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Bahraich News: जंगल के राजा को भा रहा कतर्नियाघाट

Mon, 29 Jul 2024 12:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच Updated Mon, 29 Jul 2024 12:48 AM IST
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The king of the jungle is liking Katarniaghat
कतर्नियाघाट संरक्षित वनक्षेत्र में विचरण करता बाघ। स्रोत वन विभाग।
इस समय जंगल में 59 बाघ कर रहे चहलकदमी
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बाघों के 20 से अधिक शावक भी जंगल में मौजूद
अभी तक सिर्फ पीलीभीत टाइगर रिजर्व में कतर्नियाघाट से ज्यादा 75 बाघ
चार साल में जा चुकी चार बाघों की जान
विश्व बाघ दिवस पर विशेष
बहराइच। नेपाल से सटा कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार अब बाघों की सबसे ज्यादा पसंदीदा जगह बनती जा रही है। आने वाले समय में यह जंगल बाघों के मामले में प्रदेश में नंबर एक पर पहुंचने वाला है। इस समय यहां पर 59 बाघ व 20 से अधिक शावक सक्रिय हैं। ऐसे में 2025 में यहां करीब 80 बाघ होने की उम्मीद है जो प्रदेश के सबसे ज्यादा टाइगर रिजर्व की अपेक्षा सबसे ज्यादा बाघों वाला जंगल होगा।
दुधवा टाइगर रिजर्व का हिस्सा कहे जाने वाले इस जंगल में बाघों की संख्या बढ़ना वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशी की खबर है। वहीं सरकार भी इसके लिए गंभीरता से काम करते हुए बाघों को बचाने के लिए पूरा प्रयास कर रही है। वहीं चार साल में यहां चार बाघों की जान जा चुकी है। जबकि बाघों के हमले में करीब दस से अधिक लोगों की भी मौत हो चुकी है।
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वन विभाग की मानें तो वर्ष 2018 में हुई गणना में यहां पर 29 बाघ निकले थे। इसके बाद वर्ष 2022 की गणना में कतर्नियाघाट में 59 बाघ निकले। जबकि लखीमपुर खीरी जिले के दुधवा नेशनल पार्क मेें 35, किशुनपुर सेंचुरी में 41 व सबसे ज्यादा 75 बाघ पीलीभीत टाइगर रिजर्व में मिले थे। वन विभाग की मानें तो कतर्नियाघाट में इस समय जहां 59 बाघ और 20 से अधिक शावक हैं। विभाग की मानें तो वर्ष 2025 में यहां करीब 80 बाघ सक्रिय हो जाएंगे और इनके शावक भी चहलकदमी करेंगे। ऐसे में आने वाले साल में यह जंगल प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बन जाएगा। इसके लिए वन विभाग ने यहां पर और व्यवस्थाएं बढ़ाने के लिए प्रदेश व केंद्र सरकार को रिपोर्ट भी भेज दी है। जिससे बाघों को बचाने व उनकी देखरेख के लिए उचित प्रबंध किए जा सकेंगे।
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कतर्नियाघाट बाघों की पंसदीदा जगह
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग को वर्ष 1975 में अभ्यारण का दर्जा सरकार ने दिया था। तब से यहां पर बाघों के संरक्षण को लेकर लगातार प्रयास जारी है। यह जंगल नेपाल के बर्दिया नेशनल पार्क से सटा हुआ है। इसके साथ ही यहां पर गेरूआ व कौड़ियाला नदियों के साथ करीब दो दर्जन से अधिक तालाब में बाघों को प्राकृतिक जल मिलता है। भूख मिटाने के लिए जंगल में शिकार के लिए हिरन, नीलगाय, जंगली सुअर आदि जानवरों की काफी बड़ी तादाद है। हरा भरा जंगल नदियों का किनारा होने के चलते बाघों के प्राकृतिक वास के लिए भी यह उपयुक्त माना जाता है। इसी का नतीजा है कि यहां पर बाघों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

बाघों की निगरानी के लिए लगे हैं 300 कैमरे
करीब 551 वर्ग किलोमीटर व सात रेंज में फैले कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार में बाघों की निगरानी के लिए जंगल के विभिन्न हिस्सों में करीब 300 नाइट विजन कैमरे लगाए गए है। इसी आधार पर जंगल के बाघों की गणना भी होती है। इसके साथ ही आए दिन बाघ जंगल के हिस्सों में पर्यटकों व राहगीरों को भी दिखते रहते है।

कतर्नियाघाट में चार बाघों की मौतबीती 9 अक्तूबर 2021 को कतर्नियाघाट वन रेंज में स्थित चौधरी चरण सिंह गिरिजा बैराज पर नर बाघ का उतराता शव मिला था। 24 मई 2022 को कतर्नियाघाट रेंज में रेंज कार्यालय के पास झाड़ियों में नर बाघ का शव मिला था। 30 सितंबर 2023 को कतर्नियाघाट वन रेंज के अंतर्गत ग्राम बर्दिया के पास जंगल के किनारे खेत में घायल मिले नर बाघ की मौत हुई थी। 14 जनवरी 2024 को कतर्नियाघाट वन रेंज में स्थित चौधरी चरण सिंह गिरिजा बैराज पर नदी में मादा बाघिन का शव मिला था।

वर्जन-बाघों की निगरानी के लिए वनकर्मियों की टीमेंं सक्रिय
इस समय जंगल में 59 बाघ व 16 से अधिक शावक सक्रिय हैं। बाघों की निगरानी के लिए वनकर्मियों की टीमेंं सक्रिय रहती है। नाइट विजन कैमरे भी लगाए गए है। उम्मीद है कि वर्ष 2025 में कतर्नियाघाट में बाघों की संख्या 80 पहुंच सकती है। इससे यहां पर प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व की अपेक्षा सबसे ज्यादा बाघ हो जाएंगे।
-बी शिवशंकर, डीएफओ कतर्नियाघाट
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