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विद्यार्थियों ने देखी परिंदों की दुनिया
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Fri, 04 Dec 2015 09:59 PM IST
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बहराइच। बर्ड फेस्टिवल डे पर शुक्रवार की सुबह बहराइच वन प्रभाग के सभी छह रेंजों में स्थित झील, सरोवर, नदी और नालों के तट पर बर्ड वाचर कार्यक्रम हुआ।
मौके पर विद्यार्थियों को प्रवास कर रहे पक्षियों को दिखाकर उनकी विशेषता बताई गई। चित्तौरा झील के तट पर डीएम ने कार्यक्रम का उद्घाटन कर मौजूद विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों को पक्षी विज्ञान की जानकारी दी।
शुक्रवार को बर्ड फेस्टिवल डे जिले में धूमधाम से मनाया गया। बहराइच वन प्रभाग की ओर से चित्तौरा झील, घाघराघाट एल्गिन रेलवे ब्रिज, चमड़िया ताल, गोपिया बैराज, पटना सिंचाई कॉलोनी बांध तथा जोकहा नाला पोखरा पर बर्ड वॉचर कार्यक्रम हुआ।
चित्तौरा झील के तट पर सुबह छह बजे कार्यक्रम का शुभारंभ डीएम अभय कुमार ने झील में प्रवास कर रहे पक्षियों को देखकर किया।
इस मौके पर सेंट नार्बट स्कूल सुहेलनगर, प्राथमिक और जूनियर विद्यालय के मौजूद 100 से अधिक विद्यार्थियों और शिक्षक-शिक्षिकाओं को झील में प्रवास कर रहे पक्षियों को दिखाकर उनके बारे में बताया।
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डीएम ने तट पर मौजूद विद्यार्थियों को पक्षी विज्ञान के बारे में जानकारी दी। प्रभागीय वनाधिकारी अखिलेश पांडेय ने इस मौके पर बर्ड वॉचिंग के तौर तरीके बताते हुए पक्षियों को देखने और पहचानने के टिप्स सुझाए।
उधर, नानपारा रेंज के चमड़िया ताल में उप प्रभागीय वनाधिकारी पीके राय के नेतृत्व में कार्यक्रम हुआ। जबकि कैसरगंज रेंज में घाघराघाट एल्गिन ब्रिज पर वन क्षेत्राधिकारी टीएस मिश्रा, गोपिया बैराज पर प्रभारी वन क्षेत्राधिकारी जहीर, रुपईडीहा में पटना सिंचाई कॉलोनी बांध पर वन क्षेत्राधिकारी एके सिद्दीकी व अब्दुल्लागंज में स्थित जोकहा नाला पोखरा पर वन क्षेत्राधिकारी जेपी चौबे की अगुवाई में पक्षियों को देखने के लिए छात्र और ग्रामीण इकट्ठा हुए।
डीएफओ ने दावा कि शुक्रवार सुबह छह बजे से 10 बजे तक चले अभियान में 94 प्रजातियों के 2309 पक्षियों को देखा गया। उन्होंने कहा कि यह एक रिकॉर्ड है।
जिले के लोगों द्वारा अधिक से अधिक संख्या में पक्षियों को देखने की सूचना प्रदेश मुख्यालय को दी जाएगी। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में इस अभियान को नामित कराने की कोशिश होगी।
चार अध्यापकों को बनाया गया पर्यवेक्षक
डीएफओ अखिलेश पांडेय ने बताया कि बर्ड वॉचर कार्यक्रम के तहत ज्यादा से ज्यादा लोगों को चिह्नित करने के लिए मौके पर दो दो शिक्षक और शिक्षिकाओं को स्वतंत्र साक्ष्य व पक्षी गणना ऑडीटर के रूप में नामित किया गया। इसकी रिपोर्ट भी गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भेजी गई है।
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मौके पर विद्यार्थियों को प्रवास कर रहे पक्षियों को दिखाकर उनकी विशेषता बताई गई। चित्तौरा झील के तट पर डीएम ने कार्यक्रम का उद्घाटन कर मौजूद विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों को पक्षी विज्ञान की जानकारी दी।
शुक्रवार को बर्ड फेस्टिवल डे जिले में धूमधाम से मनाया गया। बहराइच वन प्रभाग की ओर से चित्तौरा झील, घाघराघाट एल्गिन रेलवे ब्रिज, चमड़िया ताल, गोपिया बैराज, पटना सिंचाई कॉलोनी बांध तथा जोकहा नाला पोखरा पर बर्ड वॉचर कार्यक्रम हुआ।
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चित्तौरा झील के तट पर सुबह छह बजे कार्यक्रम का शुभारंभ डीएम अभय कुमार ने झील में प्रवास कर रहे पक्षियों को देखकर किया।
इस मौके पर सेंट नार्बट स्कूल सुहेलनगर, प्राथमिक और जूनियर विद्यालय के मौजूद 100 से अधिक विद्यार्थियों और शिक्षक-शिक्षिकाओं को झील में प्रवास कर रहे पक्षियों को दिखाकर उनके बारे में बताया।
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डीएम ने तट पर मौजूद विद्यार्थियों को पक्षी विज्ञान के बारे में जानकारी दी। प्रभागीय वनाधिकारी अखिलेश पांडेय ने इस मौके पर बर्ड वॉचिंग के तौर तरीके बताते हुए पक्षियों को देखने और पहचानने के टिप्स सुझाए।
उधर, नानपारा रेंज के चमड़िया ताल में उप प्रभागीय वनाधिकारी पीके राय के नेतृत्व में कार्यक्रम हुआ। जबकि कैसरगंज रेंज में घाघराघाट एल्गिन ब्रिज पर वन क्षेत्राधिकारी टीएस मिश्रा, गोपिया बैराज पर प्रभारी वन क्षेत्राधिकारी जहीर, रुपईडीहा में पटना सिंचाई कॉलोनी बांध पर वन क्षेत्राधिकारी एके सिद्दीकी व अब्दुल्लागंज में स्थित जोकहा नाला पोखरा पर वन क्षेत्राधिकारी जेपी चौबे की अगुवाई में पक्षियों को देखने के लिए छात्र और ग्रामीण इकट्ठा हुए।
डीएफओ ने दावा कि शुक्रवार सुबह छह बजे से 10 बजे तक चले अभियान में 94 प्रजातियों के 2309 पक्षियों को देखा गया। उन्होंने कहा कि यह एक रिकॉर्ड है।
जिले के लोगों द्वारा अधिक से अधिक संख्या में पक्षियों को देखने की सूचना प्रदेश मुख्यालय को दी जाएगी। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में इस अभियान को नामित कराने की कोशिश होगी।
चार अध्यापकों को बनाया गया पर्यवेक्षक
डीएफओ अखिलेश पांडेय ने बताया कि बर्ड वॉचर कार्यक्रम के तहत ज्यादा से ज्यादा लोगों को चिह्नित करने के लिए मौके पर दो दो शिक्षक और शिक्षिकाओं को स्वतंत्र साक्ष्य व पक्षी गणना ऑडीटर के रूप में नामित किया गया। इसकी रिपोर्ट भी गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भेजी गई है।