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Bahraich News: घटनास्थल की स्थिति संघर्ष की ओर कर रही इशारा
Thu, 02 Apr 2026 12:58 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Thu, 02 Apr 2026 12:58 AM IST
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मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के बिछिया बीट में मंगलवार को हुई हथिनी की मौत अब रहस्य बनती जा रही है। पोस्टमार्टम के बाद वन विभाग ने शव को दफना दिया है, लेकिन मौत के कारण स्पष्ट नहीं हो सके हैं। विसरा रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि घटनास्थल की स्थिति संघर्ष की ओर इशारा कर रही है।
जहां हथिनी का शव मिला, वहां करीब 50 मीटर के दायरे में घने बेंत के जंगल बिखरे और टूटे हुए पाए गए। वन्यजीव विशेषज्ञ एके गौतम का कहना है कि इस तरह का फैलाव आमतौर पर हाथियों के बीच संघर्ष के दौरान ही होता है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि किसी आक्रामक टस्कर हाथी से भिड़ंत में मादा हाथी की मौत हुई हो सकती है।
वन विभाग इसे प्रथम दृष्टया स्वाभाविक मौत मान रहा है, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में हाथियों के झुंडों के बीच टकराव की घटनाएं आम हैं। रात में अक्सर चिंघाड़ और पेड़ों के टूटने की आवाजें सुनाई देती हैं, जो संघर्ष की पुष्टि करती हैं।
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इस घटना ने वन विभाग की गश्त व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। दुर्गम और घने जंगल में कई दिनों तक शव पड़ा रहना निगरानी तंत्र की कमजोरी को दर्शाता है। ग्रामीणों का दावा है कि दुर्गंध फैलने के बाद ही मामले की जानकारी सामने आई, जिससे अंदेशा है कि मौत कई दिन पहले हो चुकी थी।
तराई क्षेत्र में बड़ी संख्या में हाथियों का विचरण होता है, जिनमें कुछ टस्कर हाथी काफी आक्रामक माने जाते हैं। इसके बावजूद पर्याप्त संसाधन और नियमित गश्त के अभाव में ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
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मामले में की जा रही है जांच
विसरा रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा। गश्ती टीम को घटना की जानकारी देर से क्यों हुई, इस मामले में जांच की जा रही है।
-अपूर्व दीक्षित, डीएफओ
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जहां हथिनी का शव मिला, वहां करीब 50 मीटर के दायरे में घने बेंत के जंगल बिखरे और टूटे हुए पाए गए। वन्यजीव विशेषज्ञ एके गौतम का कहना है कि इस तरह का फैलाव आमतौर पर हाथियों के बीच संघर्ष के दौरान ही होता है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि किसी आक्रामक टस्कर हाथी से भिड़ंत में मादा हाथी की मौत हुई हो सकती है।
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वन विभाग इसे प्रथम दृष्टया स्वाभाविक मौत मान रहा है, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में हाथियों के झुंडों के बीच टकराव की घटनाएं आम हैं। रात में अक्सर चिंघाड़ और पेड़ों के टूटने की आवाजें सुनाई देती हैं, जो संघर्ष की पुष्टि करती हैं।
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इस घटना ने वन विभाग की गश्त व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। दुर्गम और घने जंगल में कई दिनों तक शव पड़ा रहना निगरानी तंत्र की कमजोरी को दर्शाता है। ग्रामीणों का दावा है कि दुर्गंध फैलने के बाद ही मामले की जानकारी सामने आई, जिससे अंदेशा है कि मौत कई दिन पहले हो चुकी थी।
तराई क्षेत्र में बड़ी संख्या में हाथियों का विचरण होता है, जिनमें कुछ टस्कर हाथी काफी आक्रामक माने जाते हैं। इसके बावजूद पर्याप्त संसाधन और नियमित गश्त के अभाव में ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
मामले में की जा रही है जांच
विसरा रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा। गश्ती टीम को घटना की जानकारी देर से क्यों हुई, इस मामले में जांच की जा रही है।
-अपूर्व दीक्षित, डीएफओ