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दो कस्तूरबा गांधी विद्यालय का औचक निरीक्षण
Updated Fri, 10 Aug 2018 01:24 AM IST
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बलिया । डीएम भवानी सिंह खंगरौत ने कस्तूरबा गांधी विद्यालयों की व्यवस्था जांचने के लिए गुरुवार को चितबड़ागांव व असनवार जा धमके। दोनों जगह पठन-पाठन की बेहतरी के साथ सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा। जहां गणित, विज्ञान व अंग्रेजी के जहां रिक्त अध्यापक के पद हैं, जल्द भरने के निर्देश बीएसए को दिए।
कस्तूरबा गांधी विद्यालय चितबड़ागांव में व्यवस्था तो ठीक मिली, लेकिन पठन-पाठन की गुणवत्ता पर नाराजगी जाहिर की।वहां दो अनुस्थित अध्यापिकाओं से स्पष्टीकरण तलब किया। वार्डेन माधुरी कुशवाहा को सख्त लहजे में चेताया कि पढ़ाई पर विशेष ध्यान दें। बच्चों का आत्मविश्वास बढ़े, इसके लिए कदम उठाए जाएं। यह भी कहा कि इस औचक निरीक्षण के उद्देश्य कमियां निकलना नहीं है बल्कि यहाँ की व्यवस्था को बेहतर बनाए रखना है।
डीएम ने बालिकाओं की संख्या व वहां की व्यवस्था के बाबत बकायदा पूछताछ की। किचेन में जाकर साफ-सफाई आदि व्यवस्था देखी। दूध की मात्रा कम मिलने पर कहा कि बड़ी गिलास में कम से कम 200 मिली दूध हर बालिका को दिया जाए। स्वस्थ रहेंगी तभी इनकी पढ़ाई भी बेहतर होगी। जिलाधिकारी ने कहा कि एक बालिका पर साढ़े चार हजार प्रति महीने मिलते हैं। इसलिए बालिका को पौष्टिक आहार ही दिया जाए। मीनू के अनुसार ठेकेदार को खाद्य सामग्री सप्लाई करने को कहा जाए। बच्चियों के छात्रावास में पर्याप्त रोशनी नहीं होने पर नाराजगी जाहिर की। कहा कि पढ़ाई के लिहाज से सबसे जरूरी प्रकाश व्यवस्था है। इसे सुदृढ़ बनाकर अवगत करावें। लाइब्रेरी में बालिकाओं के लिए रोचक पुस्तकें उपलब्ध रखने का निर्देश दिया।
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कस्तूरबा गांधी विद्यालय चितबड़ागांव में व्यवस्था तो ठीक मिली, लेकिन पठन-पाठन की गुणवत्ता पर नाराजगी जाहिर की।वहां दो अनुस्थित अध्यापिकाओं से स्पष्टीकरण तलब किया। वार्डेन माधुरी कुशवाहा को सख्त लहजे में चेताया कि पढ़ाई पर विशेष ध्यान दें। बच्चों का आत्मविश्वास बढ़े, इसके लिए कदम उठाए जाएं। यह भी कहा कि इस औचक निरीक्षण के उद्देश्य कमियां निकलना नहीं है बल्कि यहाँ की व्यवस्था को बेहतर बनाए रखना है।
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डीएम ने बालिकाओं की संख्या व वहां की व्यवस्था के बाबत बकायदा पूछताछ की। किचेन में जाकर साफ-सफाई आदि व्यवस्था देखी। दूध की मात्रा कम मिलने पर कहा कि बड़ी गिलास में कम से कम 200 मिली दूध हर बालिका को दिया जाए। स्वस्थ रहेंगी तभी इनकी पढ़ाई भी बेहतर होगी। जिलाधिकारी ने कहा कि एक बालिका पर साढ़े चार हजार प्रति महीने मिलते हैं। इसलिए बालिका को पौष्टिक आहार ही दिया जाए। मीनू के अनुसार ठेकेदार को खाद्य सामग्री सप्लाई करने को कहा जाए। बच्चियों के छात्रावास में पर्याप्त रोशनी नहीं होने पर नाराजगी जाहिर की। कहा कि पढ़ाई के लिहाज से सबसे जरूरी प्रकाश व्यवस्था है। इसे सुदृढ़ बनाकर अवगत करावें। लाइब्रेरी में बालिकाओं के लिए रोचक पुस्तकें उपलब्ध रखने का निर्देश दिया।
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