नहीं रखा गया और कई कार्य कराए बिना ही भुगतान कर लिया गया है। कमेटी ने कुल 11 लाख 79 हजार 271 रुपये के गबन की पुष्टि करते हुए प्रधान, सचिव व तकनीकी सहायक को दोषी माना था। कमेटी की रिपोर्ट पर जिलाधिकारी ने दिघेड़ा के ग्राम प्रधान शमीम अहमद को बर्खास्त करने के साथ ही सचिव उमेश पांडेय को निलंबित करने का आदेश डीपीआरओ को दिया है। तकनीकी सहायक की भी संविदा की सेवा समाप्त करने का निर्देश श्रम एवं रोजगार उपायुक्त उपेंद्र पाठक को दिया है। जिलाधिकारी ने यह भी कहा है कि सभी दोषियों से 11 लाख 79 हजार 271 रुपये की रिकवरी कराई जाए। जिलाधिकारी ने डीसी मनरेगा व डीपीआरओ को सभी कार्रवाई एक सप्ताह में पूरा करने को कहा है।
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उधर, जलाधिकारी ने सोमवार को मनरेगा योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, राज्य वित्त व 14वें वित्त के तहत हो रहे कार्यों की समीक्षा की। समीक्षा में कार्य की प्रगति नहीं मिलने पर कई सोहांव के बीडीओ व एडीओ पंचायत को प्रतिकूल प्रविष्ट देने व कई बीडीओ को चेतावनी पत्र देने का निर्देश दिया।
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समीक्षा में सोहांव ब्लॉक के गांवों में मनरेगा, पीएम आवास व राज्य वित्त तथा 14 वां वित्त के तहत कार्यों की प्रगति काफी खराब मिली। खासकर प्रधानमंत्री आवास में लापरवाही सामने आई। डीएम ने सोहांव ब्लॉक के बीडीओ व एडीओ पंचायत को प्रतिकूल प्रविष्टि देने का निर्देश दिया। इसके अलावा पंदह, बेलहरी व मुरलीछपरा के बीडीओ व एडीओ पंचायत को कठोर चेतावनी जारी करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने कहा कि मनरेगा, आवास योजना व राज्य वित्त तथा 14वें वित्त योजना के कार्यों में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, अनियमितता, लाभार्थियों का शोषण या दलालों द्वारा धनउगाही की बात सामने आई तो संबंधित अधिकारी इसके जिम्मेदार होंगे। चेताया कि शिकायत सहीं पाए जाने पर चेतावनी नहीं बल्कि सीधे निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।