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आठ तरह के विवाह लेकिन प्रचलन में केवल दो : रामकुमार
Updated Wed, 14 Jun 2017 10:07 PM IST
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जयप्रकाश नगर(बलिया। विवाह आठ प्रकार के होते हैं। जिसमें दो ही प्रकार के विवाह का प्रचलन चला आ रहा है। जयमाल भी एक प्रकार का विवाह ही है। लेकिन इस फैशन के दौर में आज एक ही मंडप में दो प्रकार से शादियां की जा रही है।
उक्त बातें क्षेत्र के इब्राहिमा बाद (सुदामापुरी) गांव स्थित श्रीराम जानकी मंदिर पर राम बालक दास जी महराज के सानिध्य में चल रहे 11 दिवसीय श्री महारुद्र यज्ञ के आठवें दिन मंगलवार की रात प्रवचन के दौरान बृन्दावन से आए मानस मर्मज्ञ श्री रामकुमार दास जी महाराज ने कही। सतयुग, द्वापर, त्रेता में देखा जाए तो नल दमयंती का विवाह गंधर्व रीति से जयमाल के द्वारा हुआ था। जिसके परिणाम स्वरूप दोनों लोगों का 14 वर्ष का बनवास हुआ। द्रौपदी का पांचों पांडवों के साथ गंधर्व रीति से जयमाल के द्वारा ही हुआ था। जिससे पांडवों को 12 वर्ष का बनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास झेलना पड़ा था। प्रभु श्रीराम तथा मां सीता का विवाह गंधर्व रीति से जयमाल के द्वारा ही हुआ था जिसके परिणाम स्वरूप उन लोगों को भी 14 वर्ष का वनवास झेलना पड़ा। जबकि भगवान भोले नाथ का विवाह सती के साथ ब्रह्म विवाह के तहत हुई थी। उसी समय से ब्रह्म विवाह का प्रचलन है। इस मौके पर पूर्व प्रधान विनोद सिंह, पप्पू सिंह, सुरेश सिंह, विमल दास जी महराज, तेग बहादुर सिंह, ललन सिंह आदि थे।
उक्त बातें क्षेत्र के इब्राहिमा बाद (सुदामापुरी) गांव स्थित श्रीराम जानकी मंदिर पर राम बालक दास जी महराज के सानिध्य में चल रहे 11 दिवसीय श्री महारुद्र यज्ञ के आठवें दिन मंगलवार की रात प्रवचन के दौरान बृन्दावन से आए मानस मर्मज्ञ श्री रामकुमार दास जी महाराज ने कही। सतयुग, द्वापर, त्रेता में देखा जाए तो नल दमयंती का विवाह गंधर्व रीति से जयमाल के द्वारा हुआ था। जिसके परिणाम स्वरूप दोनों लोगों का 14 वर्ष का बनवास हुआ। द्रौपदी का पांचों पांडवों के साथ गंधर्व रीति से जयमाल के द्वारा ही हुआ था। जिससे पांडवों को 12 वर्ष का बनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास झेलना पड़ा था। प्रभु श्रीराम तथा मां सीता का विवाह गंधर्व रीति से जयमाल के द्वारा ही हुआ था जिसके परिणाम स्वरूप उन लोगों को भी 14 वर्ष का वनवास झेलना पड़ा। जबकि भगवान भोले नाथ का विवाह सती के साथ ब्रह्म विवाह के तहत हुई थी। उसी समय से ब्रह्म विवाह का प्रचलन है। इस मौके पर पूर्व प्रधान विनोद सिंह, पप्पू सिंह, सुरेश सिंह, विमल दास जी महराज, तेग बहादुर सिंह, ललन सिंह आदि थे।
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