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Ballia News: ह्रदय रोग के लक्षण वाले 10 से 15 मरीज पहुंच रहे ओपीडी में
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बलिया। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पांच से आठ गंभीर मरीज ह्रदय रोग से संबंधित बीमारी के आ रहे हैं। ओपीडी में भी 10 से 15 मरीज ऐसे लक्षण वाले पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के एमडी मेडिसिन डॉ. पंकज झा का कहना है कि डंठ से बचाव करें और नहाते समय पैर पर व शरीर के अन्य हिस्से पर पानी डालने के बाद ही सिर पर डालें।
जनपद में तापमान गिरने से गलन भरी ठंड बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में हृदयाघात और ब्रेन हेमरेज का खतरा लोगों में बढ़ गया है।अस्पताल में आईसीयू वार्ड सहित अन्य संसाधन की कमी के कारण प्राथमिक इलाज के बाद चिकित्सक इन मरीजों को वाराणसी रेफर कर देते हैं। जिला अस्पताल के एमडी मेडिसिन डॉ. पंकज झा ने बताया कि दिल की बीमारी वाले लोगों को ठंड के मौसम में सावधानी बरतनी चाहिए। ठंड में ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, जिससे दिल को खून पंप करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है। शरीर के तापमान कम होने से खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे थक्का बनने की आशंका बढ़ने लगती है, जो दिल का दौरा या स्ट्रोक का कारण बन सकता है। सुबह नहाते समय सिर पर ठंडा पानी डालने से ब्रेन हेमरेज या लकवा मारने का डर रहता है। नहाते समय पैर पर व शरीर के अन्य हिस्से पर पानी डालने के बाद सिर पर डालें।
वरिष्ठ फिजिशियन डाॅ. विनोद कुमार ने कहा कि इन दिनों हवा में नमी की कमी के कारण धूल और अन्य कण हवा में तैरते रहते हैं जो हमारे फेफड़ों में जाकर सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकते हैं। जबकि ठंड के मौसम में शरीर के अंदर के अंगों को गर्म रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। रक्तचाप बढ़ने से दिल पर दबाव पड़ता है। जिसकी वजह से दिल की बीमारी का खतरा तो बढ़ता ही है साथ ही अस्थमा, चेस्ट पेन, लकवा का खतरा भी ज्यादा होता है।
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ये बरतें सावधानी
इस मौसम में संक्रमण का खतरा होता है। ऐसे में पहनावे व खानपान पर खास ध्यान दें। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक आहार का सेवन करें। साथ ही ठंडे पदार्थों के सेवन से परहेज करें ताकि वायरल इन्फेक्शन से बचा जा सके। वहीं बीपी, श्वास, दिल और शुगर के मरीजों को खास एहतियात बरतने की जरूरत है। नियमित चांच कराते रहें। किसी भी प्रकार की दिक्कत महसूस हो तो अपनी मर्जी से दवा न लें।
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जनपद में तापमान गिरने से गलन भरी ठंड बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में हृदयाघात और ब्रेन हेमरेज का खतरा लोगों में बढ़ गया है।अस्पताल में आईसीयू वार्ड सहित अन्य संसाधन की कमी के कारण प्राथमिक इलाज के बाद चिकित्सक इन मरीजों को वाराणसी रेफर कर देते हैं। जिला अस्पताल के एमडी मेडिसिन डॉ. पंकज झा ने बताया कि दिल की बीमारी वाले लोगों को ठंड के मौसम में सावधानी बरतनी चाहिए। ठंड में ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, जिससे दिल को खून पंप करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है। शरीर के तापमान कम होने से खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे थक्का बनने की आशंका बढ़ने लगती है, जो दिल का दौरा या स्ट्रोक का कारण बन सकता है। सुबह नहाते समय सिर पर ठंडा पानी डालने से ब्रेन हेमरेज या लकवा मारने का डर रहता है। नहाते समय पैर पर व शरीर के अन्य हिस्से पर पानी डालने के बाद सिर पर डालें।
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वरिष्ठ फिजिशियन डाॅ. विनोद कुमार ने कहा कि इन दिनों हवा में नमी की कमी के कारण धूल और अन्य कण हवा में तैरते रहते हैं जो हमारे फेफड़ों में जाकर सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकते हैं। जबकि ठंड के मौसम में शरीर के अंदर के अंगों को गर्म रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। रक्तचाप बढ़ने से दिल पर दबाव पड़ता है। जिसकी वजह से दिल की बीमारी का खतरा तो बढ़ता ही है साथ ही अस्थमा, चेस्ट पेन, लकवा का खतरा भी ज्यादा होता है।
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ये बरतें सावधानी
इस मौसम में संक्रमण का खतरा होता है। ऐसे में पहनावे व खानपान पर खास ध्यान दें। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक आहार का सेवन करें। साथ ही ठंडे पदार्थों के सेवन से परहेज करें ताकि वायरल इन्फेक्शन से बचा जा सके। वहीं बीपी, श्वास, दिल और शुगर के मरीजों को खास एहतियात बरतने की जरूरत है। नियमित चांच कराते रहें। किसी भी प्रकार की दिक्कत महसूस हो तो अपनी मर्जी से दवा न लें।