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जंगल के आसपास नहीं होगी घनी खेती

Tue, 14 Jan 2020 10:48 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jan 2020 10:48 PM IST
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There will not be dense farming around the forest
बहराइच। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के जंगल से सटे आबादी वाले इलाकों में आए दिन हो रहे मानव वन्य जीव संघर्ष और वन्य जीवों के बढ़ते हमलों को रोकने के लिए वन विभाग और उद्यान विभाग संयुक्त पहल शुरू करने जा रहा है। जंगल से सटे गांवों में वन विभाग के सहयोग से उद्यान विभाग नई खेती पद्धति लागू करने की दिशा में काम शुरू करेगा। घनी फसलों को अपना प्रवास वन्य जीव समझ बैठते हैं। ऐसे में हमलों की आशंका भी बढ़ जाती है। इसे देखते हुए उद्यान विभाग इन गांवों के किसानों को फसलों के एक निर्धारित दूरी पर बोने और उनके साथ पैदा की जाने वाली सह फसली खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से प्रशिक्षण दिलाएगा। खेती में किसानों को सहयोग भी प्रदान किया जाएगा।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र 553 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। कतर्नियाघाट के घने जंगलों के बीच बिछिया, भवानीपुर समेत पांच वन ग्राम बसे हुए हैं। इसके अलावा जंगल से सटे इलाके में कई राजस्व ग्राम भी पड़ते हैं। जंगल से सटे गांवों में अभी तक परंपरागत तरीके से खेती व किसानी की जा रही है। कतर्नियाघाट के जंगलों में आए दिन ग्रामीणों पर वन्य जीवों के हमले के मामले सामने आते रहते हैं।
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वहीं मानव वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। इसे देखते हुए वन विभाग और उद्यान विभाग ने संयुक्त पहल शुरू करने का निर्णय लिया है। उद्यान सलाहकार आरके वर्मा ने बताया कि वन विभाग से जंगल से सटे गांवों की सूची ली जा रही है। गांवों की सूची मिलने के बाद इन गांवों में बेरोजगारों को सबसे अधिक मधुमक्खी पालन कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही बांस की खेती पर भी जोर दिया जाएगा।
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इन दोनो कार्यों के बाद हाथियों के झुंड के आए दिन फसलों को बर्बाद करने की घटनाएं थम सकेंगी। उद्यान सलाहकार ने बताया कि मिहीपुरवा इलाके में गन्ने की खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है। अभी तक किसान गन्ने के बीज दो फिट की दूरी पर बोते हैं। ऐसे में गन्ने की फसलों को जंगली तेंदुए और बाघ ग्रास लैंड समझ बैठते हैं। खेत में काम करने वाले किसानों पर हमले की आशंका सबसे अधिक रहती है।
अब इसे रोकने के लिए वन विभाग की ओर से किसानों को आठ फिट की दूरी पर गन्ने के बीज की बोआई करने के बारे में प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। किसानों को गन्ने के साथ बोई जाने वाली दूसरी फसलों के बारे में जानकारी दी जाएगी। वन और उद्यान विभाग के अधिकारियों को इस अभिनव पहल के शुरू करने से बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है।
खेत के चारों तरफ लगाएं सतावर
सतावर की फसल कांटेदार होती है। औषधीय पौधे के रूप में सतावर को लगाकर किसान अपनी आय भी बढ़ा सकते हैं। उद्यान सलाहकार का कहना है कि खेत के चारों ओर सतावर को लगाए जाने से यह एक कटीले बाड़ के रूप में काम करेगा। वन्य जीव खेत में प्रवेश भी नहीं कर सकेंगे। इसके साथ ही किसान लेमन ग्रास को भी लगा सकते हैं।
किसानों की आय भी बढ़ेगी
उद्यान सलाहकार आरके वर्मा ने बताया कि औषधीय फसलों को किसानों की ओर से लगाए जाने पर उसकी बिक्री के लिए बाजार भी उपलब्ध कराया जाएगा। किसानों के सह फसली खेती करने पर गन्ने के साथ दलहनी और तिलहनी फसल से भी अच्छी आय हासिल होगी, जिससे किसानों का रुझान बढ़ने की उम्मीद है।

मानव वन्य जीव संघर्ष रोकेने के लिए पहल की जा रही है। ग्रामीणों व किसानों को समझाया भी जा रहा है। घरों के पास छोटी फसल करने से जंगली जानवर घर की ओर नहीं बढे़ंगे। नई पद्धति से खेती की जाएगी तो मानव वन्य जीव संघर्ष थमेगा।
- जीपी सिंह, डीएफओ कतर्नियाघाट
इंसेट
वन्य जीवों के हमले एक नजर में-
वर्ष 2017-18
मृतक घायल
12 22
वर्ष 2018-19
मृतक घायल
7 25
वर्ष 2019-20
मृतक घायल
8 16
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