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Bahraich News: कछार और गन्ने के बीच वन विभाग को छका रहे भेड़िये

Sun, 21 Sep 2025 01:32 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 21 Sep 2025 01:32 AM IST
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Wolves are eluding the forest department between marshland and sugarcane.
गंदूझाला में लाठी डंडा लेकर बच्चे की तलाश करते ग्रामीण।   - स्रोत : ग्रामीण
बहराइच। बारिश और बाढ़ के बीच सरयू के कछार क्षेत्र में भेड़ियों का हमला नहीं थम रहा। कछार के साथ ही गन्ने के खेत के बीच भेड़िये लगातार वन विभाग को छका रहे हैं। बीते डेढ़ वर्ष में 80 से अधिक हमलों में एक महिला और 13 मासूम बच्चों की जान जा चुकी है। 120 मवेशी भी इनके शिकार बने हैं। अपनों को खोने के बाद परिजन बिलख रहे हैं और पिंजरा लगाने के बाद भी वन विभाग के हाथ खाली हैं।
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फखरपुर, कैसरगंज और महसी का सरयू कछार आदमखोर भेड़ियों के हमलों से दहल उठा है। शनिवार को रक्षाराम यादव का पुत्र अंकुश मां की गोद में दूध पी रहा था। अचानक आए वन्यजीव ने उसे मां की गोद से झपट्टा मारकर जबड़े में दबोच लिया। मां जब तक शोर मचाती, तब तक वह बच्चे को लेकर पास की झाड़ियों में गायब हो गया।
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बिलखते हुए मां ने कहा कि हमला भेड़िये ने किया। कुछ ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने तेंदुए को देखा है। वन विभाग अभी तक पक्के तौर पर कुछ कह नहीं पा रहा है। 10 मार्च 2024 से अब तक जिले में भेड़ियों के 80 से अधिक हमले हो चुके हैं। इनमें एक महिला और 13 बच्चों की मौत हो चुकी है।
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इस वर्ष जून से अब तक चार मासूम भेड़िये के शिकार बन चुके हैं। पिछले वर्ष भी भेड़िये ने आठ बच्चों और एक अधेड़ महिला को मार डाला था। तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद भेड़ियों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चला था।

वन विभाग ने लगाया पूरा जोर
डीएफओ राम सिंह यादव का कहना है कि सरयू कछार घनी झाड़ियों और गन्ने के खेतों से घिरा हुआ है। यही वजह है कि वन्यजीवों को छिपने और अचानक हमला करने का मौका मिल जाता है। उन्होंने बताया कि इलाके को चार सेक्टरों में बांटकर गश्ती दल को तैनात किया गया है। पांच कैमरा ट्रैप, 15 सोलर सीसीटीवी कैमरे, तीन ट्रैपिंग पिंजरे, दो थर्मल ड्रोन कैमरे निगरानी में लगाए गए हैं। पगमार्क खोजने और ट्रैकिंग की कोशिश लगातार जारी है।


पश्चिम बंगाल और हिमाचल प्रदेश के विशेषज्ञों की मदद
डीएफओ ने बताया कि पिछले वर्ष भी महसी क्षेत्र में गन्ने की फसल और झाड़ियों के कारण ऐसी ही मुश्किल आई थी। उस समय पश्चिम बंगाल निवासी ड्रोन ऑपरेटर सोहन और हिमाचल प्रदेश निवासी मोहित को अभियान में शामिल किया गया था। वही दोनों विशेषज्ञ इस बार भी ऑपरेशन में शामिल हैं।



दहशत में ग्रामीण, पूरी दिनचर्या प्रभावित
लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीण अब बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं। मंझारा तौकली गांव निवासी राजकुमार, प्रताप, रामचंदर ने बताया कि खेतों में काम ठप पड़ गया है। लोग सहमे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही आदमखोर भेड़ियों को नहीं पकड़ा गया तो हालात और गंभीर हो जाएंगे। ग्रामीणों ने फिर मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।

भेड़िये के हमले में हुई मौतों पर एक नजर

-10 मार्च 2024 : मिश्रनपुरवा निवासी सायरा (03)
-23 मार्च 2024 : नयापुरवा निवासी छोटू (02)
-17 जुलाई 2024 : मक्कापुरवा निवासी अख्तर रजा (डेढ़ वर्ष)
-27 जुलाई 2024: नकवा निवासी प्रतिभा (2)
-03 अगस्त 2024 : कोलैला निवासी किशन (07)
-18 अगस्त 2024 : सिंगिया नसीरपुर निवासी संध्या (04)
-22 अगस्त 2024 : भटौली निवासी खुशबू (04)
-25 अगस्त 2024 : कुम्हारनपुरवा निवासी रीता देवी (52)
-26 अगस्त 2024 : दिवानपुरवा निवासी अयांश (05)
-01 सितंबर 2024 : नववन गरेठी निवासी अंजली (02)
-03 जून 2025 : गदामार के गढीपुरवा निवासी आयुष(2)
-10 सितंबर : मंझारा तौकली के परागपुर निवासी ज्योति(4)
-12 सितंबर : भौंरी के बहोरवा निवासी संध्या (4 माह)
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