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Ballia News: 24 थानों के दरोगाओं की डायरी में 1241 विवेचनाएं कैद
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बलिया। कानून में बदलाव करके न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने की बात भले कही जा रही हो, लेकिन हकीकत यह है कि विवेचनाएं ही समय से पूरी नहीं हो पा रही हैं। बीएनएस लागू होने के दस माह बाद भी विवेचनाओं की रफ्तार नहीं बढ़ी है। जिले के 24 थानों में 1241 से अधिक विवेचनाएं समय सीमा बीत जाने के बाद भी कोर्ट तक नहीं पहुंच सकी हैं।
थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस सही-गलत का पता लगाने के लिए मामले की विवेचना करती है। एफआईआर में दर्ज विवरण के मुताबिक, मामला सही मिलने पर पुलिस कोर्ट में चार्जशीट पेश करती है, जबकि गलत होने पर अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगाकर मामला खत्म कर देती है। ऐसे में यह सबसे अहम कड़ी होती है, लेकिन यह अहम काम भी समय पर नहीं हो रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक सात साल से कम सजा वाले मामलों की विवेचना 60 दिन में पूरी करनी होती है। अगर आरोप सात साल की सजा से अधिक के हैं, तब 90 दिन में विवेचना पूरी कर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करनी होती है। विवेचना पूरी न होने पर आरोपी को जमानत का आधार मिल जाता है। इस बाबत एसपी ओमवीर सिंह ने कहा कि लंबित विवेचनाओ को समय से पूरा करने के लिए माॅनिटरिंग की जाती है। विवेचनाओं की संख्या पूर्व से काफी कम हो गई है।
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थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस सही-गलत का पता लगाने के लिए मामले की विवेचना करती है। एफआईआर में दर्ज विवरण के मुताबिक, मामला सही मिलने पर पुलिस कोर्ट में चार्जशीट पेश करती है, जबकि गलत होने पर अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगाकर मामला खत्म कर देती है। ऐसे में यह सबसे अहम कड़ी होती है, लेकिन यह अहम काम भी समय पर नहीं हो रहा है।
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विशेषज्ञों के मुताबिक सात साल से कम सजा वाले मामलों की विवेचना 60 दिन में पूरी करनी होती है। अगर आरोप सात साल की सजा से अधिक के हैं, तब 90 दिन में विवेचना पूरी कर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करनी होती है। विवेचना पूरी न होने पर आरोपी को जमानत का आधार मिल जाता है। इस बाबत एसपी ओमवीर सिंह ने कहा कि लंबित विवेचनाओ को समय से पूरा करने के लिए माॅनिटरिंग की जाती है। विवेचनाओं की संख्या पूर्व से काफी कम हो गई है।
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