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गुम हो गया मेला, किसी को खबर तक नहीं
Updated Mon, 22 Jan 2018 11:16 PM IST
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बलिया/गड़वार। कभी बसंत पंचमी की छटा में चार चांद बिखेरने वाला चांदपुर ‘बसंत मेला’ आज अपनी गुमनामी के अंधेरे में है। कभी यह मेला अपना एक महत्व रखता था और दूर-दूर से लोग यहां आते थे।
सन् 1972 भलुही निवासी तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य कुलदीप सिंह ने अपने कुछ सहयोगियों के साथ लगभग एक किलोमीटर की परिधि में मेले की शुरूआत की थी। नाम रखा था बसंत मेला। जिसका उद्घाटन मऊ जनपद के हलदरपुर निवासी बलिया के तत्कालीन चेयरमैन एडवोकेट शिवशंकर सिंह ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच झंडा गाड़कर उद्घाटन किया था। कुलदीप अपने दो साथी चांदपुर निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य जनार्दन सिंह और तत्कालीन न्याय पंचायत गड़वार के सरपंच शिवप्रताप सिंह (महंत जी) के साथ गांव-गांव घूमे थे और ग्रामीणों से इसमें शामिल होने का अनुरोध भी किया था। कुछ ही सालों में मेले की रौनक इस कदर बढ़ गई कि 1974 में हरियाणा, पंजाब, बिहार, बंगाल से मवेशी लाकर चार चांद लगाने लगे। इसके बाद जिला पंचायत की देखरेख में मेले का आयोजन होता रहा। कुलदीप सिंह का 16 जून 1996 में निधन हो गया तो हो गया। इसके बाद जो भी जिला पंचायत अध्यक्ष बना उसने अपनी जिम्मेदारी निभाई। शिवप्रसाद सिंह का भी निधन 2000 में हो गया।
एक जीवित साथी चांदपुर निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य जनार्दन सिंह ने अमर उजाला को इस जानकारी से अवगत करते हुए कहा कि बाद जिला पंचायत अध्यक्ष तथा अधिकारी इस मेले के प्रति उदासीनता बरतने लगे। नतीजन 2010 से मेला धीरे-धीरे शिथिल पड़ने लगा। 2017 तक जिला पंचायत द्वारा प्राइवेट टेंडर कर अध्यक्ष सुधीर पासवान और तत्कालीन डीएम मेले का आयोजन करते रहे।
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कोट
जिला पंचायत व्यवस्था देने का काम करता है। ये मेला जिला पंचायत की ओर से, लिहाजा अध्यक्ष संज्ञान लेंगे। वैसे इसकी देखरेख की व्यवस्था भी एडीएम के जिम्मे है।
-टीकाराम फुंडे, उपजिलाधिकारी
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सन् 1972 भलुही निवासी तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य कुलदीप सिंह ने अपने कुछ सहयोगियों के साथ लगभग एक किलोमीटर की परिधि में मेले की शुरूआत की थी। नाम रखा था बसंत मेला। जिसका उद्घाटन मऊ जनपद के हलदरपुर निवासी बलिया के तत्कालीन चेयरमैन एडवोकेट शिवशंकर सिंह ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच झंडा गाड़कर उद्घाटन किया था। कुलदीप अपने दो साथी चांदपुर निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य जनार्दन सिंह और तत्कालीन न्याय पंचायत गड़वार के सरपंच शिवप्रताप सिंह (महंत जी) के साथ गांव-गांव घूमे थे और ग्रामीणों से इसमें शामिल होने का अनुरोध भी किया था। कुछ ही सालों में मेले की रौनक इस कदर बढ़ गई कि 1974 में हरियाणा, पंजाब, बिहार, बंगाल से मवेशी लाकर चार चांद लगाने लगे। इसके बाद जिला पंचायत की देखरेख में मेले का आयोजन होता रहा। कुलदीप सिंह का 16 जून 1996 में निधन हो गया तो हो गया। इसके बाद जो भी जिला पंचायत अध्यक्ष बना उसने अपनी जिम्मेदारी निभाई। शिवप्रसाद सिंह का भी निधन 2000 में हो गया।
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एक जीवित साथी चांदपुर निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य जनार्दन सिंह ने अमर उजाला को इस जानकारी से अवगत करते हुए कहा कि बाद जिला पंचायत अध्यक्ष तथा अधिकारी इस मेले के प्रति उदासीनता बरतने लगे। नतीजन 2010 से मेला धीरे-धीरे शिथिल पड़ने लगा। 2017 तक जिला पंचायत द्वारा प्राइवेट टेंडर कर अध्यक्ष सुधीर पासवान और तत्कालीन डीएम मेले का आयोजन करते रहे।
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जिला पंचायत व्यवस्था देने का काम करता है। ये मेला जिला पंचायत की ओर से, लिहाजा अध्यक्ष संज्ञान लेंगे। वैसे इसकी देखरेख की व्यवस्था भी एडीएम के जिम्मे है।
-टीकाराम फुंडे, उपजिलाधिकारी