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Bahraich News: हर तरफ पानी का पहरा, घरों में कैद जिंदगी

Thu, 10 Sep 2026 12:24 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2026 12:24 AM IST
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Surrounded by water on all sides, lives confined within homes.
महसी व मिहींपुरवा के गांवों में भरा पानी।
महसी। महसी व मिहींपुरवा के 30 गांवों में बाढ़ से जिंदगी घरों में कैद होकर रह गई है। यहां के करीब 87 हजार लोगों की दिनचर्या पूरी तरह अस्त-व्यस्त है। इन्हें चूल्हा जलाने तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। बुधवार शाम को सरयू का जलस्तर महज दो सेंटीमीटर घटा है, लेकिन नदी अब भी खतरे के निशान से 47 सेमी ऊपर बह रही है। बुधवार शाम चार बजे नदी का जलस्तर 106.54 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 106.07 मीटर पर है। उधर, चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी समेत अन्य बैराजों से छोड़े जा रहे पानी में कमी आई है। एल्गिन ब्रिज पर डिस्चार्ज घटकर 3.37 लाख क्यूसेक रह गया है। इससे उम्मीद है कि अब जलस्तर में गिरावट में गिरावट आएगी।
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महसी तहसील के कई गांवों में ग्रामीण पिछले चार दिनों से बाढ़ के बीच घरों और छप्परों में रहने को मजबूर हैं। गांवों के संपर्क मार्गों पर दो से ढाई फीट तक पानी भरा होने से घरों से निकलना मुश्किल है। घरों और अहातों में पानी पहुंचने के कारण लोगों के सामने खाना बनाने, पशुओं को बांधने और जरूरी सामान सुरक्षित रखने तक की समस्या खड़ी हो गई है। ग्रामीण जैसे-तैसे अपना गुजर-बसर कर रहे हैं।
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सरयू का जलस्तर थोड़ा घटने से महसी तहसील के पूरे प्रसाद, गलकारा, पिपरी, पिपरा महंत, पूर्व जोधपुर, यादवपुरी, गोलागंज, कोठार मांझा, दरियाबुर्द और यूनियन पुरवा समेत कई इलाकों में पानी कुछ कम हुआ है। हालांकि, जलभराव के कारण रास्ते अभी भी बंद हैं। गलगारा निवासी परमात्मा प्रसाद का कहना है कि पानी उतरने में अभी समय लगेगा। ग्रामीणों ने नावों की उपलब्धता बढ़ाने, भोजन और पेयजल की नियमित आपूर्ति तथा स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था कराने की मांग की है।
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पशुओं को बांधने के लिए भी सुरक्षित स्थान नहीं
बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ी समस्या भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों की है। कई घरों में पानी भरा होने के कारण खाना बनाने की जगह तक नहीं बची है। पशुओं को बांधने के लिए भी सुरक्षित स्थान नहीं है। ग्रामीणों को बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
मिहींपुरवा में स्कूल संचालन प्रभावित

मिहींपुरवा तहसील क्षेत्र में भी बाढ़ का असर बना हुआ है। धर्मपुर रेतिया स्थित प्राथमिक विद्यालय में पानी भरा होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है। विद्यालय का संचालन धनियाबेली में किया जा रहा है। वहीं संपतपुरवा, गुप्तापूर्वा, त्रिलोकिगौढ़ी, तिलवा, मुंजवा, चहलवा और मोरहवा समेत कई गांवों के बाहर अभी भी बाढ़ का पानी भरा हुआ है। इससे आवागमन प्रभावित है।
राजस्व टीमें निगरानी में, लंच पैकेट पहुंचाए जा रहे
उप जिलाधिकारी मोनालिसा जौहरी ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं। राजस्व कर्मियों की टीमें प्रभावित इलाकों में निगरानी कर रही हैं। जरूरत के अनुसार बाढ़ प्रभावित परिवारों तक लंच पैकेट पहुंचाए जा रहे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को आवश्यक राहत उपलब्ध कराना और स्थिति पर लगातार नजर रखना है।

बैराजों से पानी का डिस्चार्ज घटा
बुधवार शाम चार बजे गिरिजापुरी बैराज से 1,31,478 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज दर्ज किया गया। यहां जलस्तर 135.30 मीटर रहा और इसमें गिरावट दर्ज की गई। शारदा बैराज से 1,77,133 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। सरयू बैराज का डिस्चार्ज 5,954 क्यूसेक रहा। वहीं, सरयू बैराज से 23,075 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ। एल्गिन ब्रिज पर कुल डिस्चार्ज 3,37,640 क्यूसेक दर्ज किया गया और यहां भी जलस्तर में गिरावट का रुख रहा।

महसी व मिहींपुरवा के गांवों में भरा पानी।

महसी व मिहींपुरवा के गांवों में भरा पानी।

महसी व मिहींपुरवा के गांवों में भरा पानी।

महसी व मिहींपुरवा के गांवों में भरा पानी।

महसी व मिहींपुरवा के गांवों में भरा पानी।

महसी व मिहींपुरवा के गांवों में भरा पानी।

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