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श्रावस्ती में सपा हारी तो बहराइच में मिली जीत
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Sun, 07 Feb 2016 11:18 PM IST
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मतदान के बाद मतगणना हुई तो महसी में भाजपा समर्थित उम्मीदवार कृष्णावती ने सीट पर कब्जा कर लिया। मिहींपुरवा में अयोध्या सिंह और विशेश्वरगंज में राणा अगम सिंह ने जीत दर्ज की। दोनों ने सपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता। मामूली कहासुनी के बीच चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हो गया।
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इस दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तीनों मतदान केंद्रों पर मुस्तैद रहे। जिले के 14 विकासखंडों में ब्लॉक प्रमुख चुनाव की प्रक्रिया सप्ताह भर पूर्व शुरू हुई थी। सपा ने अपने उम्मीदवारों की सूची घोषित की थी। अन्य किसी दल ने उम्मीदवारों का नाम सार्वजनिक नहीं किया था।
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पांच फरवरी को नामांकन के दिन 10 विकासखंडों में ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पर सपा के उम्मीदवारों ने निर्विरोध निर्वाचित होकर कब्जा जमा लिया था। जबकि शिवपुर में नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सपा उम्मीदवार एकमात्र प्रत्याशी के रूप में मैदान में रह गई थी। ऐसे में 11 सीटों पर सपा काबिज हो गई।
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लेकिन महसी, मिहींपुरवा और विशेश्वरगंज में एक से अधिक प्रत्याशी होने के कारण चुनाव की स्थिति बन गई। रविवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच चुनाव कराए गए। उप जिला निर्वाचन अधिकारी विद्याशंकर सिंह ने बताया कि सुबह 11 बजे से दोपहर बाद तीन बजे तक मतदान हुआ।
इसके बाद मतगणना कराई गई। महसी में भाजपा समर्थित उम्मीदवार कृष्णावती पत्नी बृजेश्वर सिंह को 61 मत मिले। उनके प्रतिद्वंद्वी सपा प्रत्याशी प्रभाकर दत्त बाजपेई को 43 मतों से संतोष करना पड़ा। यहां नौ मत अवैध घोषित किए गए।
मिहींपुरवा में 185 क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने मताधिकार का प्रयोग किया। यहां सपा के उम्मीदवार अयोध्या सिंह को 166 मत मिले। उनके प्रतिद्वंद्वी बसपा समर्थित प्रत्याशी श्रवण मदेशिया को 16 मतों से संतोष करना पड़ा। निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रही विमला दीक्षित पत्नी राजकिशोर दीक्षित को एक भी मत नहीं मिले।
यहां पर तीन मत अवैध घोषित किए गए। विशेश्वरगंज में सभी 104 मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया। यहां सपा उम्मीदवार राणा अगम सिंह को 64 और उनके प्रतिद्वंद्वी निर्दल उम्मीदवार बीना राज मिश्र को 39 मत प्राप्त हुए। एक मत अवैध घोषित किया गया।
महसी में ब्लॉक प्रमुख पद पर विजयी कृष्णावती पूर्व विधायक सुरेश्वर सिंह के भाई की पत्नी हैं। इसके कारण पूर्व विधायक की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी। विशेश्वरगंज में पूर्व सांसद रानावीर सिंह के पुत्र राना अगम सिंह मैदान में थे। दोनों उम्मीदवारों के चुनाव जीतने से पूर्व माननीयों की प्रतिष्ठा बरकरार रही।