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Bahraich News: बाढ़ से बचाव पर हर साल बीस करोड़ खर्च, समस्या जस की तस

Fri, 28 Jun 2024 03:16 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच Updated Fri, 28 Jun 2024 03:16 AM IST
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Twenty crore rupees are spent every year on flood prevention, but the problem remains the same
15 करोड़ की लागत से इस बार भी चल रहीं बाढ़ से बचाव की पांच परियोजनाएं
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जिले की चार तहसीलें महसी, मिहींपुरवा, नानपारा व कैसरगंज हैं बाढ़ प्रभावित
बाढ़ से बचाव के लिए तटबंध, व रेन कट मजबूत करने का चल रहा काम
बहराइच। हर साल बाढ़ से बचाव के नाम पर करीब 20 करोड़ से भी अधिक रुपये खर्च हो रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद लोगों को इस समस्या से पूरी तरह से राहत नहीं मिल पा रही है। हालांकि बीते एक दशक की अपेक्षा मौजूदा समय में बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए जिला प्रशासन के स्तर तक काफी व्यापक इंतजाम किए गए हैं। डीएम भी लगातार बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का निरीक्षण कर रही हैं। एसडीएम और बाढ़ व सिंचाई से जुड़े अफसर भी इस काम में लगातार लगे हुए है।
जिले में नेपाल से आने वाले पानी से हर साल बाढ़ से काफी तबाही होती है। जिले की करीब चार लाख की आबादी इससे प्रभावित होती है। यहां की चार तहसीलों कैसरगंज, नानपारा, मिहींपुरवा व महसी में बाढ़ लोगों को प्रभावित करती है। इस समय इन चार तहसीलों में बाढ़ से बचाव के लिए पांच जगहों पर काम चल रहा है। महसी तहसील क्षेत्र में संभावित बाढ़ बचाव के लिए बेलहा-बेहरौली तटबंध की सुरक्षा व कटान रोधी काम चल रहा है। इसके बनने से क्षेत्र के बौंडी, गोलागंज, कायमपुर, पिपरा-पिपरी, किसानगंज चौराहा, मुरव्वा, मुंसरी, भगवानपुर चौराहा इत्यादि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को काफी हद तक राहत मिल सकेगी। इस समय सरयू नदी के बेलहा-बेहरौली तटबंध के स्पर नंबर 01 की सुरक्षा के लिए 375.05 लाख की लागत से कटान रोधी कार्य चल रहा है। जिसमें 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण है। इस कार्य से जहां 6700 की आबादी लाभान्वित होगी। वहीं 6690 हेक्टेयर कृषि भूमि की सुरक्षा होगी। वहीं ग्राम समूह कोढ़वा, करैहना एवं पिपरी की कटान से सुरक्षा का काम 447.80 लाख की लागत से कटान रोधी कार्य कराया गया है। यह कार्य पूर्ण हो चुका है। इस परियोजना से जहां 7600 की आबादी लाभान्वित होगी वहीं 6375 हेक्टेयर कृषि भूमि की सुरक्षा होगी। (संवाद)
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बन रही नाव, कराया जा रहा पशुओं का टीकाकरण
बाढ़ की संभावित संभावना को देखते हुए इस समय जिला प्रशासन के द्वारा नाव सही करवाई जा रही है। चारों तहसीलों के एसडीएम को डीएम के द्वारा यह निर्देश दिया है कि वह बाढ़ से बचाव के लिए सभी प्रभावित गांवों में नाव तैयार करवा लें। इसके साथ ही पशुओं का टीकाकरण करवाने के साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी यहां पर आकर तैयारियों में जुटी हैं। ग्रामीणों की भी जो समस्याएं हैं उनके निराकरण का काम भी हो रहा है।
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वर्ष 2023 में खर्च हो गए 20 करोड़
बाढ़ व सिंचाई विभाग से जुड़े सूत्रों की मानें तो वर्ष 2023 में बाढ़ से निपटने के लिए तटबंध निर्माण व अन्य कार्यों पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। हालांकि बीते साल बाढ़ का ज्यादा असर न होने के चलते लोगों को ज्यादा दिक्कत नहीं हुई थी। लेकिन इस बार बाढ़ की संभावित संभावना को देखते हुए सभी व्यवस्थाएं मजबूत करने का काम चल रहा है।


बाढ़ से बचाव की चल रही तैयारियां
बाढ़ से जिले की मिहींपुरवा, नानपारा, महसी व कैसरगंज तहसील प्रभावित होती है। यहां पर तटबंधों को सुरक्षित करने का काम संबंधित विभाग द्वारा कराया जा रहा है। बाढ़ ग्रस्त इलाकों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। संबंधित तहसील के एसडीएम को निर्देश दिया गया है कि वह नियमित बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र का दौरा करें और वहां पर जो भी समस्याएं है उनका त्वरित निराकरण कराएं। -मोनिका रानी, डीएम
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