फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bahraich News ›   The pharmacist could not read the doctor's writing

डॉक्टर की लिखावाट नहीं पढ़ पाए फार्मासिस्ट

Tue, 27 Oct 2015 10:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच Updated Tue, 27 Oct 2015 10:16 PM IST
विज्ञापन
अगर बुखार है और डॉक्टर की लिखी दवा की पर्ची देखकर दुकानदार या फार्मासिस्ट ने उल्टी, दस्त की दवा दे दी तो रोग ठीक होने के बजाए बिगड़ जाएगा। इसे डॉक्टर की गलती कहें या फार्मासिस्ट की। गलती किसी की भी हो लेकिन भुगतता रोगी है। ऐसा ही मामला जिला अस्पताल के वरिष्ठ चर्मरोग विशेषज्ञ से जुड़ा है।
विज्ञापन


डॉक्टर ने पर्चे पर कौन सी दवाएं लिखी हैं, उसे पढ़ने में अस्पताल के कई डॉक्टर व फार्मासिस्ट चकरा गए। यहां तक कि सीएमएस को भी पढ़ने में दिक्कत हुई। यह पर्ची सोशल मीडिया पर भी वायरल वायरल हुई तो अन्य फार्मासिस्ट की मदद से मरीज को दवा मिल सकी।
विज्ञापन


जिला अस्पताल में कार्यरत डॉ. मुकेश कुमार जिंदल चर्म रोग विशेषज्ञ हैं। गत सात सितंबर को खलीकुन (50) ने डॉ. मुकेश को दिखाया। उन्हें चर्म रोग की शिकायत थी। डॉक्टर मुकेश ने दो दवाओं के नाम लिखे जिसे जिला अस्पताल के दवा काउंटर के फार्मासिस्ट भी नहीं पढ़ पाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


उसने अन्य फार्मासिस्टों की मदद से मरीज खलीकुन को दवा दी। इसी बीच फार्मासिस्ट ने दवा की पर्ची की फोटो खींचकर उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दी। यह पर्ची डॉक्टरों व फार्मासिस्टों के व्हाट्स एप या फेसबुक वॉल पर पहुंच रही है और उसका मखौल उड़ाया जा रहा है।

जिले में डॉक्टर मुकेश की तरह ही कई ऐसे डॉक्टर हैं जिनकी लिखावट समझ नहीं आती जबकि यह मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के निर्देशों का उल्लंघन है और अदालत के निर्देशों की अवमानना भी है।

पर्ची देखने के बाद अस्पताल के सीएमएस डॉ. माहेश्वरी पांडेय को भी समझने व पढ़ने में दिक्कत हुई। हालांकि कुछ देर बाद उन्होंने दवाओं के दो नाम टीएमपी व सिटरजिन बताया। कहा कि डॉक्टर मुकेश ने दवाओं के नाम लिखने के बाद उसके नीचे लाइन खींची है।


टीएमपी एंटीबायोटिक है जबकि सिटरजिन एंटी एलर्जिक। बताया कि दोनों दवाएं अस्पताल की हैं। कहा कि अस्पताल के सभी डॉक्टरों को स्पष्ट लिखावट में दवाएं लिखने का निर्देश दिया गया है। इस संबंध में जब डॉ. मुकेश जिंदल का पक्ष जानने के लिए फोन मिलाया गया तो घंटी बजी, लेकिन उन्होंने फोन काट दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed