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प्रवासी कामगारों को रोजागर देकर आत्मनिर्भर बनाएगा रेशम विभाग

Mon, 15 Jun 2020 09:57 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 15 Jun 2020 09:57 PM IST
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Silk Department will make migrant workers self dependent
बहराइच। इन दिनों प्रवासी कामगारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इसके लिए रेशम विभाग अपनी योजनाओं से उन्हें रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाएगा। इससे प्रवासी मजदूर अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ दूसरों को भी रोजगार से जोड़ सकेंगे। विभाग ने पहले चरण में 928 श्रमिक मजदूरों को रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा है। अगर इनकी संख्या बढ़ेगी तो उन्हें भी रोजगार से जोड़ा जाएगा।
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देश में अचानक आई कोरोना बीमारी ने सबके सामने संकट खड़ा कर दिया है। घर से दूर रहकर अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले श्रमिक मजदूर अपनी जान बचाने के लिए रोजगार छोड़कर घर लौट आए हैं। ऐसे में अब उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया। बाहर से आए श्रमिकों को रोजगार के लिए भटकना न पड़े और वे आत्मनिर्भर बन सकें, इसके लिए रेशम विभाग ने अपनी योजनाओं के माध्यम से उनको जोड़कर उनके संकट को दूर करने की कार्ययोजना बनाई है।
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सहायक निदेशक रेशम एसबी सिंह ने बताया कि अभी विभाग ने चार ब्लॉकों में संचालित हो रहे रेशम फार्म व तकनीकी सेवा केंद्रों के माध्यम से 928 श्रमिक मजदूरों को रोजगार देने का लक्ष्य रखा है। बाहर से आए हुए श्रमिकों को योजनाओं से जोड़कर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
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माडल चाकी कीटपालन एवं शहतूत उद्यान की स्थापना करने वाले 200 श्रमिकों, रेशम कीट के अंडे आदि विकास की योजना से 100, जागरूकता एवं प्रशिक्षण की योजना से 100 व सिल्क समग्र योजना से 528 श्रमिकों को रोजगार देने का लक्ष्य रेशम विभाग ने तैयार किया है।
तय लक्ष्य के अनुसार अनुसूचित जाति के 208 श्रमिकों को रोजगार दिया जाएगा। समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित स्वत: रोजगार योजना से जोड़कर इन लोगों को अनुदान भी दिलाया जाएगा। एक लाख रुपये लोन लेने पर समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित योजना के माध्यम से 10 हजार रुपये का अनुदान मिलेगा।

सहायक निदेशक कृषि एसबी सिंह ने बताया कि बाहर से आने वाले श्रमिकों को रोजगार देने के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है। श्रमिक चाहें तो फार्म पर रहकर काम करें या अपने खेतों में शहतूत का पेड़ लगाकर कोया का उत्पादन कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। विभाग का लक्ष्य है कि श्रमिकों को रोजगार देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए। 31 मार्च तक रजिस्ट्रेशन कराकर श्रमिक जुड़ सकते हैं।
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