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Bahraich News: सर्वे रिपोर्ट से मिलेगी मजार के अस्तित्व की जानकारी
Sat, 06 Apr 2024 11:14 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Sat, 06 Apr 2024 11:14 PM IST
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इकौना (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में अतिक्रमण कर बने मजार का मामला तूल पकड़ रहा है। वास्तव में यहां मजार थी अथवा नहीं, ये जानने के लिए एसडीएम 1975 में हुए सर्वे की रिपोर्ट का सहारा लेंगे। इसके लिए लखनऊ से संपर्क किया जा रहा है।
बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती के सहेट महेट को वर्ष 1975 में विनियमित क्षेत्र घोषित किया गया था। छह किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र का पुरातत्व विभाग ने सर्वे कराया था। इस दौरान तपोस्थली में नाथ महादेव मंदिर मिला था। जिसका इतिहास अभिलेखों में दर्ज किया गया था। ऐसे में जब बौद्ध तपोस्थली के सहेट महेट स्थित राजगढ़ गुलहरिया में अतिक्रमण कर कथित मीरा बाबा शाह की मजार बनाने का मामला सामने आया तो पुरातत्व विभाग सहित तहसील प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए। ऐसे में एसडीएम इकौना ओमप्रकाश गुप्त ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उपमंडल श्रावस्ती को पत्र भेज कर वर्ष 1975 के सर्वेक्षण के अनुसार संरक्षित क्षेत्र सहेट महेट में पड़ने वाले कच्ची कुटी, पक्की कुटी, गंध कुटी, महास्तूप, जैन टैंपल आदि स्थानों का रकबा क्या था, और इन पर स्थायी व अस्थायी अतिक्रमण के बारे में भी जानकारी मांगी है। पत्र में यह भी पूछा है कि पुरातत्व के सर्वेक्षण के अधीन आने वाले स्थानों पर यदि कोई धार्मिक स्थान है तो उसका केयरटेकर कौन है। इसके जवाब में संरक्षण सहायक भारतीय पुरातत्व विभाग उपमंडल श्रावस्ती अखिलेश तिवारी ने बताया कि अतिक्रमण की जानकारी होने पर मजार के आसपास अस्थायी अतिक्रमण व बोर्ड को हटा दिया गया है। साथ ही एएसआई के सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी भी लगा दी गई है। 1975 के सर्वे के अभिलेख यहां उपस्थित ना होने से तत्काल सूचना नहीं दी जा सकती है। इसके लिए लखनऊ से संपर्क किया जा रहा है।
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बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती के सहेट महेट को वर्ष 1975 में विनियमित क्षेत्र घोषित किया गया था। छह किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र का पुरातत्व विभाग ने सर्वे कराया था। इस दौरान तपोस्थली में नाथ महादेव मंदिर मिला था। जिसका इतिहास अभिलेखों में दर्ज किया गया था। ऐसे में जब बौद्ध तपोस्थली के सहेट महेट स्थित राजगढ़ गुलहरिया में अतिक्रमण कर कथित मीरा बाबा शाह की मजार बनाने का मामला सामने आया तो पुरातत्व विभाग सहित तहसील प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए। ऐसे में एसडीएम इकौना ओमप्रकाश गुप्त ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उपमंडल श्रावस्ती को पत्र भेज कर वर्ष 1975 के सर्वेक्षण के अनुसार संरक्षित क्षेत्र सहेट महेट में पड़ने वाले कच्ची कुटी, पक्की कुटी, गंध कुटी, महास्तूप, जैन टैंपल आदि स्थानों का रकबा क्या था, और इन पर स्थायी व अस्थायी अतिक्रमण के बारे में भी जानकारी मांगी है। पत्र में यह भी पूछा है कि पुरातत्व के सर्वेक्षण के अधीन आने वाले स्थानों पर यदि कोई धार्मिक स्थान है तो उसका केयरटेकर कौन है। इसके जवाब में संरक्षण सहायक भारतीय पुरातत्व विभाग उपमंडल श्रावस्ती अखिलेश तिवारी ने बताया कि अतिक्रमण की जानकारी होने पर मजार के आसपास अस्थायी अतिक्रमण व बोर्ड को हटा दिया गया है। साथ ही एएसआई के सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी भी लगा दी गई है। 1975 के सर्वे के अभिलेख यहां उपस्थित ना होने से तत्काल सूचना नहीं दी जा सकती है। इसके लिए लखनऊ से संपर्क किया जा रहा है।
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