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स्वच्छ छवि वाले को चुनें विधायक
अमर उजाला/श्रावस्ती
Updated Wed, 22 Feb 2017 12:39 PM IST
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अमर उजाला के कार्यक्रम में जुटे छात्र
- फोटो : अमर उजाला
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विश्व को शांति का संदेश देने वाली श्रावस्ती में ज्ञान लेने वाले तिब्बती बौद्ध लामा भी भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए चिंतित हैं। लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए वह भी साफ सुथरी छवि वाले को ही चुनने की बात करते हैं। इसके लिए छात्रों ने शुक्रवार को सेचैन एलीमेंटरी स्कूल कटरा में अमर उजाला की ओर से आयोजित कैंपस अड्डा में करुणामयी हृदय वाले को ही प्रतिनिधि चुनने की अपील की।
तथागत भगवान बुद्ध की नगरी श्रावस्ती के लोग पांच वर्षों तक अपने जनप्रतिनिधि से विकास की आस संजोए थे। वोट के बदले आम जनता को नेताओं का प्यार नहीं, बल्कि निराशा और भ्रष्टाचार ही नसीब हुआ। ऐसे में भगवान बुद्ध की कर्मस्थली पर वर्षों से ध्यान व शांति का संदेश देने वाले बौद्ध लामा अपना प्रतिनिधि शांति दूत के रूप में चुनना चाहते हैं। वह चाहते हैं कि उनका प्रतिनिधि धार्मिक अमन-चैन पसंद हो।
सेचैन एलीमेंटरी स्कूल कटरा में आयोजित अमर उजाला के कैंपस अड्डा में सभी भिक्षु लामाओं ने कहा कि उनके प्रतिनिधि का हृदय करुणा से भरा हो। कार्यक्रम में शामिल बौद्ध लामाओं से जब अपना विधायक चुनने व उन्हें विकास के मुद्दे पर कुरेदा गया तो सभी ने एक सुर में नेताओं की बेरुखी की बात कही। लामाओं का कहना था कि बौद्ध विहार विश्व स्तर पर श्रावस्ती को पहचान देता है, लेकिन यहां कोई जनप्रतिनिधि कभी भी नहीं आया।
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धर्म व पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कोई नीति नहीं आई। उपासना के लिए आने वाले भिक्षुओं को भी कर के रूप में सरकार को पैसे देने होते हैं। इसके बाद भी कोई जनप्रतिनिधि इस समस्या के समाधान के लिए आगे नहीं आया।
श्रावस्ती में आज भी कई समस्याएं हैं। यह समस्याएं केवल पर्यटन क्षेत्र की ही नहीं है। चारों ओर लोग कष्ट में हैं। बेरोजगार भी परेशान हैं। गरीब शोषण से परेशान हैं। ऐसे में जनप्रतिनिधियों की भूमिका अब बढ़ रही है। कोरे आश्वासन से ही काम नहीं चलेगा। जनप्रतिनिधियों को जवाबदेय बनाना होगा। इसके लिए उसी प्रतिनिधि को सदन भेजना चाहिए, जिसके मन में गरीबों के लिए करुणा हो, धर्म प्रिय हो, ईमानदार हो व पढ़ा लिखा हो।
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तथागत भगवान बुद्ध की नगरी श्रावस्ती के लोग पांच वर्षों तक अपने जनप्रतिनिधि से विकास की आस संजोए थे। वोट के बदले आम जनता को नेताओं का प्यार नहीं, बल्कि निराशा और भ्रष्टाचार ही नसीब हुआ। ऐसे में भगवान बुद्ध की कर्मस्थली पर वर्षों से ध्यान व शांति का संदेश देने वाले बौद्ध लामा अपना प्रतिनिधि शांति दूत के रूप में चुनना चाहते हैं। वह चाहते हैं कि उनका प्रतिनिधि धार्मिक अमन-चैन पसंद हो।
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सेचैन एलीमेंटरी स्कूल कटरा में आयोजित अमर उजाला के कैंपस अड्डा में सभी भिक्षु लामाओं ने कहा कि उनके प्रतिनिधि का हृदय करुणा से भरा हो। कार्यक्रम में शामिल बौद्ध लामाओं से जब अपना विधायक चुनने व उन्हें विकास के मुद्दे पर कुरेदा गया तो सभी ने एक सुर में नेताओं की बेरुखी की बात कही। लामाओं का कहना था कि बौद्ध विहार विश्व स्तर पर श्रावस्ती को पहचान देता है, लेकिन यहां कोई जनप्रतिनिधि कभी भी नहीं आया।
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धर्म व पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कोई नीति नहीं आई। उपासना के लिए आने वाले भिक्षुओं को भी कर के रूप में सरकार को पैसे देने होते हैं। इसके बाद भी कोई जनप्रतिनिधि इस समस्या के समाधान के लिए आगे नहीं आया।
श्रावस्ती में आज भी कई समस्याएं हैं। यह समस्याएं केवल पर्यटन क्षेत्र की ही नहीं है। चारों ओर लोग कष्ट में हैं। बेरोजगार भी परेशान हैं। गरीब शोषण से परेशान हैं। ऐसे में जनप्रतिनिधियों की भूमिका अब बढ़ रही है। कोरे आश्वासन से ही काम नहीं चलेगा। जनप्रतिनिधियों को जवाबदेय बनाना होगा। इसके लिए उसी प्रतिनिधि को सदन भेजना चाहिए, जिसके मन में गरीबों के लिए करुणा हो, धर्म प्रिय हो, ईमानदार हो व पढ़ा लिखा हो।