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ग्रामीणों ने धांधली का आरोप लगाते हुए सड़क निर्माण को रोका
Updated Tue, 15 May 2018 10:48 PM IST
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बैरिया/ नरहीं।। बैरिया से सुरेमनपुर को जोड़ने वाली सड़क के निर्माण और एनएच 31 से सलेमपुर के बीच बन रही सड़क के निर्माण कार्य को खराब गुणवत्ता का बताते हुए ग्रामीणों ने कार्य रुकवा दिया।
पहली घटना में बैरिया से सुरेमनपुर को जोड़ने वाली सड़क के निर्माण
में कार्यदायी संस्था द्वारा धांधली करने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने मंगलवार को निर्माण कार्य रोक दिया। इसकी सूचना पाकर मौके पर पहुंचे लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता आशुतोष शुक्ला ने जांच की तो अनियमितता सामने आई।
जांच में गिट्टी के निर्धारित मानक 20 ईंच की जगह कई जगह 17 से साढ़े 17 ईंच तक पाई गई। वहीं, पीचिंग कार्य भी दो ईंच के स्थान पर एक से डेढ़ ईंच मिला। अवर अभियंता ने संबंधित ठेकेदार को जहां-जहां गिट्टी कम मिली, वहां दोबारा और गिट्टी डलवाने तथा जहां-जहां पिच कम मिला, वहां पिच कराने को कहा। जेई ने लोगों को आश्वस्त किया कि किसी भी कीमत पर मानक के विपरीत निर्माण नहीं होने दिया जाएगा। बताया जाता है कि नौ करोड़ रुपये की लागत से सात किमी लंबी इस सड़क का चौड़ीकरण के साथ निर्माण हो रहा है। कई बार ग्रामीणों ने मानक के विपरीत काम होने का आरोप लगाया लेकिन विभागीय लोगों ने ध्यान नहीं दिया। इससे नाराज ग्रामीणों ने मंगलवार को जब काम रोक दिया, तब मौके पर जेई पहुंचे और जांच की। जेई ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया, तब निर्माण कार्य शुरू हुआ। इस मौके पर नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि मंटन वर्मा, बड़क सिंह, सत्येंद्र सिंह, विजय यादव, प्रकाश मौर्य, दरोगा वर्मा, वकील गिरि आदि थे।
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उधर, नरहीं संवाददाता के अनुसार थाना अंतर्गत एनएच 31 से सलेमपुर के बीच बन रही सड़क के निर्माण कार्य को खराब गुणवत्ता का बताते हुए सैकड़ों की संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने कार्य रुकवा दिया। मौके पर पहुंचे विभागीय जेई भी ग्रामीणों द्वारा कार्य को मानक के विरुद्ध होने के आरोपों को नकार नहीं सके।
चौरा व सलेमपुर गांव के लगभग बीस हजार की आबादी के लिए मुख्य सड़क पर आने का यह सबसे सुलभ रास्ता है। इसका निर्माण एक दशक से भी पहले किया गया था। जिसके बाद फिर कभी भी मरम्मत नहीं किया गया जिससे रास्ता बड़े बड़े गड्ढों से पट गया था। जिसके कारण चार पहिया वाहन बड़ी मुश्किल से आ जा पाते थे। ग्रामीणों के काफ़ी भाग दौड़ के बाद इस रास्ते पर निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ था। उनका आरोप है कि सड़क बनाने में शुरू से ही गुणवत्ता को नजरंदाज किया जा रहा था न तो प्रर्याप्त मात्रा में गिट्टी डाली गई और न ही उसकी अच्छी तरह कुटाई ही की गई। पिचिंग में भी मानक का ख्याल नहीं रखा गया।
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पहली घटना में बैरिया से सुरेमनपुर को जोड़ने वाली सड़क के निर्माण
में कार्यदायी संस्था द्वारा धांधली करने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने मंगलवार को निर्माण कार्य रोक दिया। इसकी सूचना पाकर मौके पर पहुंचे लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता आशुतोष शुक्ला ने जांच की तो अनियमितता सामने आई।
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जांच में गिट्टी के निर्धारित मानक 20 ईंच की जगह कई जगह 17 से साढ़े 17 ईंच तक पाई गई। वहीं, पीचिंग कार्य भी दो ईंच के स्थान पर एक से डेढ़ ईंच मिला। अवर अभियंता ने संबंधित ठेकेदार को जहां-जहां गिट्टी कम मिली, वहां दोबारा और गिट्टी डलवाने तथा जहां-जहां पिच कम मिला, वहां पिच कराने को कहा। जेई ने लोगों को आश्वस्त किया कि किसी भी कीमत पर मानक के विपरीत निर्माण नहीं होने दिया जाएगा। बताया जाता है कि नौ करोड़ रुपये की लागत से सात किमी लंबी इस सड़क का चौड़ीकरण के साथ निर्माण हो रहा है। कई बार ग्रामीणों ने मानक के विपरीत काम होने का आरोप लगाया लेकिन विभागीय लोगों ने ध्यान नहीं दिया। इससे नाराज ग्रामीणों ने मंगलवार को जब काम रोक दिया, तब मौके पर जेई पहुंचे और जांच की। जेई ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया, तब निर्माण कार्य शुरू हुआ। इस मौके पर नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि मंटन वर्मा, बड़क सिंह, सत्येंद्र सिंह, विजय यादव, प्रकाश मौर्य, दरोगा वर्मा, वकील गिरि आदि थे।
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उधर, नरहीं संवाददाता के अनुसार थाना अंतर्गत एनएच 31 से सलेमपुर के बीच बन रही सड़क के निर्माण कार्य को खराब गुणवत्ता का बताते हुए सैकड़ों की संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने कार्य रुकवा दिया। मौके पर पहुंचे विभागीय जेई भी ग्रामीणों द्वारा कार्य को मानक के विरुद्ध होने के आरोपों को नकार नहीं सके।
चौरा व सलेमपुर गांव के लगभग बीस हजार की आबादी के लिए मुख्य सड़क पर आने का यह सबसे सुलभ रास्ता है। इसका निर्माण एक दशक से भी पहले किया गया था। जिसके बाद फिर कभी भी मरम्मत नहीं किया गया जिससे रास्ता बड़े बड़े गड्ढों से पट गया था। जिसके कारण चार पहिया वाहन बड़ी मुश्किल से आ जा पाते थे। ग्रामीणों के काफ़ी भाग दौड़ के बाद इस रास्ते पर निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ था। उनका आरोप है कि सड़क बनाने में शुरू से ही गुणवत्ता को नजरंदाज किया जा रहा था न तो प्रर्याप्त मात्रा में गिट्टी डाली गई और न ही उसकी अच्छी तरह कुटाई ही की गई। पिचिंग में भी मानक का ख्याल नहीं रखा गया।