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बूंदाबांदी और शीतलहर से बढ़ी गलन

Sun, 19 Jan 2020 10:24 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jan 2020 10:24 PM IST
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The melting increased due to drizzle and cold wave
बहराइच नगर में रविवार को ठंड में अलाव जलाकर हाथ सेंकते हुए चाय की चुस्की लेते लोग। - फोटो : BAHRAICH
बहराइच। तराई का मौसम लगातार बदल रहा है। शनिवार को आसमान में बदली छाने से गलन बढ़ गई थी। लोगों को रविवार को मौसम साफ होने की उम्मीद थी, मगर रात से ही तेज हवाओं के चलने का सिलसिला शुरू हो गया। भोर में जब घरों से बाहर निकले तो तेज हवाओं और बूंदाबांदी ने लोगों को बेहाल कर दिया। बूंदाबांदी के साथ शीतलहर चलने से गलन बढ़ गई, जिससे लोग ठिठुरते रहे। रविवार को जिले का न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री सेल्सियस रहा। उधर, आसमान से गिरे पाले ने फसलों पर भी संकट खड़ा कर दिया है। मौसम वैज्ञानिक अभी तीन दिनों तक उतार-चढाव के संकेत दे रहे हैं।
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तराई का मौसम पल-पल बदल रहा है। बीते दिनों लगातार हुई बरसात के बाद शनिवार को मौसम में कुछ सुधार होता दिखाई दिया था। रविवार को मौसम साफ होने की उम्मीद जतायी जा रही थी। मगर सुबह जब लोग बिस्तर से उठे तो तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी का सामना करना पड़ा। इस दौरान घर से बाहर निकलने वाले लोग ठिठुरते दिखाई दिए।
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रात से ही बर्फीली हवाएं चल रही थीं। बूंदाबांदी होने और बर्फीली हवाओं के चलने के कारण गलन बढ़ गई, जिससे लोग ठिठुरते रहे। रविवार होने के कारण स्कूल और कार्यालय बंद थे, मगर जरूरी काम से बाहर निकलने वाले लोगों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ा। बूंदाबांदी का दौर सुबह लगभग 10 बजे तक जारी रहा। सर्द हवाओं व ठंड से से बचने के लिए चौक-चौराहों पर लोग अलाव के किनारे बैठे हुए दिखाई दिए। वहीं चाय के होटलों पर चुस्कियां लेकर भी लोग ठंड से बचने का प्रयास करते रहे।
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तेज हवाओं और बूंदाबांदी के बीच ही पाला भी बरस रहा था। पाला गिरने से फसलों पर भी संकट मंडरा रहा है। रविवार को पूरे दिन बदली छायी रही। लगभग आठ किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चलती रहीं। मौसम वैज्ञानिक डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि रविवार को अधिकतम तापमान 13 डिग्री और न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। अभी मौसम में तीन दिन तक उतार-चढ़ाव के संकेत मिल रहे हैं। ठंड और बढ़ने की संभावना है।
खेतों के आसपास जलाएं आग
मौसम वैज्ञानिक डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि वर्तमान समय में आसमान से पाला गिर रहा है। पाला फसलों के लिए काफी नुकसानदायक होता है। फसलों को इससे बचाने के लिए खेतों के किनारे आग जलाने की की जरूरत है। ऐसे में किसान भूसा और कंडे का उपयोग कर आग जला सकते हैं। जिससे धुआं उठने पर पाला फसल को नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा।

खुले में न बांधें मवेशी
तराई में ठंड में लगातार इजाफा हो रहा है। ठंड बढ़ने से मवेशियों मेें भी कई बीमारियों के फैलने की संभावना पैदा हो गई है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बलवंत सिंह ने बताया कि ठंड से बचाने को पशुपालक मवेशियों को खुले में कतई न बांधें। आसमान से गिरने वाली ओस सबसे अधिक हानिकारक है। मवेशियों को बोरे या टाट जरूर पहनाएं, जिससे ठंड मेें उन्हें बचाया जा सके।
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