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आयुष्मान कार्ड बनवाने में रुचि नहीं ले रहे ग्रामीण
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बहराइच। जिले के लोग आयुष्मान कार्ड बनवाने में रुचि नहीं ले रहे हैं, जिससे लक्ष्य के सापेक्ष अभी पात्रों के आधे कार्ड भी नहीं बन सके हैं। नवंबर में 16800 कार्ड बने, जिससे कार्ड बनाने में जिले को 31वां स्थान मिला है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक ग्रामीण प्रचार-प्रसार के बाद भी आयुष्मान कार्ड बनवाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। लोग जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी में कार्ड बनवा रहे हैं। इससे परेशानी होती है। अभी तक 12 लाख कार्ड के सापेक्ष महज सवा दो लाख कार्ड ही बन पाए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड व मुख्यमंत्री गोल्डन कार्ड बनाने के लिए लगभग 12 लाख लोगों का लक्ष्य दिया गया है। वर्ष 2011 की जनगणना में शामिल लोगों के नाम पर ही कार्ड बनाए जा रहे हैं। लेकिन जिले में आयुष्मान कार्ड बनाने की गति काफी धीमी है। इसका मुख्य कारण ग्रामीणों का कार्ड बनवाने में रुचि नहीं लेना है। आयुष्मान भारत योजना के जिला समन्वयक डॉ. पीयूष मिश्रा ने बताया कि अब तक 218649 लोगों के कार्ड बनाए जा चुके हैं। इनमें नवंबर में 16800 कार्ड बनाए गए। जिला समन्वयक ने बताया कि प्रदेश में आयुष्मान कार्ड बनाने के मामले में जिले को 31वां स्थान मिला है। उन्होंने बताया कि कार्ड बनवाने के लिए निरंतर गांव-गांव में प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, लेकिन ग्रामीण कार्ड बनवाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। जरूरत पड़ने या गंभीर बीमारी होने पर ही ग्रामीण आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं, जिससे ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
नाम गलत होने से भी आती है दिक्कत
आयुष्मान भारत योजना के जिला समन्वयक डॉ. पीयूष मिश्रा ने बताया कि कार्ड प्रतिदिन बनाए जा रहे हैं, लेकिन सबसे अधिक समस्या आधारकार्ड में अंकित नाम से हो रही है। उन्होंने बताया कि आधारकार्ड में दूसरा नाम अंकित है, जबकि लेटर में दूसरा नाम दर्ज है। इससे कार्ड बनाने में परेशानी हो रही है।
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आयुष्मान कार्ड बनाने की स्थिति
जिले में लक्ष्य- 12 लाख
अब तक बने कार्ड- 218649
नवंबर में बने कार्ड- 16800
कार्ड बनाने की हो रही समीक्षा
जिले में प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड कार्ड बनाने की समीक्षा होती है। योजना के प्रभारी के साथ बैठक कर प्रगति रिपोर्ट तलब करते हैं। बीते दो माह से कार्ड बनाने में गति आई है, जिससे जिले को रैंक बेहतर मिल रही है। कोशिश है कि लक्ष्य को पूरा करने के लिए सभी पात्रों के आयुष्मान कार्ड बन जाएं। इसके लिए अधीनस्थों को दिशा निर्देश दिए गए हैं, जिससे कार्ड बनाने की गति और तेज हो सके।
डॉ. राजेश मोहन श्रीवास्तव, सीएमओ
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड व मुख्यमंत्री गोल्डन कार्ड बनाने के लिए लगभग 12 लाख लोगों का लक्ष्य दिया गया है। वर्ष 2011 की जनगणना में शामिल लोगों के नाम पर ही कार्ड बनाए जा रहे हैं। लेकिन जिले में आयुष्मान कार्ड बनाने की गति काफी धीमी है। इसका मुख्य कारण ग्रामीणों का कार्ड बनवाने में रुचि नहीं लेना है। आयुष्मान भारत योजना के जिला समन्वयक डॉ. पीयूष मिश्रा ने बताया कि अब तक 218649 लोगों के कार्ड बनाए जा चुके हैं। इनमें नवंबर में 16800 कार्ड बनाए गए। जिला समन्वयक ने बताया कि प्रदेश में आयुष्मान कार्ड बनाने के मामले में जिले को 31वां स्थान मिला है। उन्होंने बताया कि कार्ड बनवाने के लिए निरंतर गांव-गांव में प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, लेकिन ग्रामीण कार्ड बनवाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। जरूरत पड़ने या गंभीर बीमारी होने पर ही ग्रामीण आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं, जिससे ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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नाम गलत होने से भी आती है दिक्कत
आयुष्मान भारत योजना के जिला समन्वयक डॉ. पीयूष मिश्रा ने बताया कि कार्ड प्रतिदिन बनाए जा रहे हैं, लेकिन सबसे अधिक समस्या आधारकार्ड में अंकित नाम से हो रही है। उन्होंने बताया कि आधारकार्ड में दूसरा नाम अंकित है, जबकि लेटर में दूसरा नाम दर्ज है। इससे कार्ड बनाने में परेशानी हो रही है।
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आयुष्मान कार्ड बनाने की स्थिति
जिले में लक्ष्य- 12 लाख
अब तक बने कार्ड- 218649
नवंबर में बने कार्ड- 16800
कार्ड बनाने की हो रही समीक्षा
जिले में प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड कार्ड बनाने की समीक्षा होती है। योजना के प्रभारी के साथ बैठक कर प्रगति रिपोर्ट तलब करते हैं। बीते दो माह से कार्ड बनाने में गति आई है, जिससे जिले को रैंक बेहतर मिल रही है। कोशिश है कि लक्ष्य को पूरा करने के लिए सभी पात्रों के आयुष्मान कार्ड बन जाएं। इसके लिए अधीनस्थों को दिशा निर्देश दिए गए हैं, जिससे कार्ड बनाने की गति और तेज हो सके।
डॉ. राजेश मोहन श्रीवास्तव, सीएमओ