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Bahraich News: बहुरेंगे थारूओं के दिन, मुख्य धारा से जुड़ सकेंगे
Wed, 24 Jul 2024 01:46 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Wed, 24 Jul 2024 01:46 AM IST
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मिहींपुरवा (बहराइच)। केंद्र सरकार द्वारा मंगलवार को पेश किए गए आम बजट में थारू जनजाति को विकास से जोड़ने की बात कही गई है। ऐसे में इस समुदाय के लिए अलग से बजट मिलने की उम्मीद बढ़ी है। इससे जिले में रहने वाले थारू समुदाय के लोगों को लाभ मिल सकेगा। यहां पर नेपाल सीमा व कतर्नियघाट वन्यजीव विहार के आसपास करीब एक दर्जन गांव थारूओं के हैं। इनमें करीब 20 हजार से अधिक की आबादी निवास करती है।
मिहींपुरवा तहसील क्षेत्र में भारत-नेपाल सीमा और कतर्नियाघाट जंगल के किनारे सोहनी, बलईगांव, धर्मापुर, सुजौली, रमपुरवा, मटेही, आम्बा, विशुनापुर, फकीरपुरी, बर्दिया आदि गांव थारू बहुल माने जाते हैं।
इनका प्रमुख व्यवसाय खेती है। थारू जनजाति की महिलाएं पुरुषों से अधिक मेहनती होती हैं। शराब बनाकर पीने का प्रचलन इनके घरों में होता है। महिला व पुरुष दोनों अपने घर में ही बनाई गई शराब का सेवन करते हैं। ज्यादातर इनका संयुक्त परिवार होता है। अति पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने के कारण शिक्षा के मामले में यह जाति काफी पीछे है। यद्यपि सरकार द्वारा इनके क्षेत्र में प्राइमरी से लेकर इंटर तक के आवासीय विद्यालय खोलकर शिक्षित करने का प्रयास किया गया है और काफी हद तक इनके शिक्षा के स्तर में सुधार भी हुआ है। लेकिन अति पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में बसे होने के कारण अभी तक इनका पूर्ण विकास नहीं हो सका है।
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केंद्र सरकार के द्वारा अनुसूचित जनजाति के लिए भारी भरकम बजट जारी करने से थारू जाति के लोग काफी हद तक विकास की मुख्य धारा से जुड़ सकेंगे। इनके गांव का विकास होगा और घरों की सड़कें दुरुस्त होंगी। मिहींपुरवा तहसील के सोहनी, बलईगांव, धर्मापुर ,सुजौली, रमपुरवा, मटेही, आम्बा ,विशुनापुर ,फकीरपुरी, बर्दिया आदि थारू बाहुल्य गांव हैं जो बहराइच जिले के भारत-नेपाल सीमा और कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के जंगल के किनारे हैं। यहां इनके सभी मूलभूत सुविधाएं अभी मौजूद नहीं हैं। लेकिन अब केंद्र के बजट से उम्मीद जगी है कि इन गांवों के लोगों को भी विकास की मुख्य धारा से जोड़ा जा सकेगा।
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मिहींपुरवा तहसील क्षेत्र में भारत-नेपाल सीमा और कतर्नियाघाट जंगल के किनारे सोहनी, बलईगांव, धर्मापुर, सुजौली, रमपुरवा, मटेही, आम्बा, विशुनापुर, फकीरपुरी, बर्दिया आदि गांव थारू बहुल माने जाते हैं।
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इनका प्रमुख व्यवसाय खेती है। थारू जनजाति की महिलाएं पुरुषों से अधिक मेहनती होती हैं। शराब बनाकर पीने का प्रचलन इनके घरों में होता है। महिला व पुरुष दोनों अपने घर में ही बनाई गई शराब का सेवन करते हैं। ज्यादातर इनका संयुक्त परिवार होता है। अति पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने के कारण शिक्षा के मामले में यह जाति काफी पीछे है। यद्यपि सरकार द्वारा इनके क्षेत्र में प्राइमरी से लेकर इंटर तक के आवासीय विद्यालय खोलकर शिक्षित करने का प्रयास किया गया है और काफी हद तक इनके शिक्षा के स्तर में सुधार भी हुआ है। लेकिन अति पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में बसे होने के कारण अभी तक इनका पूर्ण विकास नहीं हो सका है।
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केंद्र सरकार के द्वारा अनुसूचित जनजाति के लिए भारी भरकम बजट जारी करने से थारू जाति के लोग काफी हद तक विकास की मुख्य धारा से जुड़ सकेंगे। इनके गांव का विकास होगा और घरों की सड़कें दुरुस्त होंगी। मिहींपुरवा तहसील के सोहनी, बलईगांव, धर्मापुर ,सुजौली, रमपुरवा, मटेही, आम्बा ,विशुनापुर ,फकीरपुरी, बर्दिया आदि थारू बाहुल्य गांव हैं जो बहराइच जिले के भारत-नेपाल सीमा और कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के जंगल के किनारे हैं। यहां इनके सभी मूलभूत सुविधाएं अभी मौजूद नहीं हैं। लेकिन अब केंद्र के बजट से उम्मीद जगी है कि इन गांवों के लोगों को भी विकास की मुख्य धारा से जोड़ा जा सकेगा।