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हटाने का नोटिस मिलने से बिफरे ग्रामीण
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कतर्नियाघाट के बिछिया निवासी ग्रामीणों को वन विभाग द्वारा नोटिस दिए जाने के बाद प्रदर्शन करते ग?
- फोटो : BAHRAICH
बिछिया (बहराइच)। बिछिया बाजार में रह रहे 28 परिवारों को हटाने के लिए वन विभाग की ओर से नोटिस भेजा गया है। साथ ही नोटिस का जवाब न मिलने पर वन विभाग ने स्वयं कब्जा हटवाने की बात कही है। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने मंगलवार को नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। इसके बाद उच्चाधिकारियों को ज्ञापन भेजा। ग्रामीणों का कहना है कि तहसील स्तर पर उनके दावा फार्म जमा हैं। इसके बावजूद कार्रवाई की जा रही है। उधर, नोटिस की समयावधि बीतने के तीन दिन बाद ग्रामीणों को कागजात मिले हैं।
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के कतर्नियाघाट रेंज अंतर्गत बिछिया बाजार बसा हुआ है। बिछिया बाजार के 28 परिवारों को वन विभाग ने कब्जा हटाने के लिए नोटिस भेजा है। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 1890 में वनकठिया मजदूरों को सुविधा देने के लिए ब्रिटिश हुकूमत द्वारा गांव बसाया गया था। जिलेे के 1903 के गजेटियर में इसका वर्णन विस्तार से किया गया है। यहां के निवासियों की ओर से दिए गए लगान का साक्ष्य वर्ष 1944 से लेकर लगातार अब तक मौजूद है।
ग्रामीणों के दावा फार्म भी तहसील में जमा हैं। इसके बावजूद वन विभाग साजिश के तहत नोटिस दे रहा है। जिससे ग्रामीणों में हड़कंप मचा है। जबकि सरकार की ओर से ग्रामीणों को बिजली, राशनकार्ड, बैंक खाता, परिवार रजिस्टर नकल, आय-जाति, निवास प्रमाण पत्र, जॉबकार्ड, श्रमिक कार्ड, आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र भी दिया जा रहा है। प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों को ज्ञापन भेजा। इस मौके पर मुश्ताक अली, अनीस अहमद, रंजय गुप्ता, शिवनंदन, सुभाष यादव, असलम, वसीम असगर, छोटेलाल, रघुवीर वर्मा, नईम, राजकुमार आदि मौजूद रहे।
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समयावधि पूरी होने के बाद मिला नोटिस
बिछिया बाजार निवासी सुभाष यादव, असलम, अनीस अहमद आदि ने बताया कि वन विभाग की ओर से 23 जून को नोटिस भेजा गया है। जबकि नोटिस के समयावधि की तिथि 20 जून है। ऐसे में समय पूरा होने के तीन दिन बाद नोटिस मिलना वन विभाग द्वारा कूटरचित साजिश है।
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कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के कतर्नियाघाट रेंज अंतर्गत बिछिया बाजार बसा हुआ है। बिछिया बाजार के 28 परिवारों को वन विभाग ने कब्जा हटाने के लिए नोटिस भेजा है। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 1890 में वनकठिया मजदूरों को सुविधा देने के लिए ब्रिटिश हुकूमत द्वारा गांव बसाया गया था। जिलेे के 1903 के गजेटियर में इसका वर्णन विस्तार से किया गया है। यहां के निवासियों की ओर से दिए गए लगान का साक्ष्य वर्ष 1944 से लेकर लगातार अब तक मौजूद है।
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ग्रामीणों के दावा फार्म भी तहसील में जमा हैं। इसके बावजूद वन विभाग साजिश के तहत नोटिस दे रहा है। जिससे ग्रामीणों में हड़कंप मचा है। जबकि सरकार की ओर से ग्रामीणों को बिजली, राशनकार्ड, बैंक खाता, परिवार रजिस्टर नकल, आय-जाति, निवास प्रमाण पत्र, जॉबकार्ड, श्रमिक कार्ड, आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र भी दिया जा रहा है। प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों को ज्ञापन भेजा। इस मौके पर मुश्ताक अली, अनीस अहमद, रंजय गुप्ता, शिवनंदन, सुभाष यादव, असलम, वसीम असगर, छोटेलाल, रघुवीर वर्मा, नईम, राजकुमार आदि मौजूद रहे।
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समयावधि पूरी होने के बाद मिला नोटिस
बिछिया बाजार निवासी सुभाष यादव, असलम, अनीस अहमद आदि ने बताया कि वन विभाग की ओर से 23 जून को नोटिस भेजा गया है। जबकि नोटिस के समयावधि की तिथि 20 जून है। ऐसे में समय पूरा होने के तीन दिन बाद नोटिस मिलना वन विभाग द्वारा कूटरचित साजिश है।