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साधन सहकारी समितियां निष्क्रिय
Updated Wed, 15 Nov 2017 11:14 PM IST
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दुबहर। क्षेत्र के न्याय पंचायतों में स्थित साधन सहकारी समितियां निष्क्रिय हैं। विभागीय उदासीनता के चलते समिति पर खाद और बीज नदारद है। ऐसे में निजी दुकान पर खाद बीज लेना किसानों की मजबूरी है। ऐसे में यह दुकानदार किसानों की जेंबें ढीली करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। वहीं समिति की खराब व्यवस्था से किसानों में खासी नाराजगी है।
सरकार ने न्याय पंचायत स्तर पर साधन सहकारी समितियों को अनुदान देकर संचालित करने की योजना बनाई, लेकिन वहां तैनात कर्मचारियों के लापरवाही के कारण यह साधन सहकारी समितियां महज शो पीस बनी हैं । दुबहर निवासी किसान सुनील पांडे ने कहा कि इन समितियों को सही तरीके से अगर चलाया जाए तो क्षेत्रीय किसानों को कोई परेशानी नहीं होगी। खाद-बीज की उपलब्धता स्थानीय स्तर पर लोगों को हो जाएगी। अखार निवासी किसान संत विलास सिंह ने कहा कि साधन सहकारी समितियां पिछले दो दशक से पूरे इलाके में निष्क्रिय पड़ी हुई हैं। यहां महीनों तक कर्मचारी नहीं आते है।ं खाद-बीज तो दूर की बात है उनके संचालन के लिए सरकार कोई ठोस पहल नहीं कर रही है।
जनाडी निवासी अजय कुमार पांडेय ने कहा कि सहकारी समितियों के बंद होने की वजह से प्राइवेट दूकानदारों की चांदी कट रही है। आलम यह हे कि औने-पौने दाम पर खाद बीज बेच कर रोज़ मालामाल हो रहे हैं। रामपुर टीटिहि निवासी हरेंद्र सिंह ने कहा कि एक जमाना था कि साधन सहकारी समितियों पर किसानों को ऋण के साथ-साथ खाद बीज भी उपलब्ध हो जाता था। लेकिन साधन सहकारी समितियों के बंद होने से छोटे किसानों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की कुर्सी पर बैठे जिम्मेदार लोगों से सहकारिता आंदोलन को बचाने के लिए साधन सहकारी समितियों को प्राथमिक स्तर से सुधार करने की मांग की।
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सरकार ने न्याय पंचायत स्तर पर साधन सहकारी समितियों को अनुदान देकर संचालित करने की योजना बनाई, लेकिन वहां तैनात कर्मचारियों के लापरवाही के कारण यह साधन सहकारी समितियां महज शो पीस बनी हैं । दुबहर निवासी किसान सुनील पांडे ने कहा कि इन समितियों को सही तरीके से अगर चलाया जाए तो क्षेत्रीय किसानों को कोई परेशानी नहीं होगी। खाद-बीज की उपलब्धता स्थानीय स्तर पर लोगों को हो जाएगी। अखार निवासी किसान संत विलास सिंह ने कहा कि साधन सहकारी समितियां पिछले दो दशक से पूरे इलाके में निष्क्रिय पड़ी हुई हैं। यहां महीनों तक कर्मचारी नहीं आते है।ं खाद-बीज तो दूर की बात है उनके संचालन के लिए सरकार कोई ठोस पहल नहीं कर रही है।
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जनाडी निवासी अजय कुमार पांडेय ने कहा कि सहकारी समितियों के बंद होने की वजह से प्राइवेट दूकानदारों की चांदी कट रही है। आलम यह हे कि औने-पौने दाम पर खाद बीज बेच कर रोज़ मालामाल हो रहे हैं। रामपुर टीटिहि निवासी हरेंद्र सिंह ने कहा कि एक जमाना था कि साधन सहकारी समितियों पर किसानों को ऋण के साथ-साथ खाद बीज भी उपलब्ध हो जाता था। लेकिन साधन सहकारी समितियों के बंद होने से छोटे किसानों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की कुर्सी पर बैठे जिम्मेदार लोगों से सहकारिता आंदोलन को बचाने के लिए साधन सहकारी समितियों को प्राथमिक स्तर से सुधार करने की मांग की।
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