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अकीदत के साथ रोजेदारों ने अदा की जुमे की नमाज
Updated Sat, 19 May 2018 12:17 AM IST
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बलिया। रमजान माह के पहले जुमे की नमाज जिले की सभी मस्जिदों में अकीदत के साथ अदा की गई। इस दौरान सुबह से ही प्रशासन सतर्क रहा। रमजान के पहले जुमे की नमाज को लेकर मस्जिदों के आसपास व्यवस्था दुरुस्त की गई थी। नगर पालिका ने सफाई करवाने के साथ ही चूने का छिड़काव किया। तय समय पर मस्जिदों में अजान हुई तो लोग नमाज के लिए घरों एवं दुकानों से निकलने लगे।
जुमे की नमाज के लिए मस्जिदों में मुस्लिम समुदाय के लोग पहुंचे और अकीदत के साथ नमाज अदा की। शहर के कई हिस्सों और ग्रामीण इलाकों के लोग मस्जिद में पहुंचे। तय वक्त पर सभी मस्जिदों में जुमा की नमाज अदा की गई। नगर के विशुनीपुर स्थित जामा मस्जिद, चमन सिंह बाग रोड स्थित बड़ी मस्जिद, बहेरी मस्जिद, कलेक्ट्रेट स्थित नमाज स्थल सहित ग्रामीण इलाकों में भी नमाज अदा की गई। इसके बाद सभी रोजेदारों ने रहमत और बरकत की दुआ मांगी।
नमाज को लेकर सुरक्षा व्यवस्था चौकस रही। मौलाना मंसूर हाफिज ने बताया कि खुदा की बंदगी का हक अदा करने, उसके एहसानों का शुक्र अदा करने, खुदा के सामने बंदा और गुलाम होने के इजहार और खुदा की बड़ाई और हुक्मरानी का इकरार करने के लिए इस्लाम ने जो इबादती निजाम पेश किया है, उसमें एक अहम इबादत नमाज है। नमाज की अहमियत और जरूरत का जिक्र कुरआन और हदीस में अनेक जगहों पर हुआ है। दिन में पांच बार नमाज पढ़ना हर मुसलमान मर्द और औरत पर फर्ज है। किसी मुसलमान के लिए नमाज को छोड़ना सख्त गुनाह है। बल्कि नमाज के बिना मुसलमान होने की कल्पना और तसव्वुर तक इस्लाम में नहीं है।
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जुमे की नमाज के लिए मस्जिदों में मुस्लिम समुदाय के लोग पहुंचे और अकीदत के साथ नमाज अदा की। शहर के कई हिस्सों और ग्रामीण इलाकों के लोग मस्जिद में पहुंचे। तय वक्त पर सभी मस्जिदों में जुमा की नमाज अदा की गई। नगर के विशुनीपुर स्थित जामा मस्जिद, चमन सिंह बाग रोड स्थित बड़ी मस्जिद, बहेरी मस्जिद, कलेक्ट्रेट स्थित नमाज स्थल सहित ग्रामीण इलाकों में भी नमाज अदा की गई। इसके बाद सभी रोजेदारों ने रहमत और बरकत की दुआ मांगी।
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नमाज को लेकर सुरक्षा व्यवस्था चौकस रही। मौलाना मंसूर हाफिज ने बताया कि खुदा की बंदगी का हक अदा करने, उसके एहसानों का शुक्र अदा करने, खुदा के सामने बंदा और गुलाम होने के इजहार और खुदा की बड़ाई और हुक्मरानी का इकरार करने के लिए इस्लाम ने जो इबादती निजाम पेश किया है, उसमें एक अहम इबादत नमाज है। नमाज की अहमियत और जरूरत का जिक्र कुरआन और हदीस में अनेक जगहों पर हुआ है। दिन में पांच बार नमाज पढ़ना हर मुसलमान मर्द और औरत पर फर्ज है। किसी मुसलमान के लिए नमाज को छोड़ना सख्त गुनाह है। बल्कि नमाज के बिना मुसलमान होने की कल्पना और तसव्वुर तक इस्लाम में नहीं है।
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