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शौचालयों के निर्माण की होगी विजिलेंस जांच
Updated Mon, 05 Mar 2018 12:36 AM IST
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बलिया। स्वच्छता अभियान के तहत बने शौचालयों की विजिलेंस जांच होगी। दो अक्तूबर 14 को योजना की शुरुआत से लेकर अब तक के शौचालयों का ब्योरा विजिलेंस ने पंचायती राज विभाग से मांगा है। अमर उजाला ने 16 जनवरी और सात फरवरी को शौचालयों के निर्माण में गड़बड़ी और गांवों को ओडीएफ करने में मनमानी शीर्षक से खुलासा किया था।
जनपद में दो अक्तूबर 2014 को स्वच्छता मिशन योजना की शुरुआत की हुई थी। तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अभियान को पूरी तरह पंख नहीं लग सके हैं। शौचालयों के निर्माण में खूब गड़बड़झाला किया गया। कई गांवों को ओडीएफ घोषित किया गया है लेकिन शौचालयों के निर्माण का मानक तक पूरा नहीं हो सका है। किसी भी शौचालय के पास पानी रखने का इंतजाम नहीं है। जिले के कुल 1843 गांवों को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) करने के लिए कुल तीन लाख 87 हजार 980 शौचालय बनाने का लक्ष्य निर्धारित है। लेकिन लाख प्रयास के बावजूद शौचालय निर्माण की गति जोर नहीं पकड़ रही। हालांकि पंचायती राज विभाग की ओर से अभी तक कुल 103 गांवों को ओडीएफ घोषित किया गया है। लेकिन अधिकांश ओडीएफ गांवों में जमीनी हकीकत कुछ और ही है और शौचालय निर्माण का कार्य भी अधूरा है। इसके अलावा अभियान के तहत कई गांवों में शौचालय की धनराशि की खूब बंदरबांट की गई। कई मामलों में तो विभाग ने मुकदमा भी दर्ज कराया है।
बतौर उदाहरण शहर से सटे दुबहड़ ब्लाक के जमुआ गांव को ओडीएफ कर दिया है। इस गांव को ओडीएफ करने के लिए वर्ष 2016-17 में 520 शौचालयों के निर्माण के लिए कुल 62 लाख 40 हजार की धनराशि विभाग से मुहैया कराई गई। लेकिन दो साल बाद भी अधिकांश शौचालयों का निर्माण अधर में लटका है। इस तरह की गड़बड़ी को देखते हुए शौचालयों के निर्माण की विजिलेंस जांच की तैयारी शासन ने की है। विजिलेंस ने जिला पंचायत अधिकारी कार्यालय को पत्र भेज कर दो अक्तूबर 2014 से लेकर अब तक के शौचालयों के निर्माण का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा है। ब्योरा तैयार करने को लेकर विभाग ने तैयारी शुरु कर दी है।
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विशेष अभिसूचना विभाग की ओर से शौचालयों के बाबत दो अक्तूबर 2014 से लेकर अब तक का ब्योरा मांगा गया है। ब्योरा तैयार करने का निर्देश स्वच्छता अभियान के जिला समन्वयक को दिया गया है।
अविनाश कुमार, डीपीआरओ
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जनपद में दो अक्तूबर 2014 को स्वच्छता मिशन योजना की शुरुआत की हुई थी। तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अभियान को पूरी तरह पंख नहीं लग सके हैं। शौचालयों के निर्माण में खूब गड़बड़झाला किया गया। कई गांवों को ओडीएफ घोषित किया गया है लेकिन शौचालयों के निर्माण का मानक तक पूरा नहीं हो सका है। किसी भी शौचालय के पास पानी रखने का इंतजाम नहीं है। जिले के कुल 1843 गांवों को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) करने के लिए कुल तीन लाख 87 हजार 980 शौचालय बनाने का लक्ष्य निर्धारित है। लेकिन लाख प्रयास के बावजूद शौचालय निर्माण की गति जोर नहीं पकड़ रही। हालांकि पंचायती राज विभाग की ओर से अभी तक कुल 103 गांवों को ओडीएफ घोषित किया गया है। लेकिन अधिकांश ओडीएफ गांवों में जमीनी हकीकत कुछ और ही है और शौचालय निर्माण का कार्य भी अधूरा है। इसके अलावा अभियान के तहत कई गांवों में शौचालय की धनराशि की खूब बंदरबांट की गई। कई मामलों में तो विभाग ने मुकदमा भी दर्ज कराया है।
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बतौर उदाहरण शहर से सटे दुबहड़ ब्लाक के जमुआ गांव को ओडीएफ कर दिया है। इस गांव को ओडीएफ करने के लिए वर्ष 2016-17 में 520 शौचालयों के निर्माण के लिए कुल 62 लाख 40 हजार की धनराशि विभाग से मुहैया कराई गई। लेकिन दो साल बाद भी अधिकांश शौचालयों का निर्माण अधर में लटका है। इस तरह की गड़बड़ी को देखते हुए शौचालयों के निर्माण की विजिलेंस जांच की तैयारी शासन ने की है। विजिलेंस ने जिला पंचायत अधिकारी कार्यालय को पत्र भेज कर दो अक्तूबर 2014 से लेकर अब तक के शौचालयों के निर्माण का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा है। ब्योरा तैयार करने को लेकर विभाग ने तैयारी शुरु कर दी है।
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विशेष अभिसूचना विभाग की ओर से शौचालयों के बाबत दो अक्तूबर 2014 से लेकर अब तक का ब्योरा मांगा गया है। ब्योरा तैयार करने का निर्देश स्वच्छता अभियान के जिला समन्वयक को दिया गया है।
अविनाश कुमार, डीपीआरओ