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शिक्षा का बाजारीकरण चिंता का विषय
Updated Fri, 06 Oct 2017 12:03 AM IST
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बलिया। नगर के वैदिक बाल विद्या मंदिर में शिक्षक सम्मान एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने शिक्षा के गिरते स्तर एवं शिक्षा के बाजारीकरण पर चर्चा की। कहा कि शिक्षा का बाजारीकरण के लिए केंद्र और प्रदेश सरकारें जिम्मेदार है।
गोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इस मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षक डा. जनार्दन राय ने कहा कि शिक्षा एक मूलभूत जरुरी तत्व है। लेकिन वर्तमान परिवेश में इसका बाजारीकरण इस कदर हो गया है कि गरीब का बच्चा नहीं पढ़ पा रहा है। हर बच्चे को पढ़ाने के लिए अभिभावकों को एक मोटी धनराशि खर्च करनी पड़ रही है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता मनोज राय हंस ने कहा कि अगर शिक्षा के बाजारीकरण को रोकना है तो इसके लिए केंद्र और प्रदेश सरकार को कड़ाई से नियम बनाने होंगे। इस मौके पर शिक्षक अखिलेश सिन्हा ने भी शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ते बाजारवाद को जिम्मेदार ठहराय। शिक्षक विजय कुमार सिंह, आशुतोष कुमार सिंह ने भी इस मुद्दे पर अभिभावकों में भी जागरुकता पर बल दिया। संबोधित करने वालों में लक्ष्मण सिंह, केएन उपाध्याय, पंकज कुमार सिंह, राहुल श्रीवास्तव आदि शामिल रहे।
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गोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इस मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षक डा. जनार्दन राय ने कहा कि शिक्षा एक मूलभूत जरुरी तत्व है। लेकिन वर्तमान परिवेश में इसका बाजारीकरण इस कदर हो गया है कि गरीब का बच्चा नहीं पढ़ पा रहा है। हर बच्चे को पढ़ाने के लिए अभिभावकों को एक मोटी धनराशि खर्च करनी पड़ रही है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता मनोज राय हंस ने कहा कि अगर शिक्षा के बाजारीकरण को रोकना है तो इसके लिए केंद्र और प्रदेश सरकार को कड़ाई से नियम बनाने होंगे। इस मौके पर शिक्षक अखिलेश सिन्हा ने भी शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ते बाजारवाद को जिम्मेदार ठहराय। शिक्षक विजय कुमार सिंह, आशुतोष कुमार सिंह ने भी इस मुद्दे पर अभिभावकों में भी जागरुकता पर बल दिया। संबोधित करने वालों में लक्ष्मण सिंह, केएन उपाध्याय, पंकज कुमार सिंह, राहुल श्रीवास्तव आदि शामिल रहे।
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