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किशोरी के प्रति अफसरों ने बरती लापरवाही

Fri, 07 Apr 2017 11:02 PM IST
अमर उजाला/बहराइच
अमर उजाला/बहराइच Updated Fri, 07 Apr 2017 11:02 PM IST
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The carelessness of the officers to the teenager
किशोरी से बात करने का प्रयास करतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
मोतीपुर रेंज में सड़क किनारे मिली वनदुर्गा के प्रति 75 दिन तक अस्पताल, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी जिम्मेदारियों से किनारा कसे रहे। आम रोगियों की तरह वनदुर्गा जिला अस्पताल में भर्ती रही। दो दिन पूर्व जब मामला उछला, तब सभी अपनी जिम्मेदारी निभाने दौड़े। लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सड़क किनारे मिली किशोरी के मामले में पुलिस ने कोई केस दर्ज नहीं किया। यहां तक कि उसका चिकित्सीय परीक्षण भी नहीं कराया गया। अब सवालों का जवाब देने से जिम्मेदार बच रहे हैं। 
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जिला अस्पताल में भर्ती वनदुर्गा 20 जनवरी को कतर्नियाघाट सेंक्चुरी क्षेत्र के मोतीपुर रेंज में खपरा वन चौकी के पास जख्मी हालत में मिली थी। वन विभाग और ग्रामीणों की सूचना पर मोतीपुर पुलिस ने उसे मोतीपुर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। लेकिन इस मामले में न तो तस्करा दर्ज हुआ और न ही केस।
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जीडी पर अंकन भी नहीं किया गया। जबकि किसी भी किशोरी, बालिका, युवती या महिला के इस हालत में मिलने पर केस दर्ज कर चिकित्सीय परीक्षण कराने का नियम है। मोतीपुर सीएचसी में भी डॉक्टरों ने इलाज की औपचारिकताएं निभाते हुए उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
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यहां आइसोलेशन वार्ड में आम मरीजों के बीच वह भर्ती रही। वार्ड में भर्ती होने वाले मरीज और उनके तीमारदार भी इस बीच वनदुर्गा की हरकत से परेशान हुए। लेकिन अस्पताल प्रशासन सामान्य मरीजों की तरह व्यवहार करता रहा।

दो दिन पूर्व जब मामला उछला, तब आनन-फानन में अस्पताल प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी का अहसास करते हुए पत्र लिखा। डीएम व एसपी भी उसे देखने पहुंचे। अगर भर्ती होने के शुरुआती दौर में उसकी देखभाल इस तरह से होती तो हो सकता है कि फिजिकली तौर पर वह पहले ही फिट हो जाती। 

एसओ बोले, हमने सभी को लिखा पत्र, किसकी तरफ से दर्ज करें केस
मोतीपुर थानाध्यक्ष रामअवतार यादव का कहना है कि किशोरी जब मिली थी। तभी चाइल्ड लाइन, सीडब्ल्यूसी को पत्र लिखा। इसके बाद सीएमओ को अवगत कराया। लेकिन केस दर्ज कराने कोई सामने नहीं आया है। ऐसे में किसकी तरफ से केस दर्ज करें। जब केस दर्ज नहीं हुआ तो चिकित्सीय परीक्षण कैसे कराएं। 

अस्पताल ने निभाई पूरी जिम्मेदारी, समय-समय पर लिखा पत्र
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. डीके सिंह का कहना है कि अस्पताल प्रशासन ने पूरी जिम्मेदारी निभाई है। 25 जनवरी को वनदुर्गा जिला अस्पताल पहुंची थी। तब से उसका समुचित इलाज हो रहा है। डॉ. केके वर्मा, मनोरोग चिकित्सक विजित जायसवाल उसका इलाज कर रहे हैं। फिजिकली फिट होने पर 25 फरवरी को न्यायालय बाल कल्याण समिति को पत्र भी भेजा था, लेकिन कोई समुचित जवाब नहीं मिला। हीलाहवाली स्वास्थ्य विभाग की तरफ से नहीं हुई है। 

भ्रामक भेजा गया था पत्र
न्यायालय बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. राधेश्याम वर्मा का कहना है कि किशोरी जब से भर्ती हुई थी, तब से पांच बार सदस्यों के साथ जिला अस्पताल का दौरा कर उसका हालचाल ले चुके हैं। अस्पताल के सीएमएस ने पत्र भेजा जरूर था, लेकिन पत्र भ्रामक था। सीएमएस किशोरी को फिट बता रहे थे। जबकि सीएमओ की ओर से मानसिक रूप से अक्षम होने की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। ऐसे में पुन: रिपोर्ट मांगी गई थी, जिसे अब सीएमएस ने दिया है।


नहीं दी गई थी जानकारी
जंगल में मिली किशोरी के जिला अस्पताल में भर्ती होने के मामले की जानकारी नहीं दी गई थी। उस समय चुनाव चल रहा था। अब जानकारी मिली है। गुरुवार शाम को किशोरी का हालचाल लिया। इस मामले में अस्पताल प्रशासन को हिदायत भी दी गई है। न्यायालय बाल कल्याण समिति द्वारा किशोरी को लखनऊ भेजने की संस्तुति कर दी गई है। वहां पर उसे बेहतर इलाज मिल सकेगा। 
अजयदीप सिंह, जिलाधिकारी
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