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चार एकड़ जमीन घाघरा में विलीन
Updated Fri, 28 Sep 2018 12:40 AM IST
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जयप्रकाशनगर। क्षेत्र के इब्राहिमाबाद नौबरार (अठगांवा) में गुरुवार की सुबह से ही घाघरा ने एकबार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरु कर दिया। घाघरा कृषि योग्य भूमि को अपने आगोश में लेते हुए बीएसटी बांध की ओर बढ़ रही है। भीतर बसे नई बस्ती के वाशिंदों में दहशत हैं। गुरुवार को घाघरा ने चार एकड़ जमीन को आगोश में ले लिया।
बाढ़ विभाग द्वारा बकुल्हा संसार संसार टोला बांध को सुरक्षित करने के लिए करीब 30 करोड़ की लागत से कटाव रोधी कार्य करवाया गया था। जिसमें एक टी स्पर का भी निर्माण कराया गया है। गुरुवार की सुबह घाघरा नदी ने अपना उग्र रूप दिखाना शुरु कर दिया और नवनिर्मित टी स्पर से सटे करीब 20 मीटर की दूरी में कटान करते हुए बीएसटी बांध की तरफ काफी तेजी से बढ़ रही है। नदी का यह रुप देखकर नई बस्ती के निवासियों का होश उड़ गया है। बताया जाता है कि घाघरा नदी का यह कहर पूरे दिन रह गया तो देर शाम तक घाघरा बीएसटी बांध तक पहुंच सकती है। क्योंकि कटान स्थल से बांध की दूरी मात्र करीब 30 मीटर ही रह गया है। इसके बाद घाघरा बीएसटी बांध को आगोश में लेते हुए नई बस्ती को निशाना बना सकती है। लेकिन इन सब के बावजूद इस तरफ ना ही बाढ़ खंड और ना ही किसी जनप्रतिनिधि का ही ध्यान जा रहा है। गुरुवार को पूरे दिन में घाघरा ने करीब चार एकड़ भूमि को अपने आगोश में ले लिया और कटान अभी भी जारी है।
बाढ़ विभाग द्वारा बकुल्हा संसार संसार टोला बांध को सुरक्षित करने के लिए करीब 30 करोड़ की लागत से कटाव रोधी कार्य करवाया गया था। जिसमें एक टी स्पर का भी निर्माण कराया गया है। गुरुवार की सुबह घाघरा नदी ने अपना उग्र रूप दिखाना शुरु कर दिया और नवनिर्मित टी स्पर से सटे करीब 20 मीटर की दूरी में कटान करते हुए बीएसटी बांध की तरफ काफी तेजी से बढ़ रही है। नदी का यह रुप देखकर नई बस्ती के निवासियों का होश उड़ गया है। बताया जाता है कि घाघरा नदी का यह कहर पूरे दिन रह गया तो देर शाम तक घाघरा बीएसटी बांध तक पहुंच सकती है। क्योंकि कटान स्थल से बांध की दूरी मात्र करीब 30 मीटर ही रह गया है। इसके बाद घाघरा बीएसटी बांध को आगोश में लेते हुए नई बस्ती को निशाना बना सकती है। लेकिन इन सब के बावजूद इस तरफ ना ही बाढ़ खंड और ना ही किसी जनप्रतिनिधि का ही ध्यान जा रहा है। गुरुवार को पूरे दिन में घाघरा ने करीब चार एकड़ भूमि को अपने आगोश में ले लिया और कटान अभी भी जारी है।
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