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Bahraich News: पेशी की नियत तिथि से पूर्व तहसीलदार ने कर दिया आदेश
Sun, 06 Oct 2024 11:44 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Sun, 06 Oct 2024 11:44 PM IST
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तहसील अधिवक्ता संघ महसी के पूर्व अध्यक्ष ने राज्यपाल को भेजा पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
बहराइच। तहसीलदार महसी ने एक वाद में पेशी की नियत तारीख से पूर्व बिना साक्ष्य व बहस के आदेश पारित कर दिया। इसका खुलासा होने पर तहसील अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष ने आदेश पर सवाल उठाते हुए राज्यपाल को पत्र भेजकर तहसीलदार के कृत्यों की जांच कराने की मांग की है।
तहसील अधिवक्ता संघ महसी के पूर्व अध्यक्ष भारत प्रसाद मिश्रा ने तहसीलदार रविकांत के खिलाफ वाद निस्तारण में गंभीर आरोप लगाए हैं। पूर्व अध्यक्ष ने बताया कि तहसीलदार द्वारा बउनवान महरूल बनाम चंद्रमणि की एक जमीन के क्रय-विक्रय विवाद के मुकदमे में 03 जून 2024 को पेशी की तिथि निर्धारित की थी। आरोप है कि तहसीलदार द्वारा पेशी की तिथि से पूर्व 30 मई को ही पत्रावली पर बिना सुनवाई व साक्ष्य को देखते हुए वाद में क्रेती महरूल को लाभ पहुंचाते हुए आदेश पारित कर दिया। जबकि पीड़ित के अधिवक्ता 03 जून को साक्ष्य व बहस करने की तैयारी में थे। पूर्व अध्यक्ष ने बताया कि तहसीलदार द्वारा अपनाई गई दोषपूर्ण विधिक प्रक्रिया, जो पूर्णतया असंवैधानिक थी। उसको लेकर जांच की मांग की थी। लेकिन जांच अधिकारी ने भी उनके पक्ष में संबंधित पत्रावली का अवलोकन किए बिना ही जांच रिपोर्ट लगाकर प्रार्थनापत्र का निस्तारण करा दिया। पूर्व अध्यक्ष ने प्रदेश के राज्यपाल को प्रकरण की पुन: किसी उच्चाधिकारी से जांच कराकर पूर्व में की गई जांच में जांच अधिकारी व तहसीलदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बहराइच। तहसीलदार महसी ने एक वाद में पेशी की नियत तारीख से पूर्व बिना साक्ष्य व बहस के आदेश पारित कर दिया। इसका खुलासा होने पर तहसील अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष ने आदेश पर सवाल उठाते हुए राज्यपाल को पत्र भेजकर तहसीलदार के कृत्यों की जांच कराने की मांग की है।
तहसील अधिवक्ता संघ महसी के पूर्व अध्यक्ष भारत प्रसाद मिश्रा ने तहसीलदार रविकांत के खिलाफ वाद निस्तारण में गंभीर आरोप लगाए हैं। पूर्व अध्यक्ष ने बताया कि तहसीलदार द्वारा बउनवान महरूल बनाम चंद्रमणि की एक जमीन के क्रय-विक्रय विवाद के मुकदमे में 03 जून 2024 को पेशी की तिथि निर्धारित की थी। आरोप है कि तहसीलदार द्वारा पेशी की तिथि से पूर्व 30 मई को ही पत्रावली पर बिना सुनवाई व साक्ष्य को देखते हुए वाद में क्रेती महरूल को लाभ पहुंचाते हुए आदेश पारित कर दिया। जबकि पीड़ित के अधिवक्ता 03 जून को साक्ष्य व बहस करने की तैयारी में थे। पूर्व अध्यक्ष ने बताया कि तहसीलदार द्वारा अपनाई गई दोषपूर्ण विधिक प्रक्रिया, जो पूर्णतया असंवैधानिक थी। उसको लेकर जांच की मांग की थी। लेकिन जांच अधिकारी ने भी उनके पक्ष में संबंधित पत्रावली का अवलोकन किए बिना ही जांच रिपोर्ट लगाकर प्रार्थनापत्र का निस्तारण करा दिया। पूर्व अध्यक्ष ने प्रदेश के राज्यपाल को प्रकरण की पुन: किसी उच्चाधिकारी से जांच कराकर पूर्व में की गई जांच में जांच अधिकारी व तहसीलदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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